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माझी लाड़की बहिन योजना: e-KYC और जांच के बाद 92 लाख नाम कटे, 2.48 करोड़ से घटकर 1.65 करोड़ हुई लाभार्थियों की संख्या

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मुंबई (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र सरकार की अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना ‘मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहिन योजना’ में ई-केवाईसी (e-KYC) और प्रशासनिक सत्यापन प्रक्रिया के उपरांत लाभार्थियों की सूची में व्यापक बदलाव दर्ज किया गया है।

सूचना के अधिकार (RTI) के अंतर्गत ‘द यंग व्हिसलब्लोअर्स फाउंडेशन’ के कार्यकर्ता जितेंद्र घाडगे द्वारा प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, योजना के कुल लाभार्थियों की संख्या पहले दर्ज 2.48 करोड़ से घटकर अब लगभग 1.65 करोड़ (1,65,66,164) रह गई है। इसका तात्पर्य यह है कि जांच प्रक्रिया के बाद कुल 92.10 लाख आवेदकों को इस कल्याणकारी योजना से बाहर कर दिया गया है।

❌ किन प्रमुख कारणों से रद्द हुए 92 लाख से अधिक लाभार्थियों के नाम?

सत्यापन और डेटा मिलान के दौरान विभिन्न नियमों के उल्लंघन के आधार पर आवेदनों को निरस्त किया गया:

  • ई-केवाईसी (e-KYC) का अधूरा होना: सबसे बड़ा कारण ई-केवाईसी प्रक्रिया का पूर्ण न होना रहा, जिसके चलते लगभग 62 लाख महिलाएं योजना के दायरे से बाहर हो गईं।

  • पारिवारिक आय सीमा से अधिक: 16 लाख आवेदकों की वार्षिक पारिवारिक आय निर्धारित मानक ₹2.5 लाख से अधिक पाई गई।

  • सरकारी सेवा में कार्यरत होना: 4.42 लाख महिलाओं ने स्वयं को सरकारी कर्मचारी घोषित किया, जबकि 8 हजार अन्य की पहचान विभागीय जांच में सरकारी सेवा में होने के रूप में हुई।

  • अन्य पेंशन योजनाओं का लाभ: लगभग 3.60 लाख महिलाएं पूर्व से ‘संजय गांधी निराधार योजना’ अथवा अन्य समान सरकारी योजनाओं का लाभ ले रही थीं।

  • एक परिवार में नियम से अधिक लाभार्थी: करीब 2.50 लाख मामलों में एक ही राशन कार्ड/परिवार में तय सीमा से अधिक लाभार्थी पाए गए।

  • आयु सीमा का उल्लंघन: लगभग 1.80 लाख लाभार्थी योजना की अधिकतम निर्धारित आयु सीमा (65 वर्ष) से अधिक उम्र के पाए गए।

💰 4.5 लाख से अधिक अपात्रों से वसूली की तैयारी, करीब ₹800 करोड़ का मामला

नियमों का उल्लंघन कर गलत तरीके से योजना का लाभ लेने वालों पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की गई है:

  • गलत ट्रांसफर की पहचान: आंकड़ों के अनुसार, लगभग 4.5 लाख से अधिक ऐसे मामलों की पुष्टि हुई है, जिन्होंने अपात्र होने के बावजूद योजना की राशि प्राप्त की। अनुमान है कि इनके खातों में करीब ₹600 से ₹800 करोड़ की राशि अंतरित हुई है।

  • सख्त कानूनी व वसूली कार्रवाई: राज्यमंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर ने नाशिक में स्पष्ट किया कि जिन अपात्र व्यक्तियों या पुरुषों के खातों में नियमों के विपरीत वित्तीय सहायता पहुंची है, उनसे संपूर्ण राशि की शत-प्रतिशत वसूली की जाएगी और विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

❓ ई-केवाईसी प्रक्रिया और वंचित वर्गों की पहुंच पर उठे सवाल

योजना से बड़ी संख्या में आवेदकों के बाहर होने पर सामाजिक संगठनों ने चिंता व्यक्त की है:

  • तकनीकी बाधाएं: आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र घाडगे के अनुसार, ई-केवाईसी न करा पाने वाली 62 लाख महिलाओं में अधिकांश ग्रामीण, आदिवासी और दूरदराज के क्षेत्रों की महिलाएं हो सकती हैं, जहां डिजिटल कनेक्टिविटी और तकनीकी साक्षरता सीमित है।

  • मासिक संबल की महत्ता: आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं के लिए ₹1,500 की मासिक वित्तीय सहायता अत्यंत महत्वपूर्ण है, ऐसे में केवल तकनीकी कारणों से वंचित रह जाने की समस्या पर संवेदनशीलता से विचार करने की मांग उठाई जा रही है।

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