Ludhiana Dussehra Controversy: रावण के पुतले पर सीएम भगवंत मान और मेयर की तस्वीरें लगाना पड़ा भारी, अकाली पार्षद समेत कई पर केस दर्ज
लुधियाना: पंजाब के औद्योगिक शहर लुधियाना से एक बेहद संवेदनशील और राजनीतिक तूल पकड़ने वाला मामला सामने आया है। पर्व के दौरान रावण दहन के वक्त उसके पुतले के साथ राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान, लुधियाना की महिला मेयर और हलका पूर्वी के विधायक की तस्वीरें चस्पा करके दहन करने का यह पूरा कृत्य अब गंभीर कानूनी पचड़े में फंस गया है। इस आपत्तिजनक और विवादित घटना पर कड़ा संज्ञान लेते हुए थाना टिब्बा की पुलिस ने एक अकाली नेता सह पार्षद सहित उनके अन्य साथियों के खिलाफ औपचारिक रूप से मुकदमा दर्ज कर लिया है।
पेन ड्राइव में मिले डिजिटल साक्ष्यों और वीडियो फुटेज के आधार पर पुलिस ने उठाया सख्त कदम
स्थानीय पुलिस द्वारा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए वीडियो और शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई पेन ड्राइव में मौजूद पुख्ता डिजिटल साक्ष्यों की गहन समीक्षा के बाद यह कानूनी कार्रवाई अमल में लाई गई है। पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, यह घटना बीते 20 अक्तूबर यानी दशहरे की रात करीब 8 बजे की है। मामले के शिकायतकर्ता नीरज चोपड़ा ने पुलिस को दिए अपने आधिकारिक बयानों में यह आरोप लगाया है कि कुछ लोगों ने जानबूझकर रावण के पुतले पर देश और राज्य के उच्च संवैधानिक पदों पर आसीन माननीयों की तस्वीरें लगाईं, जिससे सनातन धर्म के एक पवित्र और पावन त्योहार का सरेआम उपहास उड़ाया गया है।
धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के साथ-साथ महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने का भी लगा आरोप
शिकायतकर्ता का कहना है कि इस गैर-जिम्मेदाराना कृत्य से न केवल आम जनमानस की धार्मिक आस्था और भावनाओं को गहरी चोट पहुंची है, बल्कि लुधियाना की वर्तमान महिला मेयर की तस्वीर रावण के पुतले पर लगाकर सार्वजनिक रूप से एक महिला के सम्मान और उसकी गरिमा को भी बेहद नीचा दिखाया गया है। शिकायतकर्ता नीरज चोपड़ा ने आरोपियों द्वारा खुद अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर प्रसारित किए गए वीडियो की एक पेन ड्राइव को मुख्य सबूत के रूप में पुलिस को सौंपा था। वीडियो फुटेज और प्राथमिक बयानों की सत्यता की जांच करने के उपरांत थाना टिब्बा पुलिस ने कमल अरोड़ा, रोहित मेहता, गौरवजीत गोरा, सुखदेव काला और दो अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ नामजद मुकदमा कायम कर लिया है।
बीएनएस की धारा 298 के तहत दर्ज किया गया केस, जांच अधिकारी मामले की तफ्तीश में जुटे
पुलिस ने इस मामले में नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कड़क धारा 298 के तहत कानूनी शिकंजा कसा है। यह कानूनी धारा मुख्य रूप से किसी भी व्यक्ति या विशिष्ट समुदाय की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने, धार्मिक आस्थाओं का अपमान करने या समाज में नफरत फैलाने वाले किसी भी अपमानजनक कृत्य के खिलाफ लगाई जाती है। इस गंभीर धारा के प्रावधानों के अंतर्गत दोष सिद्ध होने पर आरोपी को एक साल तक की कैद, आर्थिक जुर्माना
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