गया है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने एक आधिकारिक प्रेस नोट जारी कर यह स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल यूपीआई पर कोई नया चार्ज लागू नहीं किया जाएगा। दरअसल, ऐसी तैयारी थी कि 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाया जाए और इसे इसी हफ्ते गुरुवार से लागू होना था, लेकिन त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए इस फैसले को टाल दिया गया है।
🛍️ त्योहारी सीजन में व्यापारियों और ग्राहकों को बड़ी राहत
मर्चेंट संगठनों से लेकर तमाम फिनटेक कंपनियों ने इस नए चार्ज का कड़ा विरोध किया था। उनका तर्क था कि इस त्योहारी सीजन में इसका सीधा असर व्यापार और बिक्री पर पड़ेगा। महंगाई के इस दौर में सरकार और एनपीसीआई को भी इस बात की चिंता थी कि अगर व्यापारियों पर एमडीआर का अतिरिक्त बोझ बढ़ता है, तो मुमकिन है कि वे इस लागत को किसी न किसी रूप में आम ग्राहकों से ही वसूलेंगे।
इसी संभावित चिंता और बाजार के दबाव को देखते हुए यूपीआई संचालन समिति ने फिलहाल अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। माना जा रहा है कि दिवाली के बाद नवंबर के दूसरे हफ्ते में इसे लेकर कोई नया और संशोधित फैसला सामने आ सकता है।
📊 समझिए क्या है एमडीआर चार्ज और यूपीआई का गणित
पिछले महीने ही यूपीआई संचालन समिति ने यह तय किया था कि 2000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लिया जाएगा।
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हिसाब: उदाहरण के तौर पर, यदि आप यूपीआई के जरिए किसी व्यापारी को 2000 रुपये का भुगतान करते हैं, तो उस व्यापारी को 0.4% के हिसाब से फीस चुकानी होगी। 10,000 रुपये के पेमेंट पर यह फीस 40 रुपये तक हो सकती है।
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नेटवर्क का दायरा: कार्ड के मुकाबले यूपीआई पर चार्ज लागू करना काफी जटिल है, क्योंकि देश में करीब 10 करोड़ मर्चेंट्स यूपीआई के जरिए भुगतान स्वीकार करते हैं, जिनमें छोटे गांवों से लेकर बड़े शहरों के दुकानदार शामिल हैं। वित्त मंत्री ने भी पहले स्पष्ट किया था कि इस मसले को सभी स्टेकहोल्डर्स आपस में मिलकरसुलझाएंगे और इसे पेमेंट इकोसिस्टम पर छोड़ा गया है।
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