अजमेर (राजस्थान): राजस्थान में अजमेर नगर निगम अब शीघ्र ही प्रसिद्ध मंदिरों और ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले फूलों से उच्च गुणवत्ता की जैविक खाद बनाने की तैयारी में जुट गया है।
इस जैविक खाद से स्थानीय किसानों को भारी लाभ मिलेगा। ख्वाजा साहब की दरगाह, पुष्कर स्थित जगतपिता ब्रह्मा मंदिर सहित शहर के प्रमुख मंदिरों व धार्मिक स्थलों पर अर्पित किए जाने वाले फूलों को अजमेर नगर निगम अब अलग से एकत्र करेगा। इन फूलों को ऑटो टिपर वाहनों के माध्यम से प्रसंस्करण यार्ड तक पहुँचाकर वैज्ञानिक विधि से जैविक खाद तैयार की जाएगी। इस योजना के तहत प्रतिदिन कुल पाँच हजार किलोग्राम फूलों से खाद निर्मित की जाएगी।
🌾 5,000 किलो फूलों का होगा पुनर्चक्रण, किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी उच्च गुणवत्ता वाली खाद
निगम द्वारा तैयार खाद को कृषि कार्यों हेतु किसानों को उपलब्ध कराने की व्यापक योजना बनाई गई है।
अजमेर नगर निगम की स्वास्थ्य शाखा की एक विशेष टीम इस प्रोजेक्ट पर प्राथमिकता से कार्य कर रही है। आंकड़ों के अनुसार, अजमेर दरगाह में प्रतिदिन लगभग ढाई हजार किलो, पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर में करीब 500 किलो और शहर के अन्य प्रमुख देवालयों में तीन हजार किलो से अधिक फूल चढ़ावे के रूप में अर्पित किए जाते हैं। उपयोग के उपरांत ये फूल अक्सर इधर-उधर फेंक दिए जाते थे, परंतु अब इनका पूर्णतः सदुपयोग किया जाएगा।
🏭 मशीनों की सहायता से तैयार होगी खाद, बनाए जाएंगे विशेष कलेक्शन सेंटर
इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत दरगाह, ब्रह्मा मंदिर और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर फूल एकत्र करने के लिए पृथक-पृथक कलेक्शन सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
प्रातः एवं सायं काल निगम के ऑटो टिपर इन केंद्रों से संग्रहित फूलों को उठाकर निर्धारित यार्ड तक पहुँचाएंगे, जहाँ आधुनिक मशीनों की सहायता से जैविक खाद तैयार की जाएगी। नगर निगम प्रतिदिन एकत्र होने वाले फूलों की कुल मात्रा की भी नियमित निगरानी रखेगा।
🌳 आजाद पार्क में एकत्र किए जाएंगे फूल, कृषि उत्पादकता बढ़ाने में मिलेगी मदद
ब्रह्मा मंदिर, दरगाह शरीफ तथा अन्य सभी बड़े देवालयों, जहाँ भी भारी मात्रा में फूल एकत्र होते हैं, वहाँ से इन्हें उठाकर आजाद पार्क स्थित प्रसंस्करण केंद्र ले जाया जाएगा।
वहाँ तैयार खाद किसानों को न्यूनतम मूल्य पर दी जाएगी, ताकि उनकी फसलों की पैदावार और बेहतर हो सके। इसके लिए सभी तकनीकी व प्रशासनिक तैयारियां पूर्ण की जा रही हैं और शीघ्र ही धरातल पर कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।
🛕 धार्मिक आस्था और पवित्रता का रखा जाएगा पूरा ध्यान, पुरानी व्यवस्था में होगा बदलाव
उल्लेखनीय है कि अब तक मंदिर और दरगाह में चढ़ने वाले फूलों को जल स्रोतों, सरोवर के किनारे या किसी अन्य पवित्र स्थान पर ठंडे भाव से विसर्जित किया जाता था।
ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में चढ़ने वाले गुलाब व अन्य फूलों को परिसर स्थित ऐतिहासिक बावड़ी में सराब किया जाता था, जिससे उनकी पवित्रता व आस्था बनी रहती थी। अब नगर निगम धार्मिक आस्था और शुचिता का पूर्ण ध्यान रखते हुए इन पवित्र पुष्पों को सीधे रिसाइकिल कर पर्यावरण और किसानों के हित में उपयोग लाएगा।
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