Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Delhi Metro GRAP-1 Update: दिल्ली में प्रदूषण के बीच DMRC का बड़ा कदम, शुक्रवार से रोजाना चलेंगी 20 ... Google Maps McLaren F1 Feature: गूगल मैप्स पर आया मजेदार फीचर, नेविगेशन के दौरान नीले तीर की जगह अब ... Best Birdwatching Destinations in India: सर्दियों में बर्डवॉचिंग का है शौक? भारत की इन 5 शानदार जगहो... Ramayana Advance Booking Record: ‘रामायण’ की एडवांस बुकिंग शुरू, पहले ही दिन करोड़ों की कमाई और रिकॉ... Tiger Shroff Firing Case Update: टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में घायल उमेश चौहान की हुई सफल सर्जरी, KE... Bernstein Report: बर्नस्टीन ने घटाया Nifty 50 का टारगेट, दिसंबर 2026 के लिए 26,000 से घटाकर किया 25,... Suvarna Raj Gold Medal: महिलाओं के डिस्कस थ्रो में सुवर्णा राज का कमाल, 15.66 मीटर के थ्रो के साथ अप... Karnataka Petrol Pump Accident: कर्नाटक के बागलकोट में दर्दनाक हादसा, ब्रेक की जगह एक्सीलरेटर दबाने ... Patna Durga Visarjan Firing: पटना में मूर्ति विसर्जन के दौरान गोलीबारी, नाबालिग की मौत से भड़का आक्र... Papankusha Ekadashi 2026 : कब है पापांकुशा एकादशी? जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और खास उपा...

आचार्य चाणक्य ने बताया मोक्ष प्राप्ति के लिए व्यक्ति में ये गुण होना बेहद जरूरी

47

Chanakya Niti। आचार्य चाणक्य, भारतीय इतिहास और राजनीति के मशहूर व्यक्तित्वों में से एक थे। चाणक्य ने अपने विचारों व सिद्धांतों में मोक्ष का महत्वपूर्ण स्थान दिया है। आचार्य चाणक्य ने मोक्ष को एक आध्यात्मिक बोध के रूप में परिभाषित किया है, जो व्यक्ति को संयम, स्वाधीनता और आनंद की स्थिति तक पहुंचाता है। उनके अनुसार, मोक्ष एक आदर्श स्थिति है, जिसे प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को आत्म-नियंत्रण, दानशीलता, विचार शक्ति और नैतिकता का पालन करना चाहिए।

वाचः शौचं च मनसः शौचमिन्द्रियनिग्रहः ।

सर्वभूते दया शौचं एतच्छौत्रं पराऽर्थिनाम् ।।

आचार्य चाणक्य के मुताबिक, वाणी की पवित्रता, मन की शुद्धि, इंद्रियों का संयम, प्राणिमात्र पर दया, धन की पवित्रता, मोक्ष प्राप्त करने वाले के लक्षण होते हैं। कूटनीतिक चालों से शत्रु को मात देने वाले आचार्य चाणक्य अंतर्मन से उतने ही सरल और सहज थे। महान उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए लघु स्वार्थों को छोड़ने की उन्होंने शिक्षा ही नहीं दी, उन्हें अपने आचरण में भी विशिष्ट स्थान दिया । अध्यात्म उनके जीवन का आधार था।

अनुभव के लिए पवित्रता आवश्यक

आचार्य ने अनुभव के लिए पवित्रता को सबसे आवश्यक माना है। उन्होंने कहा है कि जो वाणी और मन से पवित्र होगा और जो दूसरों को दुखी देखकर दुखी होता होगा, वही विवेकवान हो सकता है। उन्होंने कहा कि परोपकार की भावना हो लेकिन इंद्रियों पर संयम न हो तो अपने लक्ष्य को पाया नहीं जा सकता। एक स्थिति प्राप्त करने के बाद मार्ग से भटकने का भय बना रहता है। संयमी तो वहां स्वयं को संभाल लेता है, जहां इंद्रिय लोलुप उलझ जाता है। बिना विवेक के सत्य का ज्ञान नहीं होता और उसके बिना बंधनमुक्त भी नहीं हुआ जा सकता।

डिसक्लेमर

‘इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।’

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.