Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
जरूरतमंद मरीजों की मदद के लिए आगे आए रक्तदाता, सनातनी विनोद कुमार बिंदल के नेतृत्व में मंदिर शिविर म... Amitabh Bachchan Apology: ट्वीट की नंबरिंग में हुई गलती तो महानायक अमिताभ बच्चन ने सरेआम मांगी माफी,... भारत और इंडोनेशिया के बीच प्रतिष्ठित सैन्य अभ्यास 'गरुड़ शक्ति' का 11वां संस्करण इंडोनेशिया में हुआ ... Jio Platforms IPO Listing: शेयर बाजार में रिलायंस के जियो का धमाकेदार डेब्यू, 30,200 करोड़ के मेगा आ... भारत बना आईफोन मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का एक्सपोर्ट पहुंचा 1 लाख करोड़ के ... ग्वालियर में मोबाइल पर श्रीराम के वीडियो देखने को लेकर खूनी संघर्ष, पति ने तलवार से पत्नी पर किया जा... Gaya Cyber Fraud Case: बिहार में चल रहा था अंतरराज्यीय साइबर ठगी का मिनी कॉल सेंटर, लोन और क्रेडिट क... Punjab News: पटियाला के राजिंदरा अस्पताल में नशे की सामग्री मिलने का दावा करने वाले CRPF जवान को पुल... Ganga Expressway Accident: उत्तर प्रदेश के संभल में गंगा एक्सप्रेसवे पर पलटी यात्रियों से भरी स्लीपर... Ahoi Ashtami Vrat 2026: 1 नवंबर को रखा जाएगा अहोई अष्टमी का व्रत, संतान की लंबी उम्र के लिए ऐसे करें...

MPSC ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक: मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच तेज, 7वीं रैंकर ऋतुजा पाटील से पूछताछ

21

मुंबई (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) द्वारा आयोजित ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अपनी जांच का दायरा काफी बढ़ा दिया है।

परीक्षा में सातवीं रैंक (Rank 7) हासिल करने वाली मुख्य आरोपी ऋतुजा पाटील, उसके पिता अमृत पाटील और अन्य सह-आरोपियों से सघन पूछताछ जारी है। जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हो रहे हैं। क्राइम ब्रांच ने इस मामले में अहम डिजिटल साक्ष्य जुटाने का दावा किया है। वहीं, जांच में यह भी बात सामने आई है कि सबूत नष्ट करने के इरादे से आरोपी ऋतुजा पाटील का मोबाइल फोन उल्हास नदी में फेंक दिया गया था।

📱 270 पन्नों की WhatsApp चैट बनी अहम सबूत: सह-आरोपी गौरव पाटील के फोन से बरामद

डिजिटल साक्ष्यों का पूरा विवरण:

  • सह-आरोपी का मोबाइल जब्त: मामले में सह-आरोपी लोकेश उर्फ गौरव पाटील के मोबाइल फोन से ऋतुजा और गौरव के बीच हुई लगभग 270 पन्नों की लंबी व्हाट्सएप (WhatsApp) चैट क्राइम ब्रांच के हाथ लगी है।

  • परीक्षा से पहले प्रश्नसंच का आदान-प्रदान: जांच एजेंसी के अनुसार, इन चैट्स के जरिए 22 मार्च 2026 को आयोजित MPSC परीक्षा से ठीक पहले कथित रूप से प्रश्न पत्र या क्वेश्चन बैंक (Question Bank) के लेन-देन के पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।

📝 चैट में 78 सवालों का दावा: शक से बचने के लिए जानबूझकर 10 सवाल किए गलत

चैट में सामने आए परीक्षा से जुड़े खुलासे:

  • 20 मार्च की चैट: 20 मार्च को हुई बातचीत में ऋतुजा ने एक विशेष प्रश्नसंच के सवालों के परीक्षा में आने की प्रबल संभावना का जिक्र किया था।

  • शक से बचने की रणनीति: चैट में यह भी योजना बनाई गई थी कि 10 सवालों को जानबूझकर गलत हल किया जाए, ताकि अत्यधिक अंक आने पर किसी जांच एजेंसी या आयोग को कोई संदेह न हो।

  • 22 मार्च का दावा: परीक्षा समाप्त होने के बाद 22 मार्च की चैट में ऋतुजा ने कथित तौर पर माना कि उपलब्ध कराए गए प्रश्नों में से 78 सवाल हूबहू परीक्षा में आए थे। इसके अलावा 13 अन्य सवाल हल करने का भी उल्लेख है, जिससे कुल 91 प्रश्न हल किए जाने की पुष्टि होती है।

👤 वांटेड आरोपी मयूर ठाकरे का कनेक्शन: परिजनों से भी राज छिपाने की थी हिदायत

सिंडिकेट और मुख्य साजिशकर्ताओं का नेटवर्क:

  • फरार मयूर ठाकरे की भूमिका: इन चैट्स में मामले के वांटेड आरोपी मयूर ठाकरे का नाम बार-बार सामने आया है। क्राइम ब्रांच अब इस बात की कड़ियां जोड़ रही है कि पेपर लीक कराने में मयूर की सीधी भूमिका क्या थी।

  • पिता की चेतावनी: चैट से यह भी खुलासा हुआ है कि ऋतुजा के पिता अमृत पाटील ने मयूर ठाकरे को सख्त हिदायत दी थी कि इस पेपर लीक और क्वेश्चन बैंक की जानकारी किसी तीसरे व्यक्ति, यहां तक कि अपने परिवार के सदस्यों को भी नहीं होनी चाहिए।

💰 5 लाख रुपये में हुआ था सौदा: उल्हास नदी में फेंका गया मुख्य आरोपी का फोन

पैसों के लेन-देन और आगे की कार्रवाई:

  • 5 लाख रुपये की मांग: जांच में सामने आई व्हाट्सएप बातचीत में परीक्षा सामग्री के बदले 5 लाख रुपये की मांग का स्पष्ट उल्लेख है, जिसे अगले दिन तक जुटाने को लेकर विस्तृत बातचीत दर्ज है।

  • फोन की तलाश और दायरा: ऋतुजा का व्यक्तिगत मोबाइल अभी तक बरामद नहीं हो सका है, जिसके कारण गौरव पाटील के फोन से मिली 270 पन्नों की चैट ही इस केस का सबसे बड़ा डिजिटल आधार बन गई है।

  • आगे की तफ्तीश: मुंबई क्राइम ब्रांच अब यह पता लगाने में जुटी है कि आयोग के भीतर से यह पर्चा किस स्तर पर बाहर आया, इसमें कौन-से अधिकारी या बिचौलिए शामिल थे और मयूर ठाकरे के जरिए यह नेटवर्क कहां तक फैला हुआ था।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.