Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: ऑनलाइन फॉर्म 6 से हटाई गई पूर्वजों से संबंधित अतिरिक्त घोषणा अक्टूबर आते ही दमघोंटू होने लगती है हवा: पॉल्यूशन बढ़ने से पहले ही दिल्ली-NCR में सिस्टम हुआ एक्टिव रबी सीजन 2027-28 के लिए 6 फसलों की MSP में बढ़ोतरी: किसानों को लागत पर मिलेगा 50% से 106% तक मुनाफा Gujarat Politics: पूर्व CM शंकर सिंह वाघेला की फिर होगी कांग्रेस में वापसी? नई पार्टी का ऐलान टाला; ... Jhalawar News: मां नेत्रहीन और पिता मूकबधिर, खेत से लापता 7 वर्षीय इकलौते बेटे का कुएं में मिला शव; ... Maharashtra Cannabis Bust: सोलापुर में गन्ने के खेत से ₹1.05 करोड़ का गांजा जब्त, 12 फीट ऊंचे 240 पौ... Bihar Flood Alert: नेपाल में बारिश से गंगा-गंडक उफान पर, सारण में तटबंध टूटने से दर्जनों गांव डूबे, ... Bareilly Cyber Crime News: बरेली में साइबर ठगों का बड़ा जाल, छह वारदातों में उड़ाए लाखों; टेलीग्राम ... UP Politics: 'नौकरी छोड़ ई-रिक्शा चलाओ' वाले बयान पर घिरे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, बचाव में उतरे ओपी... अखिलेश यादव संग दिखे योगी के मंत्री राकेश सचान: राज्यसभा चुनाव के बीच तस्वीर ने बढ़ाई सियासी सरगर्मी

मंडला में राशन वितरण का अनाज बर्बाद: कीट नियंत्रण फेल होने से गोदाम में कीड़े लगे, स्टेट सिविल कॉरपोरेशन ने थमाया नोटिस

13

मंडला (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के मंडला जिले से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और सरकारी अनाज भंडारण से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर व चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। जिले के खैरी स्थित राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (स्टेट सिविल कॉरपोरेशन) के सरकारी गोदाम में जिम्मेदारों की घोर अनदेखी और लचर व्यवस्था के चलते भारी मात्रा में भंडारित गेहूं नष्ट हो चुका है। गरीबों और जरूरतमंद परिवारों के पोषण हेतु सुरक्षित रखा गया लगभग 70 लाख रुपये मूल्य का गुणवत्तायुक्त गेहूं देखरेख के अभाव में धीरे-धीरे कीड़ों की भेंट चढ़कर पूरी तरह अनुपयोगी हो गया है।

🐛 गरीबों के निवाले पर लगे कीड़े, सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

गोदाम में भंडारित खाद्यान्न में घुन और कीड़े लगते रहे और संबंधित जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोते रहे।

यह सड़ा हुआ अनाज सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के अंतर्गत जिले के गरीब, अंत्योदय और पात्र राशन कार्डधारी परिवारों को वितरित किया जाना था। खाद्यान्न भंडारण के दौरान अनाज का इस स्तर पर सड़ जाना न केवल सरकारी राजस्व और खजाने पर भारी चोट है, बल्कि उन हजारों वंचित परिवारों के अधिकारों पर भी सीधा कुठाराघात है, जिनके चूल्हे इस राशन पर निर्भर थे। यह पूरी घटना अनाज संरक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण और खाद्य सुरक्षा के समूचे तंत्र पर कड़े सवाल खड़े करती है।

🪲 कीट नियंत्रण (Pest Control) और नियमित निरीक्षण का दावा पूरी तरह फेल

शासकीय प्रोटोकॉल के अनुसार, किसी भी खाद्यान्न गोदाम में अनाज के सुरक्षित रखरखाव, नियमित फ्यूमिगेशन (कीट नियंत्रण), नमी की जांच, नियमित निरीक्षण और स्टॉक की निरंतर निगरानी की अनिवार्य व्यवस्था होती है।

ऐसे में यह गंभीर जांच का विषय है कि जब हजारों क्विंटल गेहूं धीरे-धीरे धूल (डस्ट) में तब्दील हो रहा था, तब स्थानीय निगरानी तंत्र क्या कर रहा था? नियमानुसार अनाज की भौतिक सुरक्षा और गुणवत्ता की प्राथमिक व सीधी जवाबदेही गोदाम प्रभारी (Warehouse In-charge) की होती है।

⚖️ 3000 बोरियां सड़ीं, गोदाम प्रभारी से होगी 70 लाख के नुकसान की भरपाई: प्रबंधक हेमंत वर्मा

इस पूरे मामले पर मध्य प्रदेश स्टेट सिविल कॉरपोरेशन के जिला प्रबंधक हेमंत वर्मा ने सख्त रुख अपनाते हुए स्थिति स्पष्ट की है।

उन्होंने बताया कि लगभग 20 दिन पूर्व गोदाम के औचक निरीक्षण के दौरान गेहूं की दुर्दशा सामने आई थी, जिसके उपरांत गोदाम प्रभारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। जिला प्रबंधक के अनुसार, “गोदाम के तीन टी-शेड (टेंगो) में कुल 9,000 बोरियां भंडारित हैं, जिनमें से करीब 3,000 बोरियों का गेहूं कीड़ों से गंभीर रूप से प्रभावित होकर डस्ट फॉर्मेट में बदल चुका है, जबकि शेष 6,000 बोरियां सुरक्षित हैं।” उन्होंने दोटूक कहा कि वर्ष 2025-26 में उपार्जित इस 17 मीट्रिक टन अनाज के नुकसान की पाई-पाई की भरपाई संबंधित लापरवाह गोदाम प्रभारी के वेतन व देयकों से की जाएगी और शेष अनाज की तत्काल ग्रेडिंग व सफाई कर उसे सुरक्षित किया जा रहा है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.