नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की अपनी मांग पुनः दोहराई है।
उन्होंने आग्रह किया कि परिसीमन से संबंधित किसी भी प्रस्ताव को संसद में पेश करने से पहले सभी राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों को उसका विस्तृत अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। खरगे का यह पत्र संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा संसद के एक और विशेष सत्र की संभावना के संकेत दिए जाने के ठीक एक दिन बाद आया है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने मांग की है कि लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों की संख्या को अगले 25 वर्षों तक यथावत रखा जाए और वर्ष 2029 के आम चुनावों से ही महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू किया जाए। खरगे ने स्पष्ट किया कि संसदीय कार्य मंत्री द्वारा विशेष सत्र के संकेत और मानसून सत्र के औपचारिक समापन में हो रहे विलंब को देखते हुए यह मांग दोबारा उठाना अनिवार्य हो गया है।
📅 16 जुलाई के पत्र का दिया हवाला: ‘दोबारा बुलडोजर चलाने की कोशिश न हो’
पत्र के मुख्य अंश और पूर्व का संदर्भ:
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पिछला पत्र: खरगे ने याद दिलाया कि उन्होंने 16 जुलाई 2026 को भी प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर परिसीमन प्रस्ताव पर सभी दलों के साथ व्यापक विमर्श का अनुरोध किया था।
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विस्तृत अध्ययन का अवसर: उन्होंने पत्र में लिखा कि यह मुद्दा देश के भविष्य और संघीय ढांचे के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए किसी भी संभावित विशेष सत्र में इसे लाने से पहले सभी पक्षों को पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।
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कड़ा संदेश: कांग्रेस अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि 16 और 17 अप्रैल 2026 की तरह इस बार भी विधायी प्रक्रिया पर बुलडोजर चलाने का प्रयास न किया जाए।
📋 खरगे ने प्रधानमंत्री के समक्ष रखीं ये 3 प्रमुख मांगें
परिसीमन को लेकर कांग्रेस का रुख:
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543 सीटों की यथास्थिति: लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की कुल संख्या को अगले 25 वर्षों तक यथावत बरकरार रखा जाए।
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राज्यों का सीट आवंटन: विभिन्न राज्यों को लोकसभा में मौजूदा सीट आवंटन अनुपात को भी अगले 25 वर्षों तक कायम रखा जाए।
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महिला आरक्षण: वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से ही संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33%) आरक्षण को पूर्ण रूप से लागू किया जाए।
⚖️ 17 अप्रैल को दो-तिहाई बहुमत के अभाव में गिर गया था 131वां संशोधन विधेयक
संसदीय पृष्ठभूमि:
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विधेयक पर मतदान: उल्लेखनीय है कि 17 अप्रैल को लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित 131वां संविधान संशोधन विधेयक आवश्यक दो-तिहाई विशेष बहुमत न मिलने के कारण पारित नहीं हो सका था।
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मत विभाजन: उस दौरान विधेयक के पक्ष में 298 मत और विपक्ष में 230 मत पड़े थे, जिसके कारण यह संवैधानिक संशोधन कानूनी रूप नहीं ले पाया था।
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