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छत्तीसगढ़ अस्पताल प्रशासन की लापरवाही: मृत जवान के परिजनों को मिला ‘डिस्चार्ज’ का मैसेज, पीड़िता पत्नी ने उठाये गंभीर सवाल

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रायपुर (छत्तीसगढ़): मरीजों एवं उनके परिजनों को भरोसा दिलाने के लिए भेजा जाने वाला अस्पताल का एक स्वचालित (Auto-Generated) मैसेज छत्तीसगढ़ पुलिस के एक मृतक कॉन्स्टेबल के पीड़ित परिवार के लिए गहरे दुःख का कारण बन गया।

परिजनों को मोबाइल पर एक ऑटो-जेनरेटेड मैसेज प्राप्त हुआ, जिसमें लिखा था कि मरीज “ठीक हो गया है” और “घर लौट रहा है”। अस्पताल प्रशासन ने इस अत्यंत शर्मनाक तकनीकी गलती के लिए एक दिहाड़ी डेटा एंट्री ऑपरेटर को दोषी ठहराते हुए उसे सेवामुक्त कर दिया है। किंतु, मृतक कॉन्स्टेबल के परिजनों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

📱 पति के अंतिम संस्कार के 42 दिन बाद रजिस्टर्ड नंबर पर आया आयुष्मान भारत का डिस्चार्ज मैसेज

अधिकारियों ने बताया कि जशपुर जिले में पदस्थ 39 वर्षीय पुलिस कॉन्स्टेबल देवनारायण राम को 26 जून को सरगुजा जिला मुख्यालय स्थित अंबिकापुर के शासकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ 30 जून को इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी।

मृतक राम की पत्नी सीमा कुजूर, जो स्वयं जशपुर के एक सरकारी अस्पताल में नर्स हैं, ने बताया कि पति की मौत के बाद परिजनों ने उनका अंतिम संस्कार कर दिया था और अस्पताल द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र भी निर्गत कर दिया गया था। किंतु 6 अगस्त को (मौत के 42 दिन बाद) सीमा कुजूर को पति के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आयुष्मान भारत योजना का संदेश प्राप्त हुआ: “प्रिय देवनारायण राम, हमें खुशी है कि आप ठीक हो गए हैं और घर लौट रहे हैं। हमें उम्मीद है कि आप आयुष्मान भारत पीएम-जय (PM-JAY) योजना के तहत दी जाने वाली मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं से संतुष्ट होंगे।” मैसेज में भर्ती तिथि 26 जून और डिस्चार्ज तिथि 6 अगस्त दर्ज थी, जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मरीज 42 दिनों तक भर्ती रहा।

💔 ‘जो दर्द से गुजर रहा है वही समझ सकता है’— पीड़िता पत्नी सीमा कुजूर ने उच्च स्तरीय जांच की उठाई मांग

पति को खो चुकीं सीमा कुजूर के लिए यह ऑटो-जेनरेटेड मैसेज उनके गहरे जख्मों को कुरेदने जैसा था।

उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी एक मार्मिक वीडियो संदेश में कहा, “आप सहज अनुमान लगा सकते हैं कि किसी ऐसे परिवार पर क्या बीतती है, जिसके सदस्य की मृत्यु हो चुकी हो और उसके ठीक होने का संदेश मिले।” उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की मांग करते हुए सवाल उठाया कि “मैं स्वयं स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत कर्मचारी हूँ, फिर भी मेरे साथ ऐसा हुआ। इससे समझा जा सकता है कि आम गरीब और आदिवासी परिवारों के साथ क्या स्थिति होती होगी।”

🏥 42 दिनों के गलत इस्तेमाल का आरोप खारिज, अस्पताल प्रशासन ने दी ₹16,700 के क्लेम ब्लॉक होने की सफाई

दूसरी ओर, स्वास्थ्य अधिकारियों ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया कि मरीज की मृत्यु के उपरांत उनके आयुष्मान कार्ड का दुरुपयोग किया गया था।

अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पैसे केवल मरीज के वास्तविक प्रवास (26 से 30 जून) के 5 दिनों के इलाज के लिए ही काटे गए थे। बयान के अनुसार, सर्जरी आईसीयू और ब्लड ट्रांसफ्यूजन से जुड़े कुल ₹16,700 का पैकेज ही ब्लॉक किया गया था। मरीज के आयुष्मान खाते में ₹4.74 लाख का बैलेंस अब भी सुरक्षित बचा हुआ है। पोर्टल पर क्लेम क्लोज करने में डेटा एंट्री ऑपरेटर द्वारा अत्यधिक विलंब किए जाने के कारण यह तकनीकी संदेश 6 अगस्त को स्वतः ट्रिगर होकर चला गया।

📄 डेटा एंट्री ऑपरेटर की सेवा समाप्त, राज्य नोडल एजेंसी को प्रणाली सुधार हेतु भेजा गया पत्र

सरगुजा जिला स्वास्थ्य विभाग के डॉ. शैलेंद्र गुप्ता ने घटना पर गहरा खेद व्यक्त करते हुए बताया कि क्लेम प्रक्रिया को समय पर बंद न करने वाले कलेक्टर रेट पर कार्यरत डेटा एंट्री ऑपरेटर को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है।

इसके अतिरिक्त, अस्पताल प्रशासन ने नवा रायपुर स्थित राज्य नोडल एजेंसी (SNA) को औपचारिक पत्र भेजकर प्रणाली में आवश्यक सुधार करने का अनुरोध किया है। पत्र में आग्रह किया गया है कि डिस्चार्ज, रेफरल अथवा मृत्यु से संबंधित ऑटो-जेनरेटेड मैसेज तभी प्रेषित किए जाएं जब मरीज की वास्तविक क्लिनिकल स्थिति का सत्यापन कर लिया जाए। (स्रोत: पीटीआई)

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