Fazilka RTA Office Corruption: फाजिल्का आरटीए ऑफिस में ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट के नाम पर अवैध वसूली, एजेंटों के जरिए चल रहा खेल
फाजिल्का: पंजाब के फाजिल्का जिले से प्रशासनिक महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। फाजिल्का स्थित आरटीए (RTA) और आरटीओ (RTO) ऑफिस के अंतर्गत संचालित होने वाले ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट ट्रैक पर तैनात कर्मचारियों द्वारा आम जनता को लूटने और परेशान करने के आरोप लगे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, टेस्ट ट्रैक पर मनीष गाबा और अन्य कर्मचारियों पर यह गंभीर आरोप है कि वे लोगों से ड्राइविंग टेस्ट पास करवाने की एवज में भारी-भरकम रिश्वत वसूल रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इस कर्मचारी मनीष गाबा को पहले भी विभागीय स्तर पर लापरवाही के चलते निलंबित (सस्पेंड) किया जा चुका है, लेकिन उच्च अधिकारियों के साथ सांठगांठ और बेहतर तालमेल के चलते वह दोबारा बहाल होकर वापस उसी कमाई वाले मुख्य ट्रैक पर तैनात हो गया, जो कि अपने आप में एक उच्च स्तरीय जांच का गंभीर विषय है।
जलालाबाद में भाई चलाता है एजेंट की दुकान, एडवांस में पैसे लेकर ट्रैक टेस्ट पास कराने का चलता है पूरा नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी कर्मचारी का भाई प्रदीप गाबा जलालाबाद में अपनी दुकान संचालित करता है, जहां ड्राइवरों और आम लोगों के लाइसेंस बनवाने की फाइलें तैयार की जाती हैं। उसी दुकान पर ट्रैक टेस्ट को आसानी से पास करवाने के नाम पर एडवांस में रकम ली जाती है, और इस पूरे अवैध नेटवर्क में फाजिल्का के अन्य स्थानीय एजेंट भी सक्रिय रूप से शामिल हैं। धांधली का आलम यह है कि अगर कोई आवेदक एजेंटों के जरिए रिश्वत नहीं पहुंचाता और ट्रैक पर उसका टेस्ट पास नहीं होता, तो उसे केवल एक ही मौका दिया जाता है और फेल कर दिया जाता है। इसके विपरीत, जो लोग मोटी रिश्वत दे देते हैं, उनके टेस्ट या तो कार्यालय स्टाफ के आधिकारिक रूप से आने से ठीक पहले सुबह-सुबह ले लिए जाते हैं, या फिर कई बार देर रात के अंधेरे में कराए जाते हैं, जिससे जुड़े कई वीडियो और तस्वीरें भी होने का दावा किया जा रहा है।
आम जनता की मांग- सस्पेंड कर्मचारी की बहाली और एजेंट नेटवर्क की निष्पक्ष एजेंसी से हो उच्च स्तरीय जांच
स्थानीय नागरिकों और पीड़ितों का कहना है कि एक तरफ जहां आम और गरीब लोग जो बाहर से किसी साधारण एजेंट के जरिए अपनी फाइल बनवाकर लाते हैं, उन्हें नियमों के नाम पर परेशान किया जाता है, वहीं दूसरी तरफ कुछ चुनिंदा लोग अपनी मर्जी से कई बार गाड़ियां चलाकर भी नियमों को ताक पर रख देते हैं। जनता का सवाल यह है कि आखिर सस्पेंड होने के बावजूद उस कर्मचारी को दोबारा संवेदनशील पद पर बहाल किसने किया और उसका भाई खुद किस तरह से खुलेआम एजेंटगिरी चला रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए किसी उच्च और विश्वसनीय एजेंसी से गहन जांच कराई जानी चाहिए। हालांकि, इस पूरे प्रकरण पर जब संबंधित अधिकारी आरटीए सेखों और आरोपी गाबा से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, तो उन्होंने अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए मीडिया कर्मियों को अपने कार्यालय में आकर मिलने की बात कही।
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