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Jammu Kashmir NIA Raids: लश्कर के ओवर ग्राउंड वर्कर्स पर NIA का बड़ा एक्शन, कश्मीर घाटी के 10 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापे

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श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर): राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में सीमा-पार से संचालित आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए एक व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया है।

यह सघन कार्रवाई प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के पाकिस्तान स्थित मुख्य हैंडलर्स और घाटी में सक्रिय उनके स्थानीय ‘ओवर ग्राउंड वर्कर्स’ (OGWs) के गठजोड़ द्वारा रची गई गहरी आतंकी साजिश के सिलसिले में की गई है। जांच एजेंसी की टीमों ने कुपवाड़ा, कुलगाम, बांदीपोरा, बारामूला और सोपोर जिलों में एक साथ दबिश दी। इस तलाशी अभियान का मुख्य उद्देश्य आतंकी साजिश से जुड़े दस्तावेजी व डिजिटल सबूत जुटाना और हाल ही में सीमा पार से घुसपैठ करने वाले दहशतगर्दों को लॉजिस्टिक सहायता, शरण और सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वाले मददगारों की भूमिका को उजागर करना था।

📁 ज़कूरा थाने में दर्ज हुआ था प्रारंभिक केस: NIA ने UAPA और विस्फोटक अधिनियम में दर्ज की RC

मामले की कानूनी पृष्ठभूमि और एफआईआर का विवरण:

  • प्रारंभिक एफआईआर: यह संवेदनशील मामला शुरू में श्रीनगर स्थित ज़कूरा पुलिस स्टेशन में एफआईआर संख्या 0024/2026 के अंतर्गत दर्ज किया गया था।

  • एनआईए द्वारा री-रजिस्टर: मामले की गंभीरता और सीमा-पार संबंधों को देखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने इसे धारा 23 यूए(पी) अधिनियम (UAPA) 1967, शस्त्र अधिनियम 1959 की धारा 7 व 25 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 की धारा 4 के तहत केस संख्या RC-02/2026/NIA/JMU के तौर पर पुनः दर्ज कर जांच अपने हाथ में ली।

  • गहन जांच का दायरा: केंद्रीय एजेंसी आतंकी साजिश के पीछे छिपे विदेशी फंडिंग, हथियारों की सप्लाई और ओवरग्राउंड मॉड्यूल के पूरे नेटवर्क को कानूनी दायरे में लाने के लिए काम कर रही है।

💣 नाका चेकिंग में हैंड ग्रेनेड व कारतूस के साथ पकड़ा गया था OGW: खुला पाकिस्तानी कनेक्शन

मामले का शुरुआती खुलासा और अहम गिरफ्तारियां:

  • 31 मार्च की गिरफ्तारी: इस पूरे मामले का भंडाफोड़ 31 मार्च 2026 की देर रात सुरक्षा बलों की संयुक्त नाका चेकिंग के दौरान हुआ था, जहाँ लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक स्थानीय ओजीडब्ल्यू को रंगे हाथों पकड़ा गया।

  • हथियारों की बरामदगी: पकड़े गए संदिग्ध के कब्जे से जिंदा हैंड ग्रेनेड और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए गए थे।

  • पाकिस्तानी नागरिकों की धरपकड़: उससे हुई गहन पूछताछ के आधार पर जांच का दायरा विस्तृत हुआ, जिसके बाद सीमा-पार से जुड़े पाकिस्तानी नागरिकों की पहचान व गिरफ्तारी हुई और कश्मीर घाटी में सक्रिय स्थानीय स्लीपर सेल तथा सपोर्ट नेटवर्क के सदस्यों की संदिग्ध भूमिकाएं खुलकर सामने आईं।

📞 सीमा-पार हैंडलर्स से सुरक्षित संचार: रेकी, पनाह और लॉजिस्टिक नेटवर्क की जांच

दहशतगर्दों के तौर-तरीके और कार्यप्रणाली:

  • सीधा संपर्क नेटवर्क: अब तक की विवेचना में यह तथ्य स्थापित हुआ है कि पाकिस्तान में बैठे लश्कर हैंडलर्स आधुनिक एनक्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए स्थानीय मददगारों से सीधे संपर्क में रहते थे।

  • घुसपैठियों की मदद: इन स्थानीय संपर्कों का इस्तेमाल सीमा पार से घुसपैठ कर आने वाले आतंकवादियों को सुरक्षित मार्ग दिखाने, हथियारों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने, संवेदनशील प्रतिष्ठानों की रेकी करने और उन्हें गुप्त ठिकाने मुहैया कराने में किया जा रहा था।

  • वित्तीय लेन-देन की पड़ताल: एनआईए की टीमें आरोपियों के बैंक खातों, हवाला लेन-देन, कॉल डेटा रिकॉर्ड (CDR), यात्रा इतिहास तथा हथियारों और विस्फोटकों के अवैध डिलीवरी रूट की गहराई से जांच कर रही हैं।

📦 छापेमारी में डिजिटल उपकरण व अहम दस्तावेज जब्त: आगे और गिरफ्तारियों के संकेत

सबूतों का मिलान और आगामी कानूनी प्रक्रिया:

  • सामग्री की जब्ती: 10 ठिकानों पर संचालित इस तलाशी अभियान के दौरान जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त की है।

  • फॉरेंसिक व तकनीकी विश्लेषण: बरामद सामग्री को तकनीकी जांच और पूर्व में मिले सबूतों के साथ क्रॉस-वेरिफाई किया जा रहा है।

  • सख्त कार्रवाई की तैयारी: एनआईए ने स्पष्ट किया है कि आतंकी तंत्र को पोषित करने वाले किसी भी मददगार को बख्शा नहीं जाएगा और जांच से सामने आने वाले नए तथ्यों के आधार पर आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां तथा संपत्तियों की जब्ती की जा सकती है।

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