यूपीआई पर 0.4% प्रस्तावित शुल्क के खिलाफ भड़का आक्रोश: 22 राज्यों के व्यापारी संगठनों ने तैयार की रणनीति
अमृतसर: यूपीआई (UPI) लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत व्यापारी शुल्क (Merchant Charge) के विरोध में व्यापारियों का देशव्यापी असंतोष अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के नेतृत्व में इस प्रस्तावित शुल्क को पूरी तरह वापस लेने की मांग तेज हो गई है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबू लाल गुप्ता एवं राष्ट्रीय महासचिव मुकंद मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक में देश के 22 राज्यों के व्यापारी प्रतिनिधियों ने भाग लेकर आंदोलन की साझा रणनीति तैयार की।
इस महत्वपूर्ण बैठक में पंजाब का प्रतिनिधित्व पंजाब प्रदेश व्यापार मंडल के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्यारे लाल सेठ, महासचिव समीर जैन तथा भारतीय उद्योग व्यापार मंडल पंजाब इकाई के अध्यक्ष रंजन अग्रवाल ने संयुक्त रूप से किया।
🗓️ 2 अक्टूबर को मनेगा ‘यूपीआई शुल्क विरोध दिवस’: सांसदों को ज्ञापन और बाजारों में लगेंगे बैनर
आंदोलन की रूपरेखा और विरोध प्रदर्शन की योजना:
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विरोध दिवस का ऐलान: बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर आगामी 2 अक्टूबर को राष्ट्रव्यापी स्तर पर ‘यूपीआई शुल्क विरोध दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला लिया गया।
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सांसदों को ज्ञापन: इस विशेष अभियान के तहत देशभर के सभी सांसदों (लोकसभा व राज्यसभा) को व्यक्तिगत रूप से ज्ञापन सौंपकर इस अतिरिक्त शुल्क को तत्काल प्रभाव से समाप्त कराने का आग्रह किया जाएगा।
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बाजारों में जनजागरण अभियान: प्रमुख व्यापारिक बाजारों, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर “यूपीआई पर शुल्क बंद करो” और “0.4 प्रतिशत शुल्क स्वीकार्य नहीं” जैसे नारों वाले बैनर, पोस्टर और स्टिकर प्रदर्शित किए जाएंगे।
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केंद्र सरकार को रिपोर्ट: 2 अक्टूबर के बाद देशभर से संकलित किए गए सभी ज्ञापन और व्यापारियों की आपत्तियों का पूरा दस्तावेज तैयार कर केंद्र सरकार, वित्त मंत्रालय और संबंधित नियामक संस्थाओं को औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया जाएगा।
🏪 ‘डिजिटल भुगतान के खिलाफ नहीं, अतिरिक्त लागत का विरोध’: रंजन अग्रवाल ने रखी व्यापारियों की व्यथा
पंजाब इकाई की रणनीति और छोटे व्यापारियों की चिंताएं:
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जमीनी स्तर पर अभियान: पंजाब इकाई के अध्यक्ष रंजन अग्रवाल ने कहा कि राज्य भर के स्थानीय बाजार स्तर तक व्यापारी एसोसिएशनों को इस आंदोलन से जोड़ा जा रहा है।
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चुनौतियों से जूझ रहे दुकानदार: उन्होंने साफ किया कि व्यापारी वर्ग आधुनिक डिजिटल भुगतान प्रणाली के विरोध में नहीं है, लेकिन इसका अतिरिक्त वित्तीय भार दुकानदारों पर डालना सरासर गलत है।
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सीमित मुनाफे पर चोट: छोटे और मध्यम व्यापारी पहले से ही भारी बैंक ब्याज, स्टाफ वेतन, बिजली बिल, दुकानों के किराए, ट्रांसपोर्टेशन, स्टॉक मेंटेनेंस, उधारी और सख्त टैक्स अनुपालन जैसी भारी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक डिजिटल ट्रांजैक्शन पर लगने वाला अतिरिक्त शुल्क उनके सीमित मुनाफे और वर्किंग कैपिटल को गंभीर नुकसान पहुंचाएगा।
⚖️ नकदी प्रबंधन में होती है भारी बचत: समीर जैन और प्यारे लाल सेठ ने उठाए नीतिगत सवाल
व्यवस्था के आर्थिक लाभ और व्यापारियों की संयुक्त मांग:
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व्यापक आर्थिक लाभ का तर्क: राष्ट्रीय महासचिव समीर जैन ने कहा कि यूपीआई नेटवर्क के विस्तार का खर्च केवल छोटे व्यापारियों की जेब पर डालना न्यायसंगत नहीं है। डिजिटल लेनदेन से सरकार और बैंकों को भारी नकदी प्रबंधन, नए नोटों की छपाई और वितरण लागत में भारी बचत होती है, जिसका आर्थिक लाभ सभी को मिलना चाहिए।
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संचयी शुल्क का बड़ा बोझ: यद्यपि 75 हजार रुपये या उससे अधिक के पात्र लेनदेन पर अधिकतम 300 रुपये शुल्क की ऊपरी सीमा प्रस्तावित है, लेकिन दिनभर में होने वाले दर्जनों छोटे-बड़े लेनदेनों का कुल मासिक भार व्यापारियों के लिए असहनीय हो जाएगा।
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पारदर्शी और टिकाऊ व्यवस्था की मांग: प्रदेश अध्यक्ष प्यारे लाल सेठ ने रेखांकित किया कि व्यापारी वर्ग डिजिटल भारत का प्रबल समर्थक है, विरोध सिर्फ अनुचित वसूली का है। संगठनों ने एक स्वर में दोहराया कि उनका उद्देश्य डिजिटल भुगतान की राह में रुकावट डालना नहीं, बल्कि एक पारदर्शी, टिकाऊ और न्यायसंगत भुगतान व्यवस्था सुनिश्चित कराना है।
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