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ग्वालियर चिकित्सा इतिहास में नया मील का पत्थर: चंबल अंचल में पहला सफल किडनी ट्रांसप्लांट, 55 वर्षीय पत्नी ने पति को दिया नया जीवन

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ग्वालियर (मध्य प्रदेश): ग्वालियर-चंबल अंचल के चिकित्सा जगत में रविवार का दिन एक स्वर्णिम उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया है। अंचल के सबसे बड़े जयारोग्य अस्पताल (JAH) समूह के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में पहली बार किडनी ट्रांसप्लांट का जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। इस सर्जरी में 55 वर्षीय पत्नी मीरा गुप्ता ने सावित्री की तरह अपने 60 वर्षीय बीमार पति कृष्णकांत गुप्ता को अपनी एक किडनी दान कर नया जीवन दिया है। इस ऐतिहासिक सफलता के बाद अब अंचल के गंभीर किडनी मरीजों को सर्जरी के लिए दिल्ली, मुंबई या इंदौर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, जिससे समय और धन दोनों की भारी बचत होगी।

👩‍❤️‍👨 90% खराब हो चुकी थीं किडनियां: पति की जान बचाने के लिए आगे आईं पत्नी

मरीज की स्थिति और परिवार का निर्णय:

  • छतरपुर के निवासी: मरीज कृष्णकांत गुप्ता (60 वर्ष) मूल रूप से छतरपुर के रहने वाले हैं और लंबे समय से जयारोग्य अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था।

  • केवल 10% बची थी कार्यक्षमता: जांच में पाया गया कि मरीज की दोनों किडनियां गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होकर महज 10 प्रतिशत क्षमता पर काम कर रही थीं और जान बचाने के लिए ट्रांसप्लांट एकमात्र विकल्प बचा था।

  • पत्नी बनीं जीवनदाता: डोनर की तलाश के संकट के बीच उनकी पत्नी मीरा (55 वर्ष) ने बिना झिझक अपनी एक किडनी दान करने का साहसिक फैसला लिया।

🩺 6 घंटे तक चली जटिल सर्जरी: दिल्ली के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में हुआ ऑपरेशन

ऑपरेशन और मेडिकल टीम का संयोजन:

  • पूरी की गईं कानूनी व मेडिकल प्रक्रियाएं: सर्जरी से पूर्व डोनर और रिसीवर दोनों की उच्च स्तरीय मेडिकल जांच, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और ट्रांसप्लांट प्रोटोकॉल की सभी प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी की गईं।

  • विशेषज्ञ टीम का नेतृत्व: रविवार सुबह 8:30 बजे शुरू हुआ यह ऑपरेशन दोपहर 3:00 बजे तक करीब साढ़े छह घंटे चला।

  • संयुक्त टीम का प्रयास: सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग की टीम ने मणिपाल हॉस्पिटल (नई दिल्ली) के यूरोलॉजी व किडनी ट्रांसप्लांट विभागाध्यक्ष डॉ. विकास जैन के तकनीकी मार्गदर्शन और नेतृत्व में इस जटिल सर्जरी को सफल बनाया।

🛡️ संक्रमण से बचाव के लिए विशेष आईसीयू: 7 दिन तक डॉक्टरों की गहन निगरानी

पोस्ट-ऑपरेटिव केयर और सावधानियां:

  • एक सप्ताह का ऑब्जर्वेशन: सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की इंचार्ज डॉ. नीलिमा टंडन के अनुसार, मरीज और डोनर दोनों को आगामी 7 दिनों तक मेडिसिन, नेफ्रोलॉजी और एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की 24 घंटे विशेष निगरानी में रखा जाएगा ताकि ऑर्गन एक्सेप्टेंस और आंतरिक रिकवरी की निरंतर जांच हो सके।

  • अलग एयर-कंडीशनिंग युक्त स्पेशल आईसीयू: ट्रांसप्लांट के बाद संक्रमण (Infection) के जोखिम को शून्य करने के लिए मरीज के लिए अलग से एक स्पेशल आइसोलेटेड आईसीयू तैयार किया गया है, जिसमें सेंट्रलाइज्ड एसी के स्थान पर स्वतंत्र एसी यूनिट लगाई गई है।

  • प्रवेश पर सख्त पाबंदी: संक्रमण के खतरे को देखते हुए मरीज के कक्ष में केवल अधिकृत डॉक्टरों और आवश्यक मेडिकल स्टाफ को ही पीपीई प्रोटोकॉल के साथ जाने की अनुमति दी गई है।

🚆 दिल्ली-इंदौर की लंबी भागदौड़ से राहत: अंचल के लाखों मरीजों को मिला बड़ा संबल

क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव:

  • स्थानीय स्तर पर सुविधा: अब तक ग्वालियर-चंबल संभाग में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा न होने के कारण मरीजों को इंदौर, दिल्ली या जयपुर जाना पड़ता था, जिसमें लाखों का अतिरिक्त खर्च और यात्रा की भारी परेशानी होती थी।

  • अंचल के लिए वरदान: सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में इस सफल शुरुआत से ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, दतिया, गुना और बुंदेलखंड क्षेत्र के मरीजों को अपने ही शहर में न्यूनतम खर्च पर विश्वस्तरीय उपचार मिल सकेगा।

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