Bihar Flood News: बिहार के 12 जिलों में बाढ़ से हाहाकार, भागलपुर में NH-80 पर 2 फीट पानी; 5 दिनों से यातायात ठप
भागलपुर (बिहार): राज्य में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर और चिंताजनक बनी हुई है। प्रदेश के 12 से अधिक जिले इस समय बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं, जहां प्रमुख नदियों के उफान पर होने से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। भागलपुर जिले में हालात सबसे अधिक नाजुक बने हुए हैं, जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों की 90 से अधिक पंचायतों के साथ-साथ कई प्रमुख शहरी रिहायशी इलाकों में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है।
🚧 NH-80 पर 2 फीट पानी बहने से आवाजाही ठप: भागलपुर-पटना रूट पर 5 दिनों से रुका ट्रैफिक
सड़क मार्ग बाधित होने और सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति:
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NH-80 पर जलभराव: नाथनगर प्रखंड के भवनाथपुर के समीप भागलपुर-पटना मुख्य मार्ग (NH-80) पर करीब दो फीट की ऊंचाई तक तेज धार में बाढ़ का पानी बह रहा है।
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5 दिनों से आवागमन बंद: सड़क पर पानी के तेज बहाव और कटान के खतरे के मद्देनजर पिछले पांच दिनों से इस मुख्य मार्ग पर सभी प्रकार के वाहनों का परिचालन पूरी तरह रोक दिया गया है।
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बैरिकेडिंग और निगरानी: प्रशासनिक स्तर पर एहतियात बरतते हुए सड़क के दोनों छोर पर बैरिकेडिंग कर दी गई है और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए चौबीसों घंटे मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की प्रतिनियुक्ति की गई है।
📉 गंगा के जलस्तर में मामूली गिरावट: मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन तक पहुंचा बाढ़ का पानी
नदियों का मिजाज और नए क्षेत्रों पर असर:
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जलस्तर में कमी पर असर नहीं: हालांकि केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा नदी के जलस्तर में मामूली गिरावट दर्ज की गई है, किंतु निचले इलाकों और सड़कों से पानी नहीं उतरने के कारण आम नागरिकों की दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं।
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फोरलेन पर जलभराव: बाढ़ का पानी अब नवनिर्मित मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन तक पहुंच चुका है।
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जोखिम भरा सफर: भागलपुर बायपास से शाहकुंड जाने वाले मार्ग पर फोरलेन सड़क के ऊपर पानी आ जाने के कारण वाहनों की गति बेहद धीमी हो गई है और लोग जान जोखिम में डालकर सफर करने को विवश हैं।
📢 प्रशासन ने जारी की सतर्कता की अपील: नदियों के रुख पर टिकी राहत की उम्मीद
प्रशासनिक निर्देश और वर्तमान परिदृश्य:
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अनावश्यक जोखिम से बचें: जिला प्रशासन ने आम जनता और यात्रियों से सख्त अपील की है कि वे जलमग्न सड़कों, पुल-पुलियों और तेज बहाव वाले स्थानों पर जाने से बचें और वैकल्पिक सुरक्षित मार्गों का ही उपयोग करें।
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आवश्यक सेवाओं पर दबाव: ग्रामीण पंचायतों का संपर्क टूटने और प्रमुख हाईवे बंद रहने से दूध, सब्जी, दवाओं जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ रहा है।
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नदियों के जलस्तर पर नजर: क्षेत्र के लोगों और प्रशासन की नजरें अब गंगा सहित अन्य सहायक नदियों के जलस्तर पर टिकी हैं; नदियों के बहाव में निरंतर और पर्याप्त गिरावट आने के बाद ही इस जलप्रलय से राहत मिलने की संभावना है।
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