Haldwani Shuddhikaran Row: मल्लिकार्जुन खरगे शुद्धिकरण मामले में बड़ा एक्शन, बेंगलुरु पुलिस ने उत्तराखंड BJP नेताओं पर दर्ज की जीरो FIR
बेंगलुरु/हल्द्वानी: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के उपरांत किए गए कथित शुद्धिकरण अनुष्ठान को लेकर छिड़ा सियासी विवाद अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है।
बेंगलुरु पुलिस ने 4 सितंबर को उत्तराखंड भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ औपचारिक ‘जीरो एफआईआर’ (Zero FIR) दर्ज कर ली है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह विधिक कार्रवाई कांग्रेस अनुसूचित जनजाति (ST) विभाग के पूर्व उपाध्यक्ष टी.आर. रामप्पा द्वारा 31 अगस्त को प्रस्तुत की गई औपचारिक शिकायत के आधार पर अमल में लाई गई है।
📅 8 अगस्त की रैली और 10 अगस्त का अनुष्ठान: जातिवादी मानसिकता को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप
शिकायत की पृष्ठभूमि और आरोप:
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रैली का आयोजन: शिकायत में उल्लिखित किया गया है कि 8 अगस्त को हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया था।
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मैदान का शुद्धिकरण: आरोप है कि रैली संपन्न होने के दो दिन बाद, यानी 10 अगस्त को, भाजपा के कुछ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उसी स्थल पर गंगाजल छिड़ककर तथाकथित शुद्धिकरण कार्यक्रम आयोजित किया।
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छुआछूत और भेदभाव का प्रयास: शिकायतकर्ता का कहना है कि यह कृत्य दुर्भावनापूर्ण तरीके से जातिवादी मानसिकता को बढ़ावा देने और यह संदेश देने के उद्देश्य से किया गया कि अनुसूचित जाति समुदाय से ताल्लुक रखने वाले खरगे की मौजूदगी से मैदान ‘अपवित्र’ हो गया था।
🎙️ उत्तराखंड BJP अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का भी नाम शामिल: बयान का बचाव करने पर विधिक कार्रवाई
प्राथमिकी में नामजदगी और जांच का दायरा:
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प्रदेश अध्यक्ष का उल्लेख: दर्ज कराई गई शिकायत में उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का नाम भी शामिल किया गया है।
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बचाव करने का आरोप: आरोप लगाया गया है कि उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान सार्वजनिक रूप से इस शुद्धिकरण कार्यक्रम का बचाव और समर्थन किया था।
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विधान सौध पुलिस स्टेशन में दर्ज केस: बेंगलुरु के विधान सौध पुलिस थाने में वरिष्ठ अधिकारियों और विधिक विशेषज्ञों से राय-मशविरा करने के बाद महेंद्र भट्ट व अन्य पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ जीरो एफआईआर पंजीकृत की गई है।
📑 SC-ST एक्ट और BNS की गंभीर धाराओं में केस दर्ज: कानूनी प्रक्रिया तेज
दर्ज धाराओं का विस्तृत विवरण:
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नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम: नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 की धारा 7(1)(c), 7(1)(d) और 7(1) के तहत अस्पृश्यता और भेदभाव को बढ़ावा देने का मामला जोड़ा गया है।
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अत्याचार निवारण अधिनियम: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(u) के तहत कार्रवाई की गई है।
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भारतीय न्याय संहिता (BNS): विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता और वैमनस्य को बढ़ावा देने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 196(1)(b) को भी मुकदमे में शामिल किया गया है।
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आगे की कार्रवाई: पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि 31 अगस्त की शिकायत पर विधिक राय लेने के उपरांत यह जीरो एफआईआर दर्ज हुई है, जिसे जांच के लिए संबंधित क्षेत्राधिकार (हल्द्वानी, उत्तराखंड) को स्थानांतरित किया जा रहा है।
⚡ राहुल गांधी ने बीजेपी और आरएसएस पर साधा था निशाना: देशव्यापी स्तर पर उठा मामला
विपक्ष का हमला और राजनीतिक प्रतिक्रिया:
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प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाया मुद्दा: इससे पूर्व नई दिल्ली में एक प्रेस वार्ता के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस पूरे प्रकरण को पुरजोर तरीके से उठाया था।
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भेदभाव का आरोप: राहुल गांधी ने बीजेपी और आरएसएस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा था कि समाज में आज भी दलितों के साथ हर कदम पर भेदभाव किया जा रहा है और इस तरह के अपमानजनक कृत्य के खिलाफ कड़ी धाराओं में तुरंत कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
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