Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
MP Cricket Academy in Russia: रूस के स्मोलेंस्क में खुलेगी मध्य प्रदेश क्रिकेट अकादमी, क्रिकेट के जर... Akash Vijayvargiya Namo Coaching: इंदौर में आकाश विजयवर्गीय की अनूठी पहल, कौटिल्य अकादमी के साथ मिलक... Chhindwara Congress Worker Assault: छिंदवाड़ा में कांग्रेस कार्यकर्ता के अपहरण और मारपीट पर गरमाई सि... राहत मंजिल में ठहरे थे बापू, बेनजीर ग्राउंड पर हुई थी ऐतिहासिक जनसभा और प्रार्थना Nana Patekar Memories: भोपाल में नाना पाटेकर से जुड़े संस्मरण, श्रीराम तिवारी ने बताए 30 साल पुराने ... Dhar Pickleball Players Success: केरल में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में धार के 4 खिलाड़ियों ने जी... Madhya Pradesh News: जबलपुर में मेले के दौरान झूले में तकनीकी लापरवाही या युवकों की गलती? पुलिस ने म... Bilaspur Atal Awas Fire: बिलासपुर के अटल आवास में भीषण आग, रस्सी के सहारे 75 लोगों का हुआ रेस्क्यू Gariyaband Naxal Dump Seized: मैनपुर में नक्सलियों का बड़ा डंप बरामद, 2.5 किलो का टिफिन आईईडी और यूब... Balrampur Illegal Paddy Seized: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी से पहले बड़ी कार्रवाई, यूपी बॉर्डर पर 3 ट्रक...

Hazaribagh Budhiya Mata Temple: हजारीबाग के इस अनोखे मंदिर में नहीं है कोई प्रतिमा या पिंडी, दीवार की पूजा करने दूर-दूर से आते हैं भक्त

1

हजारीबाग: मां दुर्गा के कई रूप हैं, कहीं मां का चरण, कहीं नयन तो कहीं ज्वाला के रूप में उनकी आराधना की जाती है, लेकिन हजारीबाग के इचाक स्थित एक मंदिर में मां के पूरी तरह निराकार रूप की पूजा होती है. इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां न तो कोई देवी की प्रतिमा है और न ही कोई पिंडी, बल्कि भक्त सीधे मंदिर की दीवार की पूजा करते हैं. इस मंदिर से लोगों की आस्था इतनी गहरी है कि दूर-दराज के इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता का आशीर्वाद लेने के लिए यहां पहुंचते हैं.

📜 200 साल पुरानी परंपरा और हैजा महामारी से जुड़ी है बुढ़िया माता मंदिर की कहानी

हजारीबाग के इचाक प्रखंड के बनसटांड़ में स्थित बुढ़िया माता मंदिर में नवरात्र के दौरान विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. इस मंदिर में दीवार पर एक आकृति उभरी हुई है, और हर साल सप्तमी के दिन उस पर विशेष रूप से सिंदूर और घी अर्पित करने की पुरानी प्रथा है. इस मंदिर के साथ एक प्राचीन किवदंती जुड़ी हुई है, जिसके अनुसार वर्ष 1668 में इचाक में हैजा भयंकर महामारी के रूप में फैल गया था, तब एक बूढ़ी माता इचाक बाजार में प्रकट हुईं और महामारी को दूर करने के लिए मिट्टी देकर उसे गांव से दूर रखने को कहा. कुछ ही देर में माता वहां से अंतर्ध्यान हो गईं और धीरे-धीरे वह भयानक महामारी समाप्त हो गई. मान्यता है कि माता की दी हुई वही मिट्टी आगे चलकर दीवार के रूप में स्थापित हो गई, जिसकी पिछले 200 सालों से लगातार पूजा की जा रही है.

🙏 भक्तों की अटूट आस्था: सच्चे मन से मांगने पर पूरी होती है हर मुराद

यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि जो भी भक्त सच्चे मन से माता के दरबार में अपनी मन्नत मांगता है, मां उसकी हर इच्छा जरूर पूरी करती हैं. इस मंदिर की महिमा इतनी अपरंपार है कि यहाँ सिर्फ हजारीबाग ही नहीं, बल्कि आसपास के दूसरे राज्यों से भी लोग खिंचे चले आते हैं. यहाँ आने वाले भक्त मानते हैं कि इस पावन मंदिर की महिमा का बखान करना ठीक वैसी ही है जैसे ‘उगते सूरज को दीया दिखाने’ के समान है. अपनी अटूट श्रद्धा और विश्वास के चलते सालभर यहाँ भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन शारदीय नवरात्र के दिनों में यहाँ का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.