Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Durg Supela Ravan Bhata History: भिलाई स्टील प्लांट से भी पुराना है दुर्ग का रावण भाटा, 150 साल से च... Durg Police Suspended News: दुर्ग में पुलिसर्किमयों की बड़ी लापरवाही, नशे में धुत बस स्टैंड पर बेसुध... Palamu Bangiya Durga Bari: पलामू के इस प्रसिद्ध पंडाल में सोने-चांदी के जेवरात से होता है मां दुर्गा... Latehar Bee Attack News: लातेहार में मधुमक्खियों के हमले से 6 साल के बच्चे की दर्दनाक मौत, चार बच्चे... Kolkata Stampede Aftermath: कोलकाता हादसे के बाद झारखंड पुलिस अलर्ट, दुर्गा पूजा पंडालों और मेलों की... Ranchi Murder Case: रांची के मुरी में 11वीं की छात्रा की निर्मम हत्या, झाड़ियों से मिला शव— परिजनों ... Hazaribagh Budhiya Mata Temple: हजारीबाग के इस अनोखे मंदिर में नहीं है कोई प्रतिमा या पिंडी, दीवार क... NCB Action in Jharkhand: झारखंड में एनसीबी का बड़ा छापा, रांची और जमशेदपुर से मास्टरमाइंड जिम्मी समे... IIT ISM Dhanbad Durga Puja: धनबाद के IIT-ISM पंडाल की अनूठी थीम, क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर तकन... Jharkhand Marketing Board News: झारखंड में कृषि व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए बनेगी मल्टीस्टोरी बिल्...

Faridabad DJ Operators Protest: शादियों में डीजे बैन के खिलाफ उतरे डीजे संचालक, महापंचायत में रखी रोजी-रोटी बचाने की मांग

1

फरीदाबाद: शादी-विवाह में फिजूलखर्ची और सामाजिक कुरीतियों पर रोक लगाने के लिए हो रही महापंचायतों के बीच अब डीजे संचालक भी विरोध में उतर आए हैं. डीजे संचालकों का कहना है कि शादी-विवाह में डीजे बजाने पर रोक लगाने के फैसले से उनकी रोजी-रोटी पर सीधा संकट खड़ा हो जाएगा. इसी मुद्दे को लेकर बड़ी संख्या में डीजे संचालक पिंगाँव में आयोजित महापंचायत में पहुंचे और अपना पक्ष मजबूती से रखा.

📉 रोजगार पर संकट: एक डीजे से जुड़े होते हैं कई परिवार, सिर्फ डीजे बैन करना उचित नहीं

डीजे संचालकों का कहना है कि समाज में कई दूसरी कुरीतियां भी हैं, जिन्हें दूर करने की जरूरत है, लेकिन केवल डीजे पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है. उनका तर्क है कि एक डीजे के काम से करीब पांच लोग सीधे तौर पर जुड़े होते हैं और उनके परिवारों की आजीविका इसी काम पर निर्भर करती है. ऐसे में डीजे बंद होने से कई गरीब परिवारों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है. संचालकों ने मांग की कि यदि साउंड सिस्टम पर रोक लगाने का कोई फैसला लिया जाता है, तो यह नियम सभी तरह के साउंड सिस्टम पर समान रूप से लागू होना चाहिए, न कि केवल डीजे संचालकों को निशाना बनाया जाए.

🤝 समाज का हिस्सा हैं डीजे संचालक, फैसला लेने से पहले रोजी-रोटी पर हो विचार

डीजे संचालकों का कहना है कि वे भी उसी समाज का अहम हिस्सा हैं, जिसके लोग महापंचायतों में शामिल होकर सामाजिक सुधार की बात कर रहे हैं. इसलिए कोई भी कड़ा फैसला लेने से पहले उन परिवारों की रोजी-रोटी के बारे में भी जरूर विचार किया जाना चाहिए, जिनका पूरा गुजारा डीजे के कारोबार से चलता है. अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि डीजे संचालकों की इस न्यायसंगत मांग पर आगे होने वाली महापंचायतें क्या रुख अपनाती हैं और सामाजिक सुधार के साथ-साथ रोजगार बचाने के इस गंभीर मुद्दे पर क्या सहमति बनती है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.