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राखी बांधने का ही नहीं, उतारने का भी होता है मुहूर्त, इन बातों की रखें सावधानी

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हिंदू धर्म में रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम और सद्भाव के पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन अच्छे मुहूर्त या भद्रा रहित काल में भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ माना जाता है। रक्षाबंधन पर लोगों के मन में अक्सर ये सवाल आते हैं कि राखी बांधने का शुभ मुहूर्त क्या है? राखी हाथ पर कितने दिनों के लिए बंधी रहना चाहिए और क्या राखी उतारना शुभ होता है आदि। पंडित चंद्रशेखर मलतारे इस बारे में यहां विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।

पंडित मलतारे के मुताबिक, हिंदू धर्म में कोई भी शुभ कार्य करने से पहले दिशा, दिन व शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है। राखी बंधवाते समय भाई का चेहरा हमेशा पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए और बहन का चेहरा पश्चिम की ओर या उत्तर की ओर हो सकता है। भाई या बहन दोनों का चेहरा दक्षिण दिशा की ओर नहीं होना चाहिए।

कब बांधकर रखना चाहिए राखी

पंडित चंद्रशेखर मलतारे के मुताबिक, रक्षाबंधन के त्योहार के बाद राखी कुछ ही दिनों तक बांधकर रखना चाहिए। राखी हाथ में ज्यादा दिनों तक बंधे रहने से अशुद्ध हो सकता है और इसका नकारात्मक प्रभाव भी हो सकता है। भादो मास की पूर्णिमा तिथि को राखी को उतारा जा सकता है। वहीं, जन्माष्टमी पर्व पर भी राखी को उतारा जा सकता है।

टूटी हुई राखी फिर न बांधे

यदि गलती से राखी टूट जाए तो ऐसी राखी को फिर से नहीं बांधना चाहिए। ऐसा करना अशुभ माना जाता है। टूटी हुई राखी को बहते पानी में प्रवाहित कर देना चाहिए। खंडित राखी को भी घर में नहीं रखना चाहिए।

भद्रा काल ने न बांधे राखी

इस साल पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 30 अगस्त को 10.12 मिनट पर हो रही है और समापन 31 अगस्त को सुबह 7.45 मिनट पर होगा। हिंदू पंचांग के मुताबिक, 30 अगस्त को भद्रा भी शुरू हो रही है और ऐसे में राखी बांधना शुभ नहीं होता है। भद्रा काल रात में 8.58 मिनट तक रहेगा। इसलिए रक्षाबंधन 31 अगस्त को मनाना ज्यादा उचित रहेगा।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

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