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वेब सीरीज देखकर बनाई ‘चोरी की क्लास’: 18 साल होते ही बच्चों को निकालता था हिस्ट्रीशीटर, जबलपुर RPF का बड़ा एक्शन

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जबलपुर (मध्य प्रदेश): अपराध और सिनेमाई कहानियों से प्रेरणा लेकर अपराध को अंजाम देने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला मध्य प्रदेश के जबलपुर से सामने आया है।

यहाँ एक शातिर अपराधी ने खुद अपराध करने के बजाय मासूम और बेसहारा बच्चों की बकायदा ‘चोरी की पाठशाला’ शुरू कर दी। नाबालिग बच्चों को संगठित ट्रेनिंग देकर चलती ट्रेनों और प्लेटफॉर्मों से यात्रियों के मोबाइल, पर्स व कीमती सामान चोरी करवाने वाले इस गिरोह के मुख्य सरगना को रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने धर दबोचा है।

⚖️ 18 साल की उम्र होते ही ‘गैंग से छुट्टी’: कानून से बचने के लिए बनाया अजीबोगरीब नियम

इस संगठित अपराध नेटवर्क की कार्यप्रणाली का सबसे हैरान करने वाला पहलू:

  • कानूनी दांवपेंच का फायदा: सरगना नितेश कुमार अच्छी तरह जानता था कि कानूनन नाबालिग बच्चों (Juveniles) पर वयस्कों जैसी कठोर धाराएं नहीं लगतीं और वे बाल सुधार गृह तक सीमित रहते हैं।

  • बालिग होते ही निष्कासन: जैसे ही गिरोह में शामिल कोई बच्चा 18 वर्ष (बालिग) का होता था, उसे तुरंत प्रभाव से नेटवर्क से बाहर कर दिया जाता था ताकि पुलिस की कड़ी कार्रवाई और जेल जाने के जोखिम से उसका नेटवर्क सुरक्षित रहे।

  • हिस्ट्रीशीटर का बैकग्राउंड: RPF थाना प्रभारी राजीव खरब के अनुसार, 40 वर्षीय आरोपी नितेश कुमार जबलपुर का कुख्यात हिस्ट्रीशीटर है, जिस पर चोरी, लूट, डकैती की तैयारी और आर्म्स एक्ट से जुड़े 15 से अधिक गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

📺 वेब सीरीज और वीडियो देखकर आया आइडिया, हादसे के बाद बदला पैंतरा

वारदात के नए तरीके अपनाने की मुख्य वजहें:

  • हादसे में खराब हुआ पैर: करीब दो वर्ष पूर्व एक गंभीर सड़क दुर्घटना में नितेश का एक पैर खराब हो गया था, जिससे वह खुद भागकर या सक्रिय होकर वारदातें करने में शारीरिक रूप से असमर्थ हो गया।

  • सिनेमा से लिया आइडिया: खुद लाचार होने के बाद उसने क्राइम वेब सीरीज और आपराधिक वीडियो देखकर पुलिस से बचने के लिए गरीब व नाबालिग बच्चों को ढाल बनाने की योजना तैयार की।

🏘️ कच्ची बस्तियों के मासूमों को लालच देकर जोड़ा, 50 से 70 बच्चे थे नेटवर्क में

नेटवर्क के विस्तार और भर्ती की प्रक्रिया:

  • टारगेट इलाके: आरोपी ने मदार टेकरी, हनुमानताल, सिद्धबाबा की पहाड़ी और रेलवे स्टेशन के आसपास स्थित झुग्गी-झोपड़ियों के 12 से 16 वर्ष के मासूम बच्चों को निशाना बनाया।

  • पैसे का प्रलोभन: बच्चों को महंगे शौक, जेब खर्च और पैसों का लालच देकर अपराध की दुनिया में धकेला गया।

  • गैंग का दायरा: प्राथमिक अनुमान के मुताबिक इस गिरोह में करीब 50 से 70 मासूम बच्चे सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे।

🎓 2 महीने की सघन ‘ट्रेनिंग’ और 10 साल के वेंडर अनुभव का इस्तेमाल

बच्चों को मैदान में उतारने से पहले दी जाने वाली ट्रेनिंग:

  • चोरी के तरीके: सो रहे रेल यात्रियों का बैग चुपचाप काटना, भीड़भाड़ वाले प्लेटफॉर्म और ट्रेनों में जेब तराशना व मोबाइल फोन चुराने का अभ्यास कराया जाता था।

  • आउटर पर कूदने का हुनर: ट्रेन जब आउटर सिग्नल पर धीमी गति में होती, तो सामान लेकर सुरक्षित कूदकर भागने की विशेष ट्रेनिंग दी जाती थी।

  • रेलवे का पुराना ज्ञान: नितेश पूर्व में करीब 10 वर्षों तक रेलवे स्टेशन पर अवैध वेंडर का काम कर चुका था, इसलिए उसे ट्रेनों की समय-सारिणी, आउटर पॉइंट्स, ठहराव और आरपीएफ की गश्त (Patrolling) के समय की सटीक जानकारी थी, जिसका इस्तेमाल वह बच्चों को सिखाने में करता था।

🛡️ RPF की त्वरित कार्रवाई: सरगना सलाखों के पीछे, बच्चों के पुनर्वास की कवायद शुरू

आगामी पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया:

  • सफल गिरफ्तारी: RPF ने 17 अगस्त को ठोस खुफिया सूचना के आधार पर जाल बिछाकर मुख्य आरोपी नितेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया।

  • बच्चों की पहचान व काउंसलिंग: सुरक्षा एजेंसियां और चाइल्ड वेलफेयर से जुड़ी संस्थाएं अब गिरोह से जुड़े सभी 50 से 70 नाबालिग बच्चों की शिनाख्त कर उन्हें अपराध की दुनिया से बाहर निकालने और समाज की मुख्यधारा में पुनर्वासित करने में जुटी हैं।

  • कबाड़ियों पर शिकंजा: बच्चों द्वारा चुराए गए मोबाइल, लैपटॉप और सोने-चांदी के जेवरात खरीदने वाले अवैध कबाड़ियों और रिसीवरों की धरपकड़ के लिए भी लगातार छापेमारी की जा रही है।

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