Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
क्या भारत में नागरिकों को हासिल है पूरी आजादी? जानिए संविधान प्रदत्त 11 अधिकारों के साथ जुड़ी अहम का... क्या NDA में होगा बड़ा विस्तार? परिसीमन और महिला आरक्षण बिल के बीच DMK, NCP और अकाली दल के साथ आने क... महाराष्ट्र के सांगली में बड़ा हादसा: रेणावी घाट में दो ST बसों की आमने-सामने भीषण टक्कर स्वतंत्रता दिवस 2026: दिल्ली मेट्रो की विशेष व्यवस्था, लाल किला और जामा मस्जिद के लिए सुबह 4 बजे से ... अयोध्या पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महंत परमहंस रामचंद्र दास के स्मृति समारोह में हुए शामिल 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्र के नाम संबोधन, देशवासि... PM मोदी और विदेश नीति पर टिप्पणी से गरमाई सियासत: राजनाथ सिंह और एकनाथ शिंदे ने राहुल गांधी को घेरा,... CJI सूर्य कांत विवाद के बाद सुर्खियों में NALSAR यूनिवर्सिटी, BCI ने वापस लिया निलंबन फैसला 4,200 करोड़ के लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब 15 अगस्त को देश मनाएगा 80वां स्वतंत्रता दिवस, लाल किले पर समारोह के दौरान मौसम पर टिकीं निगाहें

पुलिस की बड़ी सफलता! 1 करोड़ का इनामी नक्सली कमांडर हिडमा ढेर, पत्नी का भी एनकाउंटर, नक्सलियों को सबसे बड़ा झटका

20

आंध्र प्रदेश-छत्तीसगढ़ बॉर्डर के पास जंगल में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई. इस मुठभेड़ में शीर्ष नक्सली कमांडर मादवी हिडमा और उसकी पत्नी को गोली लगी और दोनों की मौत हो गई. आंध्र प्रदेश के अल्लूरी जिले और छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षाबलों ने माओवादियों को पकड़ने के लिए सर्च अभियान चलाया था. इसी दौरान नक्सलियों ने जवानों पर फायरिंग शुरू कर दी.

मादवी हिडमा की उम्र 43 वर्ष थी. पिछले दो दशकों से सुरक्षा बलों के लिए वह चुनौती बना हुआ था. वह न सिर्फ PLGA (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) की बटालियन नंबर 1 का प्रमुख था, बल्कि सीपीआई (माओवादी) की केंद्रीय समिति का भी सबसे कम उम्र का सदस्य रहा था. उसकी रणनीतिक सोच और जंगलों में गुरिल्ला युद्ध की क्षमता ने उसे संगठन का सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक बना दिया था.

सुकमा हमले का मास्टरमाइंड था

हिडमा का जन्म वर्ष 1981 में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुवर्ती इलाके में हुआ था. बेहद कम उम्र में ही वह माओवादी संगठन से जुड़ गया और कमांडर बन गया. वर्ष 2013 में छत्तीसगढ़ के दरभा घाटी नरसंहार में वह मुख्य साजिशकर्ता था, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं समेत 27 लोग मारे गए थे.

इसके अलावा 2017 में सुकमा में CRPF पर हुए घातक हमले में भी उसका मुख्य रोल था, जिसमें 25 जवान शहीद हुए थे. उसने कम से कम 26 बड़े हमलों की योजना बनाई और उन्हें अंजाम दिया. उस पर एक करोड़ का इनाम था.

पत्नी भी नक्सल गतिविधियों में शामिल रही

आंध्र प्रदेश की पुलिस और विशेष बलों को लंबे समय से उसकी गतिविधियों के बारे में इनपुट मिल रहे थे. ताजा मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने गुप्त सूचना के आधार पर जंगल में घेरा डालकर ऑपरेशन शुरू किया. जवाबी फायरिंग में हिडमा और उसकी पत्नी मारे गए. उसकी पत्नी भी नक्सली संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी और कई ऑपरेशनों में सक्रिय रही थी.

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि हिडमा की मौत से माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगेगा. वह न सिर्फ प्रमुख रणनीतिकार था, बल्कि दक्षिण बस्तर में संगठन की पकड़ बनाए रखने में उसकी भूमिका सबसे अहम मानी जाती थी. उसकी मौत से माओवादियों का नेटवर्क कमजोर होगा और जंगलों में उनकी गतिविधियों पर लगाम लगाने में आसानी होगी.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.