MP High Court News: फर्जी नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों की शिफ्टिंग पर हाईकोर्ट सख्त, नया संशोधित मॉड्यूल पेश करने के निर्देश
जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में बहुचर्चित फर्जी नर्सिंग कॉलेजों के मामले को लेकर एक बार फिर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। शुक्रवार को जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की युगलपीठ के समक्ष मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने छात्रों के स्थानांतरण से जुड़ा एक नया शिफ्टिंग मॉड्यूल पेश किया। यह पूरा मॉड्यूल सीबीआई जांच में अनुपयुक्त पाए गए नर्सिंग संस्थानों के छात्रों को उपयुक्त कॉलेजों में शिफ्ट करने और उनके प्रशिक्षण को सुचारु रूप से जारी रखने के आधार पर तैयार किया गया था, जिस पर याचिकाकर्ता पक्ष ने अपनी व्यावहारिक आपत्तियां दर्ज कराईं।
क्या है फर्जी नर्सिंग कॉलेजों का पूरा मामला?
यह पूरा कानूनी विवाद लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के माध्यम से दायर की गई उस जनहित याचिका से शुरू हुआ था, जिसमें प्रदेश भर में धड़ल्ले से चल रहे सैकड़ों फर्जी और मानदण्डहीन नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि इन संस्थानों को मान्यता देने में नियमों की जमकर अनदेखी की गई है। इसके बाद हाईकोर्ट के सख्त निर्देश पर सीबीआई ने प्रदेश के कुल 695 नर्सिंग कॉलेजों की गहन जांच की थी, जिसमें शुरुआती तौर पर सिर्फ 156 कॉलेज ही सूटेबल पाए गए थे। बाद में कमियों को दूर करने पर 89 और कॉलेज इस श्रेणी में आ गए थे, जबकि अनसूटेबल कॉलेजों के छात्रों को अन्य सुरक्षित कॉलेजों में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया था।
शिफ्टिंग मॉड्यूल की कमियां और कोर्ट का सख्त निर्देश
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश किए गए शिफ्टिंग मॉड्यूल की व्यावहारिक कमियों, जैसे प्रशिक्षण की पारदर्शिता, छात्रों की पसंद, बुनियादी सुविधाएं और ट्रेनिंग के खर्च पर गंभीर सवाल उठाए गए। याचिका में मांग की गई कि छात्रों की पढ़ाई का वित्तीय बोझ अपात्र कॉलेजों की बैंक गारंटी को राजसात करके वसूला जाए और पूरी प्रक्रिया पूरी तरह छात्र-हितैषी हो। मामले की गंभीरता को समझते हुए युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए ताकि छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता और क्लिनिकल ट्रेनिंग से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए, और दोषी संस्थाओं की जवाबदेही तय की जा सके।
संशोधित मॉड्यूल पेश करने के निर्देश, अगली सुनवाई 3 नवंबर को
अदालत ने दोनों पक्षों को अपने-अपने प्रस्ताव और आपत्तियां आपस में साझा करने के बाद एक नया और संशोधित शिफ्टिंग मॉड्यूल तैयार कर अगली तारीख पर पेश करने का आदेश दिया है। इस संवेदनशील और बड़े मामले की अगली सुनवाई अब आगामी 3 नवंबर को निर्धारित की गई है, जिस पर पूरे प्रदेश के नर्सिंग छात्रों की निगाहें टिकी हुई हैं।
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