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JPSC-JSSC आंदोलन पर पुलिस-प्रशासन की सख्ती पर भड़के छात्र: सीधे मुख्यमंत्री से करेंगे बात, मांगों पर अड़े अभ्यर्थी

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रांची (झारखंड): JPSC और JSSC परीक्षाओं में व्यापक सुधार की मांग को लेकर रांची स्थित ऐतिहासिक जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा अभ्यर्थियों का आंदोलन अनवरत जारी है। गुरुवार को आंदोलनकारी छात्रों ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन पर सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से दुष्प्रचार व भ्रम फैलाने का गंभीर आरोप लगाया। अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि JPSC के परीक्षार्थियों के हटने की बातें पूरी तरह निराधार हैं; वास्तविकता यह है कि कई परीक्षाओं की गड़बड़ियों से पीड़ित अभ्यर्थी आज भी धरना स्थल पर मजबूती से डटे हुए हैं। कुछ साथियों का स्वास्थ्य नासाज होने के कारण ही उनकी तात्कालिक भौतिक उपस्थिति कम नजर आ रही है।

🎨 आंदोलन जारी, आयोजित हो रहे हैं रचनात्मक कार्यक्रम; सीएम आवास घेराव पर कोर कमेटी लेगी अंतिम निर्णय

JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच के कोर कमेटी सदस्य पीयूष कुमार ने जानकारी दी कि छात्रों का यह सत्याग्रह पूरी निष्ठा के साथ जारी है।

उन्होंने बताया कि आंदोलन के अंतर्गत निरंतर विभिन्न रचनात्मक व शांतिपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। यद्यपि वर्तमान में किसी बड़े या उग्र प्रदर्शन की रूपरेखा नहीं बनाई गई है। मुख्यमंत्री आवास घेराव के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी कोर कमेटी द्वारा इस विषय पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है; सहमति बनते ही मीडिया के माध्यम से भावी रणनीति सार्वजनिक कर दी जाएगी।

🧩 अफवाहों के बीच आंदोलन को स्थिर रखना बनी बड़ी चुनौती, एकजुटता पर अड़े छात्र

पीयूष कुमार ने आगे कहा कि इस समय सबसे विकट चुनौती आंदोलन को लेकर योजनाबद्ध तरीके से फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाओं से निपटने की है।

उन्होंने आरोप लगाया कि तंत्र द्वारा यह गलत संदेश प्रेषित करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है कि JPSC के अभ्यर्थी आंदोलन से पृथक हो चुके हैं या फिर छात्रों का यह सत्याग्रह कमजोर पड़ गया है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि सभी अभ्यर्थी अपनी न्यायसंगत मांगों को लेकर पूरी तरह एकजुट हैं और आंदोलन स्थगित करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।

🗣️ ‘अब किसी मध्यस्थ से नहीं, सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से होगी सीधी वार्ता’— छात्र मयंक सिंह

वहीं, आंदोलनकारी छात्र नेता मयंक सिंह ने प्रशासनिक स्तर पर वार्ता की संभावनाओं को खारिज करते हुए कहा कि अब किसी भी अधीनस्थ स्तर पर बातचीत नहीं की जाएगी।

उन्होंने कहा कि अभ्यर्थी अब सीधे राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से टेबल टॉक (प्रत्यक्ष संवाद) करना चाहते हैं। मुख्यमंत्री और पीड़ित विद्यार्थियों के बीच सीधी एवं पारदर्शी वार्ता के पश्चात ही आंदोलन की भावी दिशा अथवा समाप्ति पर कोई निर्णय लिया जाएगा। तब तक छात्र अपनी मांगों पर पूरी प्रतिबद्धता के साथ अडिग रहेंगे।

📞 ‘अभिभावकों को फोन कर मांगे जा रहे विवरण’— पुलिस-प्रशासन पर आंदोलन कमजोर करने का आरोप

प्रदर्शनकारी एक छात्र ने जिला प्रशासन एवं पुलिस तंत्र पर आंदोलन को दबाव बनाकर कमजोर करने का संगीन आरोप जड़ा।

छात्र ने बताया कि आंदोलनरत विद्यार्थियों के परिजनों एवं अभिभावकों को सीधे फोन किए जा रहे हैं और उनसे व्यक्तिगत विवरण तथा पहचान संबंधी जानकारी मांगी जा रही हैं, जिससे कई युवाओं के मन में अपने भविष्य को लेकर असुरक्षा का भाव उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने कहा कि JPSC और JSSC अभ्यर्थियों के बीच फूट डालकर आंदोलन को पृथक-पृथक करने की साजिश रची जा रही है, किंतु छात्रों की वैचारिक एकजुटता अटूट है।

⏳ सरकार के नीतिगत फैसले का इंतजार, विद्यार्थियों का घट रहा है भरोसा

आंदोलनकारी छात्र कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि सभी अभ्यर्थी राज्य सरकार के त्वरित और नीतिगत निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि दमनकारी नीतियों या परीक्षार्थियों का मनोबल गिराने से यह जन-आंदोलन समाप्त होने वाला नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सरकार के ढुलमुल रवैये के कारण युवाओं का व्यवस्था और वादों पर से भरोसा धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।

💼 सिपाही भर्ती से JPSC तक रोजगार का संकट, संयमित रूप में जारी रहेगा छात्रों का संघर्ष

छात्र नीतिश मंडल ने झारखंड में युवाओं के संघर्ष पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य के मेधावी विद्यार्थियों को अपने बुनियादी रोजगार हक के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि छात्र सिपाही भर्ती से लेकर सर्वोच्च JPSC परीक्षा तक के आवेदन भरते हैं, किंतु हर भर्ती प्रक्रिया धांधली और कानूनी दांव-पेंच की शिकार हो जाती है। अभ्यर्थियों ने संकल्प दोहराया कि जब तक भर्ती प्रक्रियाओं में शत-प्रतिशत पारदर्शिता, परीक्षा सुधार और अन्य मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका यह अनुशासित व संयमित आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।

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