Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Supreme Court on Air Ticket Price Hike: हवाई किराये में 700% बढ़ोतरी पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पण... Tej Pratap Yadav Security Increase Demand: जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने क... ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता मिटाओ’ मार्च के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का तेलंगाना से कांग्रेस को ... गुजरात में सख्त शराबबंदी के नियमों को धत्ता बताते हुए राजकोट के एक होटल में आयोजित हुई हाई-प्रोफाइल ... पैनिक अटैक: बिना किसी वास्तविक खतरे के अचानक शरीर में क्यों उत्पन्न होने लगती है घबराहट और बेचैनी? Dewas TI Dilip Puri Murder Case: शहीद टीआई दिलीप पुरी के परिवार को 1 करोड़ की सहायता और पत्नी को एसआ... Dilip Puri Funeral Barmandal Dhar: शहीद टीआई दिलीप पुरी का पैतृक गांव बरमंडल में राजकीय सम्मान के सा... Ayodhya Ram Mandir Donation Case Supreme Court: राम मंदिर दान चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फ... Dilip Puri Murder Case Dewas: अवैध शराब पकड़ने गए टीआई दिलीप पुरी की ट्रक से कुचलकर हत्या, सिविल ड्र... PDP Foundation Day Srinagar 2026: श्रीनगर में पीडीपी के कार्यकर्ता सम्मेलन में महबूबा मुफ्ती का केंद...

Lucknow Murder Case: करोड़पति कारोबारी शिवा शर्मा हत्याकांड में नया मोड़, पुलिस ने नहीं मांगी कस्टडी रिमांड तो उठे सवाल

7

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पिछले दिनों सनसनी फैला देने वाले करोड़पति कैफे संचालक शिवा शर्मा हत्याकांड मामले में एक बार फिर बड़ा असमंजस और नया मोड़ सामने आया है। इस बहुचर्चित मामले में 10 दिन की रिमांड अवधि पूरी होने के उपरांत मुख्य आरोपी मॉडल श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर दानिश को शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया। इस दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि लखनऊ पुलिस ने अदालत के समक्ष आरोपियों की कस्टडी रिमांड बढ़ाने के लिए कोई अर्जी दाखिल नहीं की। इसके परिणामस्वरूप, माननीय न्यायालय ने तीनों आरोपियों को आगामी 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में वापस जेल भेज दिया है।

9 अक्टूबर की रात हुई थी कैफे मालिक शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत, गर्लफ्रेंड श्रद्धा दुबे पर दर्ज हुआ था हत्या का मुकदमा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजधानी लखनऊ के हजरतगंज इलाके के अंतर्गत आने वाले बालू अड्डा स्थित ‘अवध ग्रीन अपार्टमेंट’ की चौथी मंजिल पर बने एक फ्लैट से गत 9 अक्टूबर 2026 की रात को कैफे मालिक शिवा शर्मा संदिग्ध परिस्थितियों में नीचे गिर गए थे, जिससे उनकी दर्दनाक मौत हो गई थी। इस घटना के सामने आने के बाद मृतक के परिजनों और करीबियों ने शिवा की गर्लफ्रेंड एवं रायबरेली निवासी मॉडल व सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर श्रद्धा दुबे समेत अन्य लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। घटना के तुरंत बाद से ही सभी नामजद आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गए थे।

नागपुर से हुई थी आरोपियों की नाटकीय गिरफ्तारी, नेपाल और दुबई भागने की बनाई थी असफल योजना

वारदात को अंजाम देने के बाद मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे अपनी बहन रश्मि और कार के ड्राइवर दानिश के साथ भागकर नेपाल पहुँच गई थी। वहाँ से उसकी योजना दुबई फरार होने की थी, परंतु वह साजिश कामयाब नहीं हो पाई। इसके बाद वह चुपचाप वापस लखनऊ लौटी, मीडिया के सामने बयान दिए और फिर से भूमिगत होकर फरार हो गई। इस बीच मुस्तैद हुई उत्तर प्रदेश एसटीएफ (UP STF) की टीम ने तकनीकी सर्विलांस और खुफिया इनपुट के आधार पर नागपुर के एक फ्लैट से तीनों को धर दबोचा और ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ ले आई थी, जहाँ अदालत ने उन्हें पूछताछ के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा था।

पुलिस द्वारा कस्टडी रिमांड न मांगे जाने पर उठ रहे गंभीर सवाल, पूछताछ में नहीं मिला था आरोपियों का सहयोग

जब 10 दिन की न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त हुई, तो यह माना जा रहा था कि पुलिस अदालत में आरोपियों की पुलिस कस्टडी रिमांड (PCR) की मांग करेगी। ऐसा इसलिए भी अपेक्षित था क्योंकि गिरफ्तारी के शुरुआती दौर में आरोपी श्रद्धा दुबे ने पुलिस की पूछताछ में बिल्कुल भी सहयोग नहीं किया था और जाँच टीम को गुमराह करती रही थी। पुलिस ने खुद इस बात के संकेत दिए थे कि आरोपियों को रिमांड पर लेकर कई अनसुलझे रहस्यों से पर्दा उठाया जाएगा, किंतु अब अचानक रिमांड की अर्जी न लगाए जाने के बाद से पुलिस की कार्यप्रणाली पर तरह-तरह के सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं।

दस दिनों में एक बार भी बयान दर्ज करने नहीं गई पुलिस, फॉर्मेट किया हुआ नया मोबाइल फोन हुआ बरामद

हैरानी की बात यह है कि जेल में बंद श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश से इन 10 दिनों के भीतर मिलने या उनके औपचारिक बयान दर्ज करने के लिए भी पुलिस एक बार भी जेल नहीं पहुँची। पुलिस का पूरा ध्यान केवल श्रद्धा के गायब हुए पुराने मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को तलाशने में ही उलझा रहा। गिरफ्तारी के वक्त पुलिस ने श्रद्धा के पास से जो नया मोबाइल फोन बरामद किया था, वह पूरी तरह से फॉर्मेट किया हुआ था, जिसके चलते जाँच टीम को उससे कोई भी महत्वपूर्ण डेटा या सुराग हाथ नहीं लग सका।

गायब पुराने मोबाइल फोन का रहस्य और मुख्य मददगार की तलाश में जुटी खाकी

पुलिस पूछताछ में जब पुराने फोन के बारे में पूछा गया था, तो आरोपी ने पहले यह बहाना बनाया था कि उसका पुराना फोन नेपाल में कहीं गिर गया है, जबकि पुलिस का पुख्ता दावा है कि श्रद्धा ने जानबूझकर उस पुराने मोबाइल को तोड़कर कहीं ठिकाने लगा दिया था। असल में, पुलिस उसी पुराने फोन के डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए उस शातिर ‘खास मददगार’ तक पहुँचना चाहती थी, जिसने श्रद्धा को नेपाल भगाने, वापस लखनऊ लाने और फिर नागपुर में पनाह देने में अहम भूमिका निभाई थी। फिलहाल पुलिस के हाथ पुख्ता सबूत न लगने के कारण इस हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री की परतें उलझी हुई हैं।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.