Gurugram Cyber Fraud News: साइबर ठगों पर गुरुग्राम अदालतों का कड़ा रुख, चार मामलों में आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज
गुड़गांव (हरियाणा): देश भर में डिजिटल लेन-देन के बढ़ते दायरे के साथ साइबर अपराधियों का जाल तेजी से फैल रहा है। शेयर बाजार में निवेश, आईपीओ में भारी मुनाफे, पार्ट-टाइम कमाई और फर्जी एप्लीकेशनों का झांसा देकर निर्दोष लोगों से करोड़ों रुपये ठगने वाले गिरोहों के खिलाफ गुरुग्राम की विशेष अदालतों ने बेहद कड़ा कानूनी रुख अपनाया है।
अदालत ने अपने स्पष्ट फैसले में कहा है कि साइबर अपराध समाज और देश की वित्तीय प्रणाली के लिए किसी ‘साइलेंट वायरस’ की तरह हैं, जो न केवल आम लोगों की गाढ़ी कमाई लूटते हैं बल्कि डिजिटल भारत के जन-विश्वास की नींव को भी गहरा आघात पहुंचाते हैं। ऐसे गंभीर मामलों में किसी भी प्रकार की न्यायिक रियायत नहीं बरती जा सकती। इसी क्रम में कोर्ट ने चार अलग-अलग साइबर ठगी के मामलों में आरोपियों की जमानत अर्जियों को सिरे से खारिज कर दिया है।
💰 42 लाख की ठगी मामले में आरोपी आदित्य सोनकर की जमानत खारिज: बैंक खाते के खिलाफ दर्ज हैं 42 अन्य शिकायतें
शेयर और आईपीओ निवेश के नाम पर धोखाधड़ी:
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मामला: अतिरिक्त जिला सत्र एवं न्यायाधीश वर्षा जैन की अदालत ने 42 लाख रुपये की ठगी मामले में गिरफ्तार आरोपी की जमानत याचिका खारिज की है। पीड़िता अदिति दिव्या राय से ऑनलाइन निवेश के नाम पर यह ठगी की गई थी।
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झांसा: पीड़िता को एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर शेयर और आईपीओ में निवेश पर भारी-भरकम रिटर्न का लालच दिया गया था, जिसके बाद जालसाजों ने 42 लाख रुपये ऐंठ लिए। पुलिस ने पश्चिम बंगाल निवासी आरोपी आदित्य सोनकर को गिरफ्तार किया था।
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दलील और विरोध: आरोपी ने दलील दी थी कि उसने अपना बैंक खाता अपने दोस्त सुमित साहू को इस्तेमाल के लिए दिया था और उससे कोई बरामदगी नहीं हुई है। हालांकि, सरकारी वकील ने इसका कड़ा विरोध करते हुए अदालत को बताया कि आरोपी के इस बैंक खाते के खिलाफ देश भर में 42 अन्य शिकायतें दर्ज हैं और वह इसी तरह के तीन अन्य साइबर अपराधों में भी संलिप्त है।
💳 बैंक खाता किराए पर देने या मुहैया कराने वालों को राहत नहीं: नितिन शर्मा की याचिका खारिज
सिमउर से जुड़े साइबर नेटवर्क का खुलासा:
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मामला: इसी अदालत ने साइबर थाना दक्षिण में दर्ज 41.90 लाख रुपये (शिकायत के अनुसार) की ठगी के मामले में गिरफ्तार आरोपी नितिन शर्मा की जमानत याचिका को भी खारिज कर दिया।
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आपराधिक साजिश: पीड़ित को व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर ठगी को अंजाम दिया गया था। जांच में खुलासा हुआ कि ठगी की रकम में से 20 लाख रुपये जिस बैंक खाते में जमा हुए थे, उस खाते की व्यवस्था करने वाले आरोपी नितिन शर्मा (निवासी सिरमौर, हिमाचल प्रदेश) ने यमुनानगर से खाता खरीदकर दिल्ली में बैठकर साइबर अपराध चला रहे गिरोह को उपलब्ध कराया था।
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समानता का तर्क खारिज: बचाव पक्ष ने अन्य सह-आरोपियों की जमानत का हवाला देते हुए समानता के आधार पर राहत मांगी, जिसे अदालत ने नामंजूर कर दिया।
🕒 पार्ट-टाइम नौकरी का झांसा देने वाला विशाल सेंधव जेल में रहेगा: कमीशन के लिए दिया था खाता
धोखाधड़ी और बैंक खातों का दुरुपयोग:
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मामला: अतिरिक्त जिला सत्र एवं न्यायाधीश वर्षा जैन की अदालत ने साइबर थाना पूर्व में दर्ज मामले में आरोपी विशाल सेंधव की जमानत याचिका खारिज की। पीड़ित माणिक आहूजा से पार्ट-टाइम जॉब और ऑनलाइन कमाई का लालच देकर 55.28 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई थी।
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कमीशन का खेल: ठगे गए पैसों में से 4.25 लाख रुपये देवास (मध्य प्रदेश) निवासी विशाल सेंधव के खाते में पहुंचे थे। 19 अगस्त 2026 को गिरफ्तार आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने 10 हजार रुपये के कमीशन के लालच में अपना खाता, एटीएम और हस्ताक्षर किए हुए खाली चेक इंदौर जाकर सह-आरोपी को सौंपे थे। पैसे आने के बाद उसने चेक से रकम निकालकर सह-आरोपियों को दी और अतिरिक्त 1500 रुपये कमीशन प्राप्त किया।
🔙 ठगी की पूरी रकम लौटाने के बावजूद आरोपी सक्षम को नहीं मिली जमानत: कोर्ट की अहम टिप्पणी
अपराध के प्रभाव पर अदालत का नजरिया:
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मामला: अतिरिक्त जिला सत्र एवं न्यायाधीश सुदीप गोयल की अदालत ने एक अन्य मामले में गिरफ्तार आरोपी सक्षम की जमानत अर्जी खारिज कर दी। पीड़ित शिव चौहान से आईपीओ योजनाओं में निवेश के नाम पर 19 किस्तों में कुल 11 लाख 16 हजार 139 रुपये की ठगी की गई थी, जिसमें से 2 लाख 21 हजार रुपये दक्षिण दिल्ली के बदरपुर निवासी सक्षम के खाते में ट्रांसफर हुए थे।
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बचाव पक्ष का तर्क: आरोपी के वकील ने दलील दी कि सक्षम मात्र 22 वर्ष का युवक है, उसकी जांच पूरी हो चुकी है और उसने ठगी के पूरे 2 लाख 21 हजार रुपये पीड़ित को वापस लौटा दिए हैं तथा पीड़ित को जमानत पर कोई आपत्ति नहीं है।
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अदालत का फैसला: न्यायाधीश ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल पीड़ित को पैसे वापस लौटा देने से अपराध का प्रभाव समाप्त नहीं हो जाता, और इन संगठित अपराधों में संलिप्तता को देखते हुए जमानत नहीं दी जा सकती।
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