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दुनियाभर के मिलेट्स से तैयार होगा हाइब्रिड बीज, इस तरह से होगा शोध

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 मुख्यत: यह शोध ज्वार बाजरा पर हो रहा है। इसके लिए वैज्ञानिक दुनियाभर से मिलेट्स की वैरायटी को एकत्रित करने में लग चुके हैं।

अजय उपाध्याय, ग्वालियर। ग्वालियर-चंबल में मिलेट्स (श्रीअन्न) की पैदावार बढ़ाने के लिए राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में हाइब्रिड बीज तैयार किए जाएंगे। अंचल में बहुतायत में पैदा किए जाने वाले ज्वार और बाजरा की गुणवत्ता बढ़ाने की दृष्टि से यह शोधपरक कवायद की जा रही है।

शोध ज्वार बाजरा पर

मुख्यत: यह शोध ज्वार बाजरा पर हो रहा है। इसके लिए वैज्ञानिक दुनियाभर से मिलेट्स की वैरायटी को एकत्रित करने में लग चुके हैं। सबसे पहले हैदराबाद जीन बैंक के लिए पत्र लिखा गया है, जहां पर देश में सर्वाधिक मिलेट्स की वेरायटी मौजूद है। विश्वविद्यालय को नेशनल एग्रीकल्चर साइंस से 98 लाख रुपये की सहायता मिली है। इसकी मदद से विज्ञानी शोध कार्य करेंगे।

इस तरह से होगा शोध

हैदराबाद जीन बैंक में जर्मप्लाज्म और पुरानी वेरायटियां उपलब्ध हैं, जिनमें से 150 जर्मप्लाज्म और पुरानी वेरायटी मांगी गई है। इनकी उपलब्धता होने पर उसे मैदानी तौर पर स्क्रीनिंग की जाएगी। यह देखा जाएगा कि इन वेरायटियों में कौन कौन से तत्व मौजूद हैं, जो पोषक तत्वों को बढ़ाने में मदद करते है। इसी तरह पैदावार बढ़ाने के लिए कौन सा तत्व जिम्मेदार है। इन सभी तत्वों को बीज से अलग किया जाएगा और इन तत्वों से मिलाकर ऐसी वेरायटी तैयार की जाएगी, जिसकी पैदावार अच्छी होगी और उसमें आयरन, कैल्शियम, विटामिन, फास्फोरस, कार्बोहाइड्रेट ,जिंक आदि पोषक तत्वों की मात्रा को बढ़ाया जा सके।

48 से 50 डिग्री तापमान पर भी हो पैदावार

कृषि विज्ञानियों का कहना है कि ज्वार और बाजरा खरीफ फसल है। चंबल की बीहड़ में इसकी पैदावार अधिक होती है। पैदावार बढ़े, इसके लिए इस बात पर शोध किया जाना है कि इन वेरायटी में बढ़े हुए तापमान में पैदावार बढ़ाने के लिए कौन सा जीन जिम्मेदार है और कौन सा जीन बारिश ना होने पर सूखे में भी पैदावार कम ना होने दे।

इनका कहना है

ज्वार-बाजरा के हाइब्रिड बीज की वेरायटी तैयार की जाएगी। इसके लिए हैदराबाद जीन बैंक को पत्र लिखा गया है। ज्वार बाजरा की जो नई वेरायटी तैयार होगी, जिसकी पैदावार पर अधिक गर्मी और सूखे का प्रभाव नहीं पढ़ेगा, क्योंकि आने वाले समय में कम पानी और वातावरण में गर्मी बढ़ने की आशंका है।

डा अरविंद शुक्ला, कुलपति राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय।

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