राजधानी रांची और हजारीबाग से जुड़े बहुचर्चित जमीन घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने शिकंजा कसते हुए बड़ी कार्रवाई की है। एसीबी की विशेष छापामारी टीम ने मंगलवार को कार्रवाई करते हुए जमीन के तीन कथित विक्रेताओं को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों पर वन भूमि, सरकारी जमीन और गैरमजरुआ खास किस्म की जंगल भूमि को अवैध तरीके से हासिल कर बेचने तथा गलत तरीके से दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) कराने का गंभीर आरोप है। गिरफ्तार सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
📋 अधिकारियों और भू-माफिया की मिलीभगत: एसीबी ने दर्ज की है भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी
एसीबी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, हजारीबाग थाना कांड संख्या 11/25 के तहत की गई है। इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(d) के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120बी के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज है। जांच में यह बात सामने आई है कि तत्कालीन अंचलाधिकारी (CO), अंचल निरीक्षक, राजस्व उपनिरीक्षक और स्थानीय भू-माफियाओं ने मिलीभगत कर सरकारी अभिलेखों में हेराफेरी की और अवैध तरीके से जमीन के कागजात तैयार किए।
⚖️ जांच का दायरा बढ़ा: एसीबी ने की तीन आरोपियों की पहचान, पूर्व में भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
एसीबी की विशेष टीम द्वारा 7 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान विशेश्वर प्रजापति, शंकर प्रजापति और रामगति गुप्ता उर्फ रामगति प्रसाद (सभी निवासी मुकुंदगंज, मुफस्सिल, हजारीबाग) के रूप में हुई है। एसीबी के अनुसार, इस प्रकरण में पूर्व में भी तत्कालीन अंचलाधिकारी सहित कई सरकारी पदाधिकारियों, भू-माफियाओं और खरीदारों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी और अवैध म्यूटेशन की इस जांच से भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया है, और एसीबी इस पूरे नेटवर्क की गहराई से छानबीन कर रही है।
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