डिफेंस सेक्टर में ‘बुल रन’ जारी: 2026 में ये शेयर बन सकते हैं मल्टीबैगर, जानें एक्सपर्ट्स की पसंदीदा लिस्ट
ऐसे समय में जब बाजार के कई हिस्सों पर कमाई का दबाव बना हुआ है, डिफेंस सेक्टर के शेयर स्थिरता का सहारा बनकर उभर रहे हैं. मोतीलाल ओसवाल की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, जहां स्मॉल-कैप कंपनियों की कमाई के अनुमान औसतन 5.5% तक घटाए जा रहे हैं, वहीं कुछ बड़े सेक्टर, खासकर डिफेंस सेक्टर में कमाई के अनुमान बढ़ाए जा रहे हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि मोतीलाल ओसवाल के कवर्ड स्टॉक्स में पहले जहां कमाई के अनुमान में कटौती का ट्रेंड था, अब धीरे-धीरे उसकी जगह कमाई बढ़ने का रुझान देखने को मिल रहा है. इससे यह साफ होता है कि बड़े और मजबूत कंपनियां मौजूदा बाजार दबाव के बावजूद टिकाऊ साबित हो रही हैं.
डिफेंस सेक्टर के टॉप शेयर आगे
बड़े डिफेंस शेयरों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (HAL) सबसे आगे नजर आ रहे हैं. ब्रोकरेज रिपोर्ट के मुताबिक, FY26 की दूसरी तिमाही तक के तीन महीनों में लार्ज-कैप कंपनियों की कुल कमाई के अनुमान में करीब 2% की बढ़ोतरी हुई है, जबकि मिड-कैप कंपनियों में यह बढ़त 3.1% रही. इसके उलट, स्मॉल-कैप शेयरों पर दबाव बना हुआ है, जिसकी वजह लिक्विडिटी की कमी और कुछ सेक्टरों की कमजोर परफॉर्मेंस है.
सेक्टर ट्रेंड क्या कहते हैं?
सेक्टर के हिसाब से देखें तो डिफेंस और उससे जुड़े लार्ज-कैप शेयरों के अलावा ऑयल एंड गैस, टेलीकॉम, सरकारी बैंक और इंश्योरेंस सेक्टर में भी कमाई के अनुमान बढ़ाए गए हैं. वहीं यूटिलिटी और कुछ कंज्यूमर सेक्टर पिछड़ते नजर आए. मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि भले ही अलग-अलग सेक्टरों में प्रदर्शन असमान हो, लेकिन डिफेंस सेक्टर अब भी बाकी सेक्टरों के मुकाबले ज्यादा मजबूत बना हुआ है.
GDP ग्रोथ की चिंता क्यों बेवजह है?
निवेशकों की एक आम चिंता यह रहती है कि अगर नॉमिनल GDP ग्रोथ 10% से नीचे रही तो क्या कंपनियों की कमाई बढ़ पाएगी. इस पर मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि यह चिंता कुछ ज्यादा ही बढ़ा-चढ़ाकर देखी जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, नॉमिनल GDP ग्रोथ का कंपनियों की सालाना कमाई पर असर सीमित होता है.
2026 के लिए कमाई का अनुमान
मोतीलाल ओसवाल ने FY26-FY27 के लिए अपनी कवरेज वाली कंपनियों की कमाई में 12-15% और निफ्टी इंडेक्स की कमाई में 15-16% की बढ़ोतरी का अनुमान जताया है. ब्रोकरेज के मुताबिक, सरकारी खर्च और मौद्रिक नीतियों से जुड़े प्रोत्साहन उपायों ने कमाई के माहौल को पिछले साल के मुकाबले बेहतर किया है.
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