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सड़क हादसे के बाद AIIMS भोपाल में युवक हुआ ब्रेन-डेड, परिजनों ने लिया अंगदान का फैसला

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भोपाल (मध्य प्रदेश): कभी-कभी किसी परिवार द्वारा अत्यंत कठिन और दुख की घड़ी में लिया गया एक साहसिक फैसला दूसरों के लिए जीवन की सबसे बड़ी किरण बन जाता है।

ऐसा ही एक भावुक और प्रेरणादायी मामला राजधानी के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS Bhopal) में सामने आया है। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के निवासी 24 वर्षीय सुनील बोसमाकर एक भीषण सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए एम्स भोपाल लाया गया। चिकित्सकों की अथक कोशिशों के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ और तय मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार अंततः उन्हें ‘ब्रेन-डेड’ घोषित कर दिया गया। इस गहरे आघात के बावजूद परिजनों ने बड़ा दिल दिखाते हुए अंगदान (Organ Donation) की सहमति दी, जिससे तीन गंभीर मरीजों को नया जीवन मिल सका।

🫀 लिवर और दोनों किडनियों का हुआ सफल निष्कर्षण, तीन जरूरतमंदों को मिला सहारा

एम्स भोपाल के विशेषज्ञ डॉक्टरों के अनुसार, परिजनों की लिखित सहमति और अनिवार्य कानूनी व चिकित्सीय प्रक्रियाओं के बाद सुनील के शरीर से लिवर और दोनों किडनियां सुरक्षित रूप से निकाली गईं:

  • लिवर और पहली किडनी: इनका सफल प्रत्यारोपण एम्स भोपाल में ही भर्ती दो गंभीर मरीजों के लिए किया गया।

  • दूसरी किडनी: राज्य स्तरीय आवंटन प्रणाली के तहत दूसरी किडनी भोपाल के शाहपुरा स्थित बंसल अस्पताल में भर्ती जरूरतमंद मरीज को आवंटित की गई।

🚦 एम्स से बंसल अस्पताल तक बना ग्रीन कॉरिडोर, सुरक्षित पहुंचाया गया अंग

बंसल अस्पताल में भर्ती मरीज के लिए आवंटित किडनी को निर्धारित न्यूनतम समय सीमा के भीतर पहुंचाना चिकित्सकीय दृष्टि से अत्यंत आवश्यक था।

इसके लिए भोपाल पुलिस, यातायात प्रशासन, चिकित्सा टीमों और दोनों अस्पतालों के प्रबंधकों के आपसी समन्वय से एम्स भोपाल से लेकर शाहपुरा स्थित बंसल अस्पताल तक एक विशेष ‘ग्रीन कॉरिडोर’ (Green Corridor) तैयार किया गया। इस सुव्यवस्थित यातायात कॉरिडोर की मदद से एंबुलेंस बिना किसी रुकावट के तेज गति से सुरक्षित अंग लेकर गंतव्य तक पहुंची।

🏥 एम्स भोपाल में चौथा सफल अंगदान, ऑर्गन ट्रांसप्लांट के प्रति बढ़ी प्रतिबद्धता

एम्स भोपाल के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, संस्थान में किसी ब्रेन-डेड डोनर से संपन्न हुआ यह चौथा सफल अंगदान है।

संस्थान ने स्पष्ट किया कि ‘ब्रेन डेथ’ की पुष्टि भारत सरकार और मेडिकल काउंसिल के तय दिशा-निर्देशों के तहत गठित विशेषज्ञ बोर्ड द्वारा की जाती है। यह सफल प्रक्रिया संस्थान की मृत दाताओं (Cadaveric Organ Donation) से अंग प्रत्यारोपण के प्रति निरंतर बढ़ती विशेषज्ञता और प्रतिबद्धता को प्रमाणित करती है।

🌟 ‘हादसे की त्रासदी को जीवन की विरासत में बदला’, एम्स प्रशासन ने जताया आभार

एम्स के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. केतन मेहरा ने बताया कि सुनील के परिजनों का यह निस्वार्थ कदम समाज के लिए एक अनुपम उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि इस परिवार ने अपने प्रियजन को खोने के असहनीय दर्द के बीच भी मानवता को प्राथमिकता दी और एक सड़क दुर्घटना की त्रासदी को तीन जिंदगियों की नई उम्मीद में बदल दिया। एम्स प्रबंधन ने सुनील के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे फैसले समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हजारों मरीजों के जीवन को बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

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