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अयोध्या और काशी के बाद मथुरा… योगी ने उठाई आवाज, बीजेपी बिछा रही नई बिसात?

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लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहा है, वैसे-वैसे सियासी तपिश भी बढ़ती जा रही है. अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन हो चुका है और रामलला विराजमान हो चुके हैं. काशी के ज्ञानवापी परिसर में स्थित व्यासजी तहखाने में पूजा भी शुरू हो चुकी है. बीजेपी अब राम मंदिर को अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है. काशी और मथुरा के मुद्दे को बीजेपी ने ढके-छुपे शब्दों में नहीं, बल्कि खुलकर धार देना शुरू कर दिया है. माना जा रहा है कि अयोध्या के साथ-साथ अब मथुरा और काशी को लेकर भी पार्टी सियासी एजेंडा सेट करने में जुट गई है. जिससे कि लोकसभा चुनाव में विपक्ष को हिंदुत्व की पिच पर लाया जा सके.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान अयोध्या के साथ-साथ काशी और मथुरा का मुद्दा उठाया. सीएम योगी ने कहा कि 22 जनवरी को पूरी दुनिया के लिए अद्भुत क्षण था. भारत के गौरव की प्राण प्रतिष्ठा का कार्य संपन्न हुआ. प्रसन्नता है कि हमने वचन निभाया और मंदिर वहीं बनाया, जो कहा सो किया, जो संकल्प लिया उसकी सिद्धि भी हुई. साथ ही उन्होंने कहा कि जिस तरह भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों के लिए दुर्योधन से पांच गांव मांगे थे, उसी तरह देश-समाज सिर्फ तीन स्थानों (अयोध्या, मथुरा, काशी) की मांग कर रहा था, लेकिन उसके लिए भी गिड़गिड़ाना पड़ा.

सीएम योगी ने कहा कि अयोध्या, मथुरा, काशी- तीनों ईश्वर के अवतरण की धरती हैं, लेकिन, एक जिद थी और उसमें राजनीतिक तड़के और वोट बैंक की प्रवृत्ति ने विवाद खड़ा कर दिया. सीएम योगी ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि तब भी दुर्योधन ने कहा था कि सुई की नोक के बराबर जगह नहीं दूंगा तो महाभारत युद्ध तो होना ही होना था. यहां भी वोट बैंक के लिए हमारी संस्कृति और आस्था को रौंदने वाले आक्रांताओं का महिमामंडन किया गया, जिसे अब देश स्वीकार नहीं करेगा. अब जब लोगों ने अयोध्या का उत्सव देखा तो नंदी बाबा ने कहा कि हम क्यों इंतजार करें. उन्होंने रात्रि में बैरिकेड तुड़वा डाले. हमारे कृष्ण कन्हैया कहां मानने वाले हैं.

अयोध्या के संकल्प के बाद बाकी संकल्प की सिद्धि!

दरअसल, ‘रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे…’ बीजेपी का यह संकल्प अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के साथ ही सिद्ध हो गया है. काशी में सर्वे का काम पूरा हो चुका है और जिला अदालत से ज्ञानवापी परिसर में व्यासजी तहखाने में पूजा भी शुरू हो गई है. अब फिर पार्टी नए राजनीतिक मार्ग पर कदम बढ़ाती दिख रही है. लोकसभा चुनाव की सियासी सरगर्मी के साथ ही मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद और कृष्ण जन्मभूमि और वाराणसी में काशी में विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद का मुद्दा उठाकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने सियासी एजेंडा सेट करने के साथ-साथ राजनीतिक संदेश भी देने की कोशिश की है.

सीएम योगी के बयान के सियासी मायने

सीएम योगी के इस बयान के सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं. राम मंदिर आंदोलन की बदौलत बीजेपी के हाथ हिंदुत्व की विरासत लग गई. बीजेपी ने राम मंदिर मुद्दे के सहारे सियासी बुलंदी को छुआ. राम मंदिर निर्माण के साथ ही मथुरा-काशी को लेकर भी आवाज उठने लगी. अब ज्ञानवापी मामले में भी हिंदू पक्ष को अदालती जीत मिलती दिखाई दे रही है. ऐसे में अब बीजेपी मथुरा में कृष्ण जन्मस्थली और वाराणसी में ज्ञानवापी के सहारे 2024 की राजनीतिक प्रतिज्ञा को भी पूरी करने की कवायद में नजर आ रही है, क्योंकि हिंदुत्व की सियासी पिच पर बीजेपी का मुकाबला करना विपक्ष के लिए आसान नहीं होगा.

राजनीतिक विश्लेषक काशी प्रसाद कहते हैं कि बीजेपी को जहां भी मौका मिलता है, वह हिंदुत्व के एजेंडे को आगे कर देती है. ऐसे में बीजेपी ने धार्मिक आधार पर 2024 के चुनाव के लिए अपनी प्राथमिकता तय कर ली है. उसने अयोध्या के भव्य राम मंदिर निर्माण का श्रेय लेने साथ-साथ काशी और मथुरा की बात को खुलकर उठाना शुरू कर दिया, जो इस बात का सीधा संकेत है कि बीजेपी की रणनीति हिंदुत्व के एजेंडे पर ही 2024 चुनाव में उतरने की है.

OBC के मुद्दे की काट है हिंदुत्व का एजेंडा?

दरअसल, विपक्षी दल जाति की बिसात पर अपना सियासी एजेंडा सेट कर रहे हैं. खासकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी इन दिनों ओबीसी के इर्द-गिर्द अपनी सियासत के तहत जातिगत जनगणना और दलित-ओबीसी से जुड़े मुद्दों पर बीजेपी को घेर रहे हैं. विपक्ष की यह रणनीति बीजेपी के लिए टेंशन बढ़ा रही हैं, क्योंकि बीजेपी इस बात को बखूबी समझ रही है कि ओबीसी जाति के एजेंडे पर वो पार नहीं पा सकती. ऐसे में बीजेपी के तमाम नेता इसी कोशिश में है कि किसी न किसी तरह 2024 का चुनाव हिंदुत्व के एजेंडे पर लड़ा जाए. यही वजह है कि बीजेपी राम मंदिर के बहाने से देश भर में सियासी माहौल बनाने में जुटी है.

2024 का एजेंडा सेट कर चुके हैं प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन और रामलला के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शिरकत कर 2024 का एजेंडा सेट कर चुके हैं. प्राण प्रतिष्ठा के बाद पीएम ने अपने संबोधन में कहा कि हमारे राम आ गए हैं. रामलला अब टेंट में नहीं बल्कि दिव्य मंदिर में रहेंगे. रामलला के जन्मस्थान पर भव्य मंदिर निर्माण के संकल्प को पूरा करने की लोगों को याद दिलाई. इससे पहले पीएम वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन किया था. कॉरिडोर का शिलान्यास मार्च 2019 में हुआ था और 2021 खत्म होते-होते काशी विश्वनाथ कॉरिडोर तैयार हो चुका है.

यूपी से निकलता है हिंदुत्व के एजेंडे का संदेश

बीजेपी के हिंदुत्व के एजेंडे का संदेश यूपी से ही निकलता है. श्रीराम जन्मभूमि, श्रीकृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ की धरती यूपी में होने के साथ हिंदू समाज की आस्था से जुड़े अन्य तमाम प्रमुख स्थल और नदियां भी यहीं हैं. अयोध्या-काशी-मथुरा बीजेपी के एजेंडे में शुरू से शामिल रहे है. बीजेपी, वीएचपी ने इसे लेकर देश भर में आंदोलन चलाया था, जिसमें अयोध्या का मुद्दा सबसे ऊपर रहा था. 6 दिंसबर 1992 में विवादित ढांचे को कारसेवकों ने गिरा दिया था. उस समय वीएचपी का एक नारा था- ‘बाबरी मस्जिद झांकी है, काशी-मथुरा बाकी है.’ अब जब राम मंदिर का सपना साकार हो चुका है तो बीजेपी के एजेंडा में काशी और मथुरा ही बचे हैं.

योगी आदित्यनाथ ने यूपी की सत्ता की कमान संभालने के बाद से बीजेपी के हिंदुत्व के एजेंडे को बखूबी तरीके से अमलीजामा पहनाने का काम किया जा रहा है. बीजेपी-आरएसएस की विचारधारा के मुताबिक योगी आदित्यनाथ सबसे मुफीद राजनीतिक शख्सियत लगते हैं. सीएम योगी आदित्यनाथ के वस्त्रों में ही बीजेपी का एजेंडा समाहित है. उन्होंने हिंदू धार्मिक स्थलों का विकास और सांस्कृतिक सरोकारों के साथ काम किया है. ऐसे में समग्र हिंदुत्व के समीकरणों पर चुनावी लड़ाई को 80 बनाम 40 बनाने में सहूलियत हुई है. यही वजह है कि बीजेपी हिंदुत्व के इर्द-गिर्द 2024 के चुनाव को रखना चाहती है.

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