Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
ED Officers SC ST Act Case Ranchi: हाईकोर्ट ने जवाब दाखिल करने के लिए मांगा समय, 2 नवंबर को होगी अगल... Jharkhand Food Department Guidelines: अवैध एलपीजी उपयोग रोकने के लिए जिला प्रशासन और तेल कंपनियों मे... Charged for Impact Event Dhanbad: इंडस्ट्री और एकेडमिक सहयोग पर विशेष चर्चा, कई दिग्गज हुए शामिल 174 यात्रियों की जान बचाने वाले जांबाज कैप्टन: स्मित मछार को 'गुजरात गरिमा पुरस्कार' से नवाजेगी सरका... Ranchi News: नामकुम में स्वच्छता ही सेवा-2026 अभियान के तहत विशेष कार्यक्रम, मंत्री योगेंद्र प्रसाद ... चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका: संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं पर उठे... Dhamtari Snake Bite News: घर में सो रही मां और मासूम बेटी को करैत सांप ने डसा, डेढ़ साल की बच्ची की द... INDIA गठबंधन के साथ हैं, लेकिन राहुल गांधी की पीएम उम्मीदवारी पर साधी चुप्पी: मध्यावधि चुनाव के संके... CGPSC and UPSC Success Story: कैंसर को मात देकर अधिकारी बने संजय डहरिया की कहानी से युवाओं को मिली प... Chhattisgrah Politics Update: विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही यात्रा, 7 अक्टूबर को पहुंचेगी...

स्टेनोग्राफर न मिलने पर खुद हाथ से लिखे 159 फैसले: चर्चाओं में रहे जज दिनेश गुप्ता हुए रिटायर

2

राजस्थान की न्यायिक व्यवस्था में अपने बेबाक फैसलों और कार्यशैली को लेकर सदैव सुर्खियों में रहे जज दिनेश गुप्ता बुधवार को सेवानिवृत्त (रिटायर) हो गए हैं।

रिटायरमेंट से ठीक डेढ़ महीने पहले 13 अगस्त को उनकी अदालत का स्टेनोग्राफर मानदेय व बकाया भुगतान न होने के कारण काम छोड़कर चला गया था।

हैरानी की बात यह रही कि राज्य सरकार अथवा संबंधित प्रशासनिक तंत्र द्वारा उनकी अदालत में किसी वैकल्पिक या दूसरे स्टेनोग्राफर की नियुक्ति नहीं की गई। इसके चलते न्याय प्रक्रिया को बाधित न होने देने के संकल्प के साथ जज दिनेश गुप्ता ने रिटायरमेंट से ठीक एक दिन पहले तक कुल 159 फैसले अपने हाथ से कलमबद्ध किए।

🏛️ सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला: ट्रांसफर और प्रशासनिक आदेशों पर जताया था विरोध

जज दिनेश गुप्ता के तबादलों और शीर्ष अदालत में याचिका का घटनाक्रम:

  • फैसले के बाद तबादला: कमर्शियल कोर्ट में पीठासीन अधिकारी रहते हुए जज दिनेश गुप्ता ने एक बड़े व्यावसायिक समूह (बिजनेस ग्रुप) के खिलाफ कड़ा फैसला सुनाया था।

  • लगातार तबादले: इसके उपरांत उनका तबादला पहले जयपुर से ब्यावर किया गया और उसके कुछ ही दिनों के भीतर उन्हें ब्यावर से जालोर भेज दिया गया।

  • उत्पीड़न का आरोप: हाईकोर्ट के इस प्रशासनिक आदेश के विरुद्ध जज दिनेश गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और तर्क दिया कि सेवानिवृत्ति से मात्र 10 माह पूर्व बार-बार तबादला कर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

  • हाईकोर्ट के समक्ष रखने के निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने उनके रिटायरमेंट से 4 दिन पहले मामले की सुनवाई करते हुए उन्हें इस प्रशासनिक विषय को सीधे हाईकोर्ट के समक्ष रखने को कहा था।

🌟 ‘प्रतिभाशाली न्यायिक अधिकारी हैं गुप्ता’: सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने की थी सराहना

अदालत की टिप्पणी और प्रशासनिक पृष्ठभूमि:

  • तीन जजों की बेंच में सुनवाई: इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की विशेष पीठ ने की थी।

  • प्रतिभा पर नहीं कोई संदेह: शीर्ष अदालत की पीठ ने अपने अवलोकन में स्पष्ट रूप से कहा था कि इस बात में कोई संदेह नहीं है कि दिनेश गुप्ता एक अत्यंत प्रतिभाशाली और कर्तव्यनिष्ठ न्यायिक अधिकारी हैं।

  • महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां: कोर्ट ने माना कि उनकी योग्यता के कारण ही उन्हें पूर्व में जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) में निदेशक (विधि) तथा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जैसी अहम जिम्मेदारियों पर तैनात किया गया था।

🏥 सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप पर लेबर कोर्ट जयपुर में हुई थी तैनाती: मानवीय आधार पर मिली थी राहत

पारिवारिक और स्वास्थ्य संबंधी आधार पर स्थानांतरण:

  • गंभीर बीमारी और इलाज: सुप्रीम कोर्ट ने जज गुप्ता की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति, जयपुर में चल रहे निरंतर चिकित्सकीय उपचार, रिटायरमेंट में मात्र 10 महीने का समय शेष रहने का संज्ञान लिया।

  • पत्नी का भी रिटायरमेंट नजदीक: इसके अलावा उनकी अध्यापिका पत्नी की सेवानिवृत्ति भी निकट होने का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट प्रशासन को मानवीय व सहानुभूतिपूर्वक दृष्टिकोण अपनाने को कहा था।

  • जयपुर में पदस्थापना: शीर्ष अदालत के दो सप्ताह के भीतर विचार करने के निर्देश के बाद ही उन्हें राहत देते हुए जयपुर स्थित लेबर कोर्ट (श्रम न्यायालय) में जज के पद पर स्थानांतरित किया गया था।

⏳ 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई: रिटायरमेंट उम्र 62 वर्ष करने की मांग

न्यायिक अधिकारियों की आयु सीमा से जुड़ी याचिका:

  • 62 वर्ष आयु की मांग: जज दिनेश गुप्ता ने देश के अन्य कई राज्यों की तर्ज पर राजस्थान में भी जिला न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु सीमा 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष किए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक औपचारिक प्रार्थना पत्र (Petition) दायर कर रखा है।

  • अहम सुनवाई प्रस्तावित: सुप्रीम कोर्ट इस महत्वपूर्ण नीतिगत और सेवा संबंधी मामले पर आगामी 5 अक्टूबर को विस्तृत सुनवाई करेगा।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.