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महाराष्ट्र में महामंडलों के बंटवारे पर महायुति की अहम बैठक: विधायकों की संख्या तय करेगी फॉर्मूला, DPC फंड पर भी बनी सहमति

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मुंबई (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र की महायुति सरकार में लंबे समय से लंबित महामंडलों, बोर्डों और विभिन्न राज्य निगमों के बंटवारे को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ पर एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई।

बैठक में भारतीय जनता पार्टी (BJP), शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के शीर्ष नेताओं ने भाग लिया। लगभग डेढ़ घंटे तक चली इस विस्तृत चर्चा में सत्ता-साझेदारी से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया, जिनमें निगमों का आवंटन, जिला नियोजन समिति (DPC) फंड का वितरण और गठबंधन के भीतर आंतरिक समन्वय को मजबूत करना शामिल रहा। सूत्रों के अनुसार, अगले 15 दिनों के भीतर महामंडलों के बंटवारे पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

📊 विधायकों की संख्या के अनुपात में तय होगा महामंडलों के आवंटन का फॉर्मूला

सत्ता साझेदारी और संभावित फॉर्मूला:

  • सीटों के आधार पर हिस्सेदारी: महामंडलों और राज्य निगमों के वितरण के लिए विधानसभा में प्रत्येक घटक दल के पास मौजूद विधायकों की संख्या को मुख्य आधार बनाए जाने का प्रस्ताव है।

  • समानुपातिक प्रतिनिधित्व: इस तय फॉर्मूले के तहत बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी को उनके संख्याबल के अनुसार विभिन्न विभागों और निगमों की कमान सौंपी जा सकती है।

  • अगले दौर की वार्ता: किन-किन निगमों की जिम्मेदारी किस दल के पास जाएगी, इसे अंतिम रूप देने के लिए नेताओं के बीच अगले कुछ दिनों में एक-दो दौर की और चर्चाएं होने की संभावना है।

👥 मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री समेत तीनों घटक दलों के वरिष्ठ नेता रहे उपस्थित

बैठक में सम्मिलित प्रमुख नेतृत्व:

  • बीजेपी प्रतिनिधिमंडल: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले और वरिष्ठ मंत्री गिरीश महाजन मौजूद रहे।

  • शिवसेना प्रतिनिधिमंडल: उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ मंत्री उदय सामंत, शंभूराज देसाई और दादा भुसे शामिल हुए।

  • एनसीपी प्रतिनिधिमंडल: सुनेत्रा पवार, छगन भुजबल, हसन मुश्रीफ और संजय खोडके ने पार्टी का पक्ष रखा।

  • आपसी समन्वय: तीनों दलों के शीर्ष नेताओं की यह संयुक्त बैठक गठबंधन में सामंजस्य और प्रशासनिक सुगमता बढ़ाने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

💰 DPC फंड वितरण के लिए 70-30 का नया प्रारूप, विवाद निवारण की व्यवस्था

जिला नियोजन समिति (DPC) निधि आवंटन योजना:

  • 70-30 का फॉर्मूला: जिला विकास निधि (DPC Fund) के आवंटन के लिए प्रस्तावित प्रारूप के अनुसार 70% राशि स्थानीय विधायकों की अनुशंसा पर विकास कार्यों में खर्च होगी, जबकि शेष 30% राशि संबंधित जिले के पालकमंत्री के स्तर पर तय योजनाओं में लगेगी।

  • विवाद सुलझाने का तंत्र: यदि फंड के इस्तेमाल को लेकर घटक दलों में कोई असहमति होती है, तो सबसे पहले संभागीय आयुक्त स्तर पर समाधान निकाला जाएगा; यदि वहां सहमति नहीं बनती है तो अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के स्तर पर लिया जाएगा।

🤫 सार्वजनिक मंचों पर विवादित बयानबाजी से बचने की सख्त हिदायत

गठबंधन अनुशासन और भावी रणनीति:

  • बयानबाजी पर रोक: बैठक में गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक-दूसरे के दल, विधायकों, सांसदों अथवा वरिष्ठ नेतृत्व के खिलाफ मीडिया व सार्वजनिक मंचों पर अनावश्यक टिप्पणियों से पूरी तरह बचने के निर्देश दिए गए।

  • संयुक्त रणनीति: आगामी बैठकों के माध्यम से प्रशासनिक और राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को गति देकर महायुति सरकार के जनहितकारी कार्यक्रमों को धरातल पर उतारने का संकल्प लिया गया।

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