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बालाघाट: सेरेब्रल मलेरिया से 10 साल की काजल की मौत, झोलाछाप के इलाज से 2 वर्षीय मासूम ने तोड़ा दम

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बालाघाट (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में मासूम बच्चों की असमय मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों से दो और बच्चों की मौत की दुखद खबर सामने आई है।

परसवाड़ा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम मोहनपुर की 10 वर्षीय बालिका काजल और बैहर ब्लॉक के गोगाटोला भंडेरी निवासी 2 वर्षीय बालक हिमांशु की उपचार के दौरान जान चली गई। जांच में काजल के सेरेब्रल मलेरिया से पीड़ित होने की पुष्टि हुई थी, जिसकी गंभीर हालत को देखते हुए बालाघाट से गोंदिया रेफर किया गया था।

वहीं मासूम हिमांशु का इलाज परिजन घर पर ही झोलाछाप डॉक्टर से करवा रहे थे। इन दो ताजा मौतों के साथ ही जिले के बैगा आदिवासी बाहुल्य अंचलों में रहस्यमयी व मौसमी बीमारियों से मरने वाले बच्चों का आंकड़ा 29 तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है।

🦟 सेरेब्रल मलेरिया और झोलाछाप का इलाज बना काल: दोनों घटनाओं का ब्योरा

स्वास्थ्य लापरवाही और मौतों की वजह:

  • काजल की स्थिति: मोहनपुर पंचायत निवासी 10 वर्षीय काजल को तेज बुखार की शिकायत के बाद 22 अगस्त को स्वास्थ्य केंद्र में जांच के लिए लाया गया था, जहां मलेरिया की पुष्टि हुई। 26 अगस्त को तबीयत बिगड़ने पर उसे बालाघाट के निजी अस्पताल और फिर गोंदिया रेफर किया गया, जहां शनिवार सुबह इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

  • हिमांशु का मामला: बैहर के गोगाटोला भंडेरी में 2 वर्षीय हिमांशु को भी मलेरिया था, लेकिन सही चिकित्सकीय सुविधा के अभाव में परिजन झोलाछाप से दवा दिलाते रहे, जिससे समय पर सही इलाज न मिलने के कारण उसकी मौत हो गई।

  • पुलिस सुरक्षा में पहुंचा शव: मृतिका काजल के शव को जब परिजन एंबुलेंस से गांव ला रहे थे, तब प्रशासन की सतर्कता के तहत एक सरकारी वाहन और पुलिस बल सुरक्षा के साथ मोहनपुर तक साथ चला।

📍 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दौरे के दिन ही सामने आईं मौतें: उठे गंभीर सवाल

प्रशासनिक संज्ञान और जमीनी हालात:

  • सीएम का दौरा: विडंबना यह है कि शनिवार को ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बालाघाट जिले के दौरे पर थे, जहां उन्होंने प्रभावित आदिवासी परिवारों से मुलाकात कर व्यवस्थाएं सुधारने और हरसंभव सरकारी मदद का भरोसा दिया था।

  • लगातार हो रही मौतें: इससे पहले भी धामनगांव की 4 वर्षीय माही मरकाम और मोहनपुर बैगाटोला के 4 वर्षीय लवकुश की बीमारी से जान जा चुकी है।

  • स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल: सीएम के दौरे और स्वास्थ्य विभाग के दावों के बावजूद सुदूर बैगा आदिवासी इलाकों में मौसमी बीमारियों की रोकथाम और झोलाछाप डॉक्टरों पर लगाम कसने में विफलता को लेकर स्थानीय स्तर पर कड़े सवाल उठ रहे हैं।

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