नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने कर्नाटक सरकार को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) से जुड़े मामलों की त्वरित एवं दैनिक (रोजाना) सुनवाई सुनिश्चित करने हेतु एक और विशेष अदालत (Special Court) गठित करने का कड़ा निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की तीन सदस्यीय पीठ ने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) साजिश केस में नामजद आरोपी शाहिद खान की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया।
⚖️ गवाहों से पूछताछ और अंतरिम जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार की दलीलें खारिज कीं
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने राज्य सरकार के अधिवक्ता की दलीलों पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की।
जस्टिस बागची ने कहा कि अंतरिम जमानत अर्जी और गवाहों के परीक्षण को लेकर राज्य का दृष्टिकोण विधि-संगत नहीं है। गवाहों से पूछताछ मुख्य विचारण (ट्रायल) का अभिन्न अंग है। जब कोई गवाह अदालत में उपस्थित हो, तो महज जमानत अर्जी लंबित होने के कारण उसे वापस नहीं लौटाया जा सकता। अंतरिम आवेदन दाखिल होने से गवाहों का बयान दर्ज करने की प्रक्रिया बाधित नहीं होनी चाहिए।
📊 707 गवाहों की सूची पर CJI सूर्यकांत की टिप्पणी: बिना रोजाना सुनवाई के न्याय में होगी देरी
कर्नाटक राज्य के वकील ने जब तर्क दिया कि सुनवाई पूरी होने में मात्र छह माह लगेंगे और यह गंभीर अपराध से जुड़ा मामला है, तो सीजेआई सूर्यकांत ने इस पर व्यावहारिक रुख अपनाया।
CJI ने कहा कि अभियोजन पक्ष कुल 707 गवाहों (जिसमें 64 सुरक्षित गवाह शामिल हैं) से पूछताछ करना चाहता है। अदालतों पर मुकदमों के अत्यधिक बोझ और पीठासीन अधिकारी के पास अन्य मामले लंबित होने के कारण जब तक दैनिक आधार पर सुनवाई नहीं होगी, तब तक इसे तार्किक समय में पूर्ण कर पाना असंभव है। CJI ने निर्देश दिया कि मुख्य 50 और 3 संरक्षित गवाहों के बयान प्राथमिकता से दर्ज किए जाएं।
🏛️ 2 सप्ताह के भीतर ढांचागत सुविधाएं और न्यायिक पद स्वीकृत करने का राज्य सरकार को आदेश
CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश दिया कि कर्नाटक राज्य तुरंत UAPA मामलों के दैनिक विचारण हेतु आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर (आधारभूत ढांचा) उपलब्ध कराए।
इसके अंतर्गत कर्नाटक उच्च न्यायिक सेवा में एक अतिरिक्त न्यायिक अधिकारी का पद सृजित करने के साथ-साथ आवश्यक सहायक स्टाफ और अन्य लॉजिस्टिक सुविधाएं स्वीकृत करने का निर्देश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन सभी आवश्यक मंजूरियों की प्रक्रिया राज्य सरकार द्वारा दो सप्ताह की अनिवार्य समय-सीमा के भीतर पूरी की जानी चाहिए।
⏱️ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश करेंगे अधिकारी की नियुक्ति, 3 माह में मुख्य साक्ष्य दर्ज करने का लक्ष्य
अदालत ने कहा कि जैसे ही राज्य सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर और नए पदों की औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर देती है, कर्नाटक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया जाएगा कि वे एक अतिरिक्त न्यायिक अधिकारी तैनात कर UAPA विशेष अदालत का गठन करें।
यह प्रकरण भी तुरंत उसी नवगठित विशेष अदालत को अंतरित किया जाएगा। पीठ ने निर्देशित किया कि पीठासीन अधिकारी सबसे पहले तीन सुरक्षित गवाहों तथा उसके उपरांत अन्य महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज करेंगे, ताकि अभियोजन के प्रमुख साक्ष्य अधिकतम तीन महीने की अवधि में रिकॉर्ड किए जा सकें।
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.