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पीएलएफआई के इनामी नक्सली आलोक यादव ने किया पुलिस के सामने सरेंडर, 35 से अधिक मामले हैं दर्ज

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लातेहारः नक्सली संगठन पीएलएफआई के इनामी नक्सली आलोक यादव ने शुक्रवार को लातेहार एसपी कुमार गौरव, सशस्त्र सीमा बल के कमांडेंट राजेश सिंह और सीआरपीएफ कमांडेंट यादराम बुनकर के समक्ष हथियार के साथ आत्मसमर्पण कर दिया. आलोक यादव पर 1 लाख रुपए इनाम भी घोषित था. आलोक लातेहार के बालूमाथ बसिया का रहने वाला है. आलोक यादव पर राज्य के विभिन्न थाना क्षेत्र में 35 से अधिक मामले दर्ज हैं. इसके आत्मसमर्पण करने से पीएलएफआई नक्सली संगठन को बड़ा झटका लगा है.

दरअसल लातेहार पुलिस के द्वारा नक्सलियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है. नक्सलियों के खिलाफ हो रही लगातार कार्रवाई से लगभग सभी नक्सली संगठन काफी कमजोर हो गए हैं. इसी बीच लातेहार जिले में पीएलएफआई नक्सली संगठन को लीड कर रहे नक्सली आलोक यादव ने भी सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण करने के लिए पुलिस अधिकारियों से संपर्क साधा.

पुलिस अधिकारियों के द्वारा नक्सली को आत्मसमर्पण नीति के विषय में बताया गया और आत्मसमर्पण के बाद उसे सरकारी प्रावधान के तहत सहयोग करने का भी आश्वासन दिया गया. इसके बाद शुक्रवार को नक्सली आलोक यादव ने एक देसी राइफल तथा चार गोलियों के साथ लातेहार एसपी कुमार गौरव, सशस्त्र सीमा बल के कमांडेंट राजेश सिंह और सीआरपीएफ कमांडेंट यादराम बुनकर के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया.

नक्सलियों के समक्ष है अंतिम अवसर- एसपी

लातेहार एसपी कुमार गौरव ने बताया कि शुक्रवार को पीएलएफआई के नक्सली आलोक यादव ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है. इस पर एक लाख रुपए इनाम भी घोषित था. उन्होंने बताया कि पुलिस द्वारा नक्सलियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है. मार्च 2026 तक पूरे जिले को नक्सली मुक्त बना दिया जाएगा. नक्सलियों के पास अंतिम अवसर बचा है कि वह सरकार की नई दिशा कार्यक्रम का लाभ लेते हुए आत्मसमर्पण कर दें. उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी.

आत्मसमर्पण ही नक्सलियों के लिए बेहतर रास्ता- कमांडेंट

वहीं सशस्त्र सीमा बल 32वीं बटालियन के कमांडेंट राजेश सिंह ने कहा कि आत्मसमर्पण ही नक्सलियों के सामने सबसे बेहतर रास्ता बचा हुआ है. उन्होंने कहा कि पुलिस और सुरक्षा बल निर्धारित समय पर अपने टारगेट को पूरा करने के लिए कृत संकल्पित हैं. इसलिए नक्सली सरकार की आत्मसमर्पण नीति का लाभ लेकर अपने जीवन को सही रास्ते पर ले जाएं.

मरने से बेहतर है आत्मसमर्पण करना- कमांडेंट

वहीं सीआरपीएफ के कमांडेंट यादराम बुनकर ने कहा कि मरने से बेहतर है कि नक्सली आत्मसमर्पण कर अपने बचे हुए जीवन को अपने परिवार के साथ खुशहाली से जिए. उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण ही नक्सलियों के पास अब एकमात्र रास्ता बचा हुआ है. आत्मसमर्पण के अवसर पर द्वितीय कमान अधिकारी आरसी मिश्रा, लातेहार डीएसपी अरविंद कुमार समेत अन्य पुलिस के अधिकारी भी उपस्थित थे.

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