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इंदौर में जल नहीं ‘जहर’ बट रहा: गंदा पानी पीने से एक और मौत, 32 जिंदगी ICU में जंग लड़ रहीं

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एमपी के इंदौर जिले के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से बीमार पड़ने और मौतों होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. दूषित पानी पाने से 60 वर्षीय महिला गीता बाई धुरकर की इलाज के दौरान मौत हो गई. इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है और स्थानीय लोगों में प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी नाराजगी है. वहीं स्थानीय लोगों की मानें तो दूषित पानी पीने से अब तक कुल करीब 10 लोगों की मौत हो चुकी है.

बीते दिनों भागीरथपुरा में अचानक उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी थी. कई घरों में एक साथ कई लोग बीमार पड़ रहे थे. इसी दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने क्षेत्र में पहुंचकर घर-घर सर्वे और जांच की थी. मृत महिला के परिजनों के अनुसार उस समय गीता बाई धुरकर को भी उल्टी और दस्त की शिकायत थी. हालत बिगड़ने पर उन्हें इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. परिजनों ने बताया कि गीता बाई के परिवार में उनके बेटे और भतीजे को भी इसी तरह की समस्या हुई थी.

समय पर इलाज मिलने से बेटे और भतीजे की हालत में सुधार हुआ और वह स्वस्थ होकर घर लौट आए, लेकिन गीता बाई की तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई. अधिक उम्र और लगातार दस्त-उल्टी के कारण उनके शरीर में पानी की भारी कमी हो गई, जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई और इजाल के दौरान उनकी मौत हो गई.

लोगों का आरोप, लंबे समय से हो रही दूषित पानी की आपूर्ति

स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से दूषित पीने के पानी की आपूर्ति हो रही है. कई बार शिकायत करने के बावजूद नगर निगम और संबंधित विभागों ने इस ओर गंभीरता नहीं दिखाई. नलों से गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं, लेकिन समय रहते सुधार नहीं किया गया, जिसका खामियाजा अब लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है. इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इलाके में निगरानी बढ़ाने और शेष मरीजों की जांच व इलाज की बात कही है.

वहीं प्रशासन ने दूषित पानी के सैंपल लेकर जांच कराने का दावा किया है. बावजूद इसके, भागीरथपुरा में लगातार हो रही मौतों ने सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और शुद्ध पेयजल की तत्काल व्यवस्था की जाए, ताकि आगे किसी और की जान न जाए.

दूषित पानी ने ली अब तक कितनों की जान?

देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप से 10 लोगों की मौत की जानकारी मिली है. वहीं स्थानीय नागरिकों ने इस प्रकोप अब तक 6 माह के बच्चे समेत करीब 15 लोगों के दम तोड़ने का दावा किया है. वहीं भागीरथपुरा के बीजेपी पार्षद ने TV9 से कहा कि अब तक 15 लोगों की जान गई एक शख्स की हालात गंभीर है.

8 दिन हो गए लीकेज कहां से हुआ अब तक पता नहीं चल सका. इस लापरवाही का सिस्टम जिम्मेदार है. मुझे इस्तीफा देने में कोई दिक्कत नहीं है. इस दावे की स्वास्थ्य विभाग ने पुष्टि नहीं की है. पेयजल के नमूनों की शुरुआती जांच रिपोर्ट के आधार पर इलाके में हैजा फैलने के संदेह पर महापौर ने कहा कि इस बारे में स्वास्थ्य विभाग ही जानकारी दे सकता है.

क्या कहते हैं जिम्मेदार?

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने बृहस्पतिवार को बताया था कि शहर के एक चिकित्सा महाविद्यालय की प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि भागीरथपुरा में पाइपलाइन में लीकेज के कारण पेयजल दूषित हुआ था. सीएमएचओ ने हालांकि जांच रिपोर्ट का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया था. प्रशासन के अधिकारी भी इस रिपोर्ट के बारे में स्पष्ट जानकारी देने से बच रहे हैं.

क्या कहते हैं अधिकारी?

अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास पेयजल आपूर्ति की मुख्य पाइपलाइन में उस जगह लीकेज मिला है, जिसके ऊपर एक शौचालय बना है. अधिकारियों का दावा है कि इस लीकेज के कारण ही पेयजल दूषित हुई है.

दूषित पेय जल आपूर्ति से कितने लोग प्रभावित?

भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त प्रकोप से गुजरे 9 दिनों में करीब 1400 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार रात तक की स्थिति के हवाले से बताया कि इस क्षेत्र के 272 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती किया गया था, जिनमें से 71 लोगों को छुट्टी दी जा चुकी है. अधिकारी ने बताया कि अस्पतालों में भर्ती 201 मरीजों में शामिल 32 लोग आईसीयू में हैं.

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