Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Haryana PGT Seniority List Revised: हरियाणा में दिव्यांग श्रेणी के 19 पीजीटी शिक्षकों की वरिष्ठता सू... Haryana Road Safety Initiative: हरियाणा में सड़क किनारे खड़े अनुपयोगी बिजली खंभों को हटाने का अभियान... HPSC HCS Final Result 2026: हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा का फाइनल रिजल्ट जारी, अभिषेक सरोहा ने किया टॉ... बेटी से छेड़खानी करने वाले का हाथ काटने वाले को 2 लाख का इनाम देंगे सांसद पप्पू यादव Kasganj Crime News: कासगंज में डेढ़ माह के मासूम बच्चे की खरीद-फरोख्त का खुलासा, मां समेत पांच आरोपी... Shiva Sharma Murder Case: लखनऊ में शिवा हत्याकांड की मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे कर सकती है सरेंडर, पुल... कुरुक्षेत्र के पास जम्मू-कश्मीर जा रही बस पर पथराव, सीएम उमर अब्दुल्ला ने जताई नाराजगी साधारण परिवार की बेटी से कैसे अंडरवर्ल्ड और माफिया के संपर्क में आई श्रद्धा दुबे? जानिए पूरी क्राइम ... आंध्र प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग, जगन ने नायडू सरकार पर लगाया ‘जंगल राज’ का आरोप ग्वालियर सड़क हादसे पर सीएम मोहन यादव का कड़ा एक्शन, सीएसपी हटाए गए और 3 थाना प्रभारियों समेत 8 पुलि...

लुधियाना ग्रेनेड हमले की साजिश में ISI का हाथ: मलेशिया से डिपोर्ट 3 आतंकियों से पूछताछ में खुलासा, जेलों से चल रहा था नेटवर्क

15

लुधियाना (पंजाब): मलेशिया से हाल ही में डिपोर्ट कर भारत लाए गए तीन संदिग्धों से पुलिस और खुफिया एजेंसियों की पूछताछ में सीमा पार से संचालित नार्को-टेरर नेटवर्क को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) पंजाब में आतंकी वारदातों और विस्फोटों को अंजाम देने के लिए स्थानीय गैंगस्टरों और जेलों में बंद शातिर कैदियों का इस्तेमाल कर रही है। पकड़े गए संदिग्ध लुधियाना की सब्जी मंडी के पास चीनी निर्मित ग्रेनेड से किए जाने वाले नाकाम हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल थे।

🌐 मलेशिया में बैठे ‘अली’ के जरिए ISI का खेल, खालिस्तानी कट्टरपंथियों से जुड़े तार

अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और साजिशकर्ताओं की भूमिका:

  • डिपोर्ट संदिग्धों की पहचान: डिपोर्ट किए गए आरोपियों की पहचान अजय मलेशिया, जसप्रीत सिंह उर्फ जस बेहबल और पवनदीप सिंह के रूप में हुई है।

  • मलेशिया का ‘अली’ कनेक्शन: पाकिस्तान में बैठा आतंकी ऑपरेटर मलेशिया में रह रहे ‘अली’ नाम के व्यक्ति के जरिए दिशा-निर्देश दे रहा था। मलेशिया प्रवास के दौरान जस बेहबल की मुलाकात अली से हुई, जो सीधे आईएसआई के संपर्क में था।

  • हैंडलरों से सीधा संपर्क: अली के जरिए ही जस और उसके साथी पाकिस्तानी हैंडलरों से जुड़े। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी अजय मलेशिया पहले से ही खालिस्तानी कट्टरपंथियों और विदेशी हैंडलरों के संपर्क में था।

⛓️ जेलों से संचालित हो रहा था नेटवर्क: 6 कैदियों समेत 10 पहले ही गिरफ्तार

जेल नेटवर्क और स्थानीय गुर्गों की भर्ती:

  • जेलों से कनेक्शन: साजिश के तार पंजाब और राजस्थान की जेलों से जुड़े थे। पुलिस इस मामले में 10 अन्य आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

  • कैदियों की संलिप्तता: गिरफ्तार आरोपियों में श्री मुक्तसर साहिब, श्री गंगानगर और फरीदकोट की जेलों में बंद 6 कैदी शामिल हैं।

  • युवाओं को भड़काना: राजस्थान के गंगानगर निवासी अजय और फरीदकोट निवासी जस बेहबल ने जेल संपर्कों का इस्तेमाल कर जमीनी स्तर पर नए लड़कों को लालच देकर साजिश में शामिल किया था।

💣 अमृतसर से लुधियाना पहुंचे थे ग्रेनेड: हथियारों और ड्रग्स की तस्करी का था सौदा

हमले की योजना और डिलीवरी रूट:

  • शिवपुरी चौक पर गिरफ्तारी: इससे पहले लुधियाना के शिवपुरी चौक पर गश्त के दौरान पुलिस ने कुलदीप नामक युवक को ग्रेनेड से भरे बैग सहित पकड़ा था, जबकि उसका साथी शेखर फरार हो गया था।

  • मुक्तसर जेल से निर्देश: पूछताछ में खुलासा हुआ था कि मुक्तसर जेल में बंद कैदियों के निर्देश पर ही वे अमृतसर से यह विस्फोटक लाकर लुधियाना में ब्लास्ट करने पहुंचे थे।

  • तस्करी के रूट का वादा: अजय मलेशिया पाकिस्तानी हैंडलरों के लिए ड्रग्स और अवैध हथियारों की खेप रिसीव कर रहा था। इसके बदले पाकिस्तानी आकाओं ने तस्करी के सुरक्षित रूट और भारी वित्तीय मदद का भरोसा देकर लुधियाना में ब्लास्ट करने का जिम्मा सौंपा था।

🚁 नार्को-टेरर मॉडल और ड्रोन डिलीवरी पर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

आतंकी मॉडल और आगामी रणनीति:

  • नार्को-टेरर गठजोड़: सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान की आईएसआई पंजाब में शांति भंग करने के लिए ड्रग सिंडिकेट और संगठित गैंगस्टर नेटवर्क का गठजोड़ बना रही है।

  • ड्रोन से हथियारों की ड्रॉपिंग: सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियार और विस्फोटक पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में गिराए जाते हैं, जिन्हें जेलों में बैठे गैंगस्टर अपने ग्राउंड नेटवर्क के जरिए शहरों में पहुंचाते हैं।

  • तलाश जारी: पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य स्लीपर सेल्स, मददगारों और पनाहगाहों की पहचान करने में जुटी हैं।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.