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केरल में क्यों फैल रहा वेस्ट नाइल वायरस, कितनी खतरनाक है ये बीमारी, एक्सपर्ट्स से जानें

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अमेरिका में कोरोना के Flirt वेरिएंट के केस लगातार बढ़ते जा रहे हैं. इससे दुनियाभर में फिर से कोविड का खतरा मंडरा रहा है. इस बीच भारत के केरल राज्य में वेस्ट नाइल वायरस के मामले सामने आ रहे हैं. केरल के कई जिलों में इसके केस रिपोर्ट किए गए हैं. इसको लेकर केरल का स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट पर है. फिलहाल संक्रमित मरीजों को निगरानी में रखा जा रहा है. केरल के स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को फीवर के लक्षण दिखने पर जांच कराने को कहा है. हालांकि अभी वेस्ट नाइल के गंभीर लक्षण नहीं देखे जा रहे हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स ने लोगों को अलर्ट रहने की सलाह दी है.

वेस्ट नाइल फीवर संक्रमित मच्छर के काटने से लोगों में फैलता है. इस वायरस से संक्रमित होने वाले लगभग 5 में से 1 व्यक्ति में बुखार और अन्य लक्षण विकसित होते हैं. वेस्ट नाइल से संक्रमित होने के बाद सिरदर्द, शरीर में दर्द के साथ उल्टी और दस्त की समस्या होती है. कुछ मामलों में शरीर पर दाने निकलने के साथ बुखार भी आ सकता है. वेस्ट नाइल वायरस के कारण होने वाले बुखार से अधिकतर लोग रिकवर हो जाते हैं, लेकिन थकान कई हफ्तों तक बनी रह सकती है. इस वायरस का सबसे ज्यादा खतरा कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों और बुजुर्गों में होता है. ऐसे में इसके कारण लक्षण और बचाव के बारे में जानना जरूरी है.

कैसे फैलता है वेस्ट नाइल वायरस?

वेस्ट नाइल वायरस संक्रमित मच्छर के काटने से लोगों में फैलता है. यह वायरस कुछ पक्षियों में होता है.जब मच्छर संक्रमित पक्षियों को काटते हैं तो वे संक्रमित हो जाते हैं. इसके बाद संक्रमित मच्छर लोगों और अन्य जानवरों को काटकर वेस्ट नाइल वायरस फैलाते हैं. कुछ मामलों में लैब सेटिंग में एक्सपोज़र और मां से बच्चे में भी ये वायरस फैल सकता है. इस वायरस को फैलाने का प्रमुख कारण मच्छर ही है. वेस्ट नाइल भी एक प्रकार का आरएनए वायरस ही है. जैसे डेंगू और मलेरिया के वायरस होते हैं. डेंगू की तरह ही वेस्ट नाइल भी खतरनाक साबित हो सकता है. यह वायरस मरीज के दिमाग को भी नुकसान पहुंचा सकता है.

दिमाग को कैसे पहुंचता है नुकसान?

अधिकतर लोगों में वेस्ट नाइल वायरस की वजह से हल्के लक्षण ही नजर आते हैं, लेकिन संक्रमित होने वाले लगभग 150 में से 1 व्यक्ति में इसके लक्षण गंभीर भी हो सकते हैं. यह वायरस नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है. इसकी वजह से से एन्सेफलाइटिस की समस्या हो सकती है. अगर इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति में ये परेशानियां होने लगती हैं तो उसकी जान को खतरा हो सकता है. इससे ब्रेन के फंक्शन पर भी असर पड़ता है.

वायरस के लक्षण जब गंभीर होने लगते हैं तो बुखार तेज हो जाता है और इसके साथ ही सिरदर्द, गर्दन में अकड़न, कंपकंपी और लकवा मारने तक का खतरा रहता है. इस वायरस का गंभीर असर किसी भी व्यक्ति में हो सकता है, लेकिन बुजुर्गों में संक्रमित होने पर गंभीर बीमारी का खतरा अधिक होता है.

केरल में क्यों फैल रहा ये वायरस

दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल में कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग में एचओडी प्रोफेसर डॉ जुगल किशोर ने इस बारे में बताया है. डॉ किशोर कहते हैं कि वेस्ट नाइल कोई नया वायरस नहीं है. यह पुरानी बीमारी है. युगांडा में इसके केस दशकों पहले आ चुके हैं. अब केरल में यह वायरस एक्टिव हो गया है. केरल में सबसे पहले केस सामने आए हैं. इसका कारण यह है कि इस राज्यमें किसी भी तरह के वायरस की पहचान के लिए जीनोम सीक्वेंसिंग चलती रहती है. ऐसे में हो सकता है कि किसी देश से इस वायरस का कोई संक्रमित मरीज केरल आया होगा और फिर जांच में इस वायरस की पुष्टि हुई है.

डॉ. किशोर कहते हैं कि भारत में पर्यावरण में काफी बदलाव हो रहा है. मौसम का पैटर्न बदल रहा है. कई इलाकों में भीषण गर्मी पड़ रही है. इन फैक्टर के कारण वायरस फिर से एक्टिव हो जाते हैं. हो सकता है कि वेस्ट नाइल वायरस भी इसी कारण एक्टिव हुआ है. हालांकि अभी जांच के बाद ही पता चल सकेगा कि ये वायरस कितना फैल रहा है संक्रमण का प्रमुख सोर्स क्या है.

कैसे करें बचाव?

राजीव गांधी हॉस्पिटल में डॉ अजित जैन कहते हैं कि वेस्ट नाइल की रोकथाम के लिए मच्छरों की ब्रीडिंग को रोकना जरूरी है. गर्म मौसम में मच्छर ज्यादा पनपते हैं और कई तरह ही बीमारियों का कारण बनते हैं, चूंकि केरल में वेस्ट नाइल फैल रहा है तो आशंका है कि यह अन्य राज्यों तक भी जा सकता है. ऐसे में जरूरी है कि मच्छरों से रोकथाम करें. इसके लिए घरों के आसपास पानी जमा न होने दें. पूरी बाजू के कपड़े पहनें. अगर किसी व्यक्ति में बुखार और शरीर पर दाने निकलने की समस्या हो रही है तो अस्पताल जाएं.

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