इंदौर: बाजारों में फिर से नोटबंदी (Demonetization ) की घबराहट बढ़ती दिख रही है। बीते दिनों से बाजार में पांच सौ रुपये के नोट बंद होने की चर्चा शुरू हुई। रिजर्व बैंक के नाम से एक संदेश वाट्सएप ग्रुपों पर प्रसारित हुआ। इसके बाद कारोबारी फिर से नोटबंदी की आशंका में परेशान दिखे।
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के सियागंज जैसे सबसे बड़े थोक बाजार से लेकर हवाला कारोबारियों के बीच भी ऐसे संदेश दिनभर चलते रहे। इसमें बताया गया कि बैंकों को एटीएम से 500 रुपये के नोट हटाने का निर्देश मिल चुका है। सरकार इन नोटों को आगे बंद कर सकती है।
आग की तरह फैली अफवाह
अफवाह में आगे यह भी कहा गया कि आगे बैंक भी 500 रुपये के नोटों की शक्ल में निकासी बंद कर देंगे। कई व्यापारियों ने इस आशंका को यह कहकर भी पुष्ट कर दिया कि इन दिनों हवाला से मिल रहे भुगतान में भी छोटे नोट ही दिए जा रहे हैं।
नौ साल पहले नोटबंदी के दौरान व्यापार और लेन-देन बुरी तरह प्रभावित हुआ था। इसी के साथ उसका असर भी लंबे समय तक बाजार पर दिखा। अब व्यापारियों का कहना है कि 500 का नोट भले एक दम बंद न हो, लेकिन धीरे-धीरे भी सर्कुलेशन से बाहर हुआ तो कारोबारियों की कैश हैंडलिंग मुश्किल हो जाएगी।
100 और 200 के नोटों को संभालना और लाना-ले जाना मुश्किल होगा। नकद का व्यापार प्रभावित होगा क्योंकि आनलाइन भुगतान से लेकर बैंकों ने हर ट्रांजेक्शन पर भी बीते समय से शुल्क बढ़ा दिया गया है। ऐसे में व्यापार का खर्च भी बड़े नोट बंद होने से बढ़ जाएगा।
बैंक बोले- कोई निर्देश नहीं मिला
बैंक ऐसी खबरों को सिर्फ अफवाह करार दे रहे हैं। इंदौर से लेकर मुंबई तक के बैंक मुख्यालयों ने नोट बंद होने की खबर को खारिज कर दिया है। अलग-अलग बैंकों के अधिकारियों से इस बारे में चर्चा की।
इंदौर व प्रदेश के बैंक अधिकारियों ने आरबीआई की ओर से ऐसे निर्देश मिलने की बात से इनकार किया। बैंक अधिकारियों ने कहा कि अब तक उनके पास ऐसा कोई लिखित या मौखिक आदेश नहीं आया है कि बड़े नोट को बाहर करना है।
राष्ट्रीयकृत बैंकों के मुंबई मुख्यालय के अधिकारियों से भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि वहां भी बड़े नोट बंद करने या इससे जुड़ा कोई निर्देश नहीं पहुंचा है।
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