Election Commission Row: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर कांग्रेस का देशव्यापी प्रदर्शन, EC दफ्तरों का घेराव
नई दिल्ली: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर देश का सियासी पारा गरमा गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस ने देशभर में व्यापक विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। पटना से लेकर जम्मू तक पार्टी के कार्यकर्ता और शीर्ष नेता सड़कों पर उतर आए हैं। “वोट चोर, गद्दी छोड़” के गगनभेदी नारों के साथ विभिन्न राज्यों में चुनाव आयोग के दफ्तरों के बाहर घेराव किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं का स्पष्ट कहना है कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाया नहीं जाता और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।
जम्मू में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन भवन का घेराव करते हुए जोरदार नारेबाजी की। इस बड़े प्रदर्शन की अगुवाई जम्मू-कश्मीर कांग्रेस प्रभारी नासिर हुसैन ने की। नासिर हुसैन की अध्यक्षता में बड़ी तादाद में कार्यकर्ता निर्वाचन भवन के बाहर पहुंचे और आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए विरोध दर्ज कराया।
📢 कांग्रेस के तीखे आरोप: लोकतांत्रिक निष्पक्षता पर सवाल, गौरव गोगोई बोले- दर्ज हो एफआईआर
पार्टी नेताओं का रुख और बयान:
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निष्पक्षता पर सवाल: कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर लगातार गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनका सीधा और स्पष्ट जवाब चुनाव आयोग को जनता के समक्ष देना चाहिए। पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक ढांचे में चुनाव आयोग की निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गहन जांच जरूरी है।
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सांसद गौरव गोगोई का बयान: कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, “आज जब लोगों को पता चल गया है कि ज्ञानेश कुमार ने गंभीर गलतियां और अपराध किया है, तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए।”
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दौरे रद्द: गुरुवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा इस्तीफा मांगे जाने के बाद कांग्रेस ने देशव्यापी मार्च की घोषणा की। इस सियासी दबाव के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपना वाराणसी और मेरठ दौरा रद्द कर दिया है।
⏳ 48 घंटे का अल्टीमेटम: अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी
अन्य संगठनों का विरोध:
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सीजेपी का मोर्चा: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर एक अलग मोर्चा सीजेपी (CJP) ने भी खोला है। संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त को 48 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम देते हुए पद त्यागने की मांग रखी थी।
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आंदोलन की चेतावनी: संगठन का कहना है कि यदि निर्धारित समयावधि के भीतर इस्तीफा नहीं सौंपा गया, तो देशभर में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा और दिल्ली में अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा।
🚶♂️ आज देशभर में कांग्रेस का मार्च: 28 सितंबर को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन की तैयारी
विरोध-प्रदर्शन का आगामी रोडमैप:
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25 सितंबर का राज्यस्तरीय मार्च: कांग्रेस आलाकमान ने सभी प्रदेश कांग्रेस समितियों को अपने-अपने राज्यों में चुनाव आयोग के दफ्तरों तक मार्च निकालने का निर्देश दिया। कांग्रेस का कहना है कि इस दौरान ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, उनके कार्यकाल में हुए नीतिगत फैसलों और मतदाता सूची में किए गए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की जाएगी।
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28 सितंबर को जिला मुख्यालयों पर घेराव: इसके बाद आंदोलन के दूसरे चरण में 28 सितंबर को सभी जिला कांग्रेस समितियों द्वारा जिला मुख्यालयों पर विरोध मार्च निकाला जाएगा।
🎙️ राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाए थे सवाल: आयोग ने दिया सर्वसम्मति का हवाला
सियासी टकराव और चुनाव आयोग का पक्ष:
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राहुल गांधी के आरोप: गुरुवार को राहुल गांधी ने प्रेस वार्ता कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से पद छोड़ने की मांग की थी। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित विसंगतियों को लेकर बुनियादी सवाल उठाए और आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी रिपोर्ट का हवाला दिया।
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चुनाव आयोग का जवाब: आयोग ने इन तमाम आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग के सभी अंतिम फैसले पूरी तरह से सर्वसम्मति से और स्थापित प्रक्रियाओं के तहत ही लिए गए हैं।
⚖️ महुआ मोइत्रा ने संसद मार्ग थाने में दी शिकायत: एफआईआर दर्ज करने की मांग
तृणमूल कांग्रेस का कड़ा रुख:
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थाने में शिकायत: इस विवाद के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने नई दिल्ली के संसद मार्ग थाने में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
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जांच की मांग: महुआ मोइत्रा ने चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों के दावों का हवाला देते हुए आपराधिक मामला दर्ज कर जांच की मांग की है। हालांकि पुलिस ने अभी तक इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की है।
🔍 क्या है पूरे विवाद की असल जड़? दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों पर घमासान
मामले की पृष्ठभूमि:
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मतभेदों का दावा: यह पूरा विवाद उस मीडिया रिपोर्ट के बाद भड़का जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के निर्णयों और आदेशों पर अपनी असहमति या आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
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आपत्तियों का विषय: रिपोर्ट के अनुसार, ये आपत्तियां विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने तथा मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया से संबंधित थीं।
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आयोग का स्पष्टीकरण: चुनाव आयोग ने कहा है कि किसी भी संवैधानिक संस्था में लिखित टिप्पणियां, अलग-अलग दृष्टिकोण और आंतरिक मंथन एक सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, और अंतिम निर्णय सदैव तीनों चुनाव आयुक्तों की आपसी सहमति और स्वीकृति से ही लागू किए गए हैं।
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