बड़वानी का ऐतिहासिक सिद्धनाथ महादेव मंदिर: जहां एक स्वयंभू तो दूसरा उड़कर आया था शिवलिंग, जानें राजाओं के जमाने की अखंड ज्योति का रहस्य
बड़वानी (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के रानीपुरा स्थित सिद्धनाथ महादेव मंदिर शहर का सबसे प्राचीन और अपार जन-आस्था का प्रमुख केंद्र है। इस ऐतिहासिक मंदिर का इतिहास इतना पुरातन है कि इसकी स्थापना किस कालखंड में हुई, इसका कोई सटीक प्रामाणिक उल्लेख किसी के पास नहीं है। मंदिर से जुड़ी विभिन्न अलौकिक मान्यताओं, धार्मिक अनुष्ठानों और पवित्र परंपराओं के कारण यहाँ प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन-पूजन हेतु पहुँचते हैं।
👑 बड़वानी रियासत के राजपरिवार के संरक्षण में रहा मंदिर, एक ही परिसर में विराजित हैं दो दिव्य शिवलिंग
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित शैलेंद्र तिवारी बताते हैं कि उनके पूर्वज भी पीढ़ियों से इस धाम में पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं।
सिद्धनाथ महादेव मंदिर का गौरवशाली इतिहास बड़वानी रियासत के राजाओं से सीधा जुड़ा हुआ है। राजा रणजीत सिंह के शासनकाल से यह मंदिर राजपरिवार के प्रत्यक्ष संरक्षण में रहा है और आज भी उसी परंपरा के अनुसार इसका सुचारू संचालन एवं रखरखाव किया जाता है। मंदिर की सबसे अद्भुत विशेषता यहाँ एक साथ स्थापित दो शिवलिंग हैं। मान्यता है कि इनमें से एक शिवलिंग स्वयंभू (स्वयं प्रकट) है, जबकि दूसरा शिवलिंग आकाश मार्ग से उड़कर इस स्थान पर आया था, जिसे संतों ने पहचानकर स्थापित किया।
🔱 ‘हरि’ और ‘हर’ के अलौकिक मिलन का प्रतीक, अन्न से शिवलिंग को ढकने की है अनूठी परंपरा
विद्वानों एवं पूज्य संतों के अनुसार मंदिर में स्थापित दोनों शिवलिंगों को ‘हरि और हर’ का स्वरूप माना जाता है।
इनमें से एक शिवलिंग भगवान विष्णु (हरि) तथा दूसरा भगवान शिव (हर) का प्रतीक है। इसी दिव्य मिलन के कारण इस पवित्र स्थान का नाम सिद्धनाथ महादेव मंदिर पड़ा। मंदिर में एक अनूठी परंपरा शिवलिंग को अन्न से ढकने की भी है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और ग्रह-नक्षत्रों की शांति हेतु शिवलिंग को धान, गेहूं, चना, चावल, शक्कर तथा विभिन्न अनाजों से ढकते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से जीवन के सभी अशुभ ग्रह शांत होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
🪔 राजाओं के समय से निरंतर प्रज्वलित है अखंड ज्योति, महामृत्युंजय मंत्र से दूर होते हैं असाध्य रोग
सिद्धनाथ महादेव मंदिर परिसर में बड़वानी रियासत के राजाओं के समय से प्रज्वलित ‘अखंड ज्योति’ आज भी बिना रुके निरंतर जल रही है।
यह अखंड ज्योति मंदिर की प्राचीन परंपरा और अविचल आस्था का जीवंत साक्ष्य है। पंडित शैलेंद्र तिवारी ने बताया कि मंदिर में प्रतिदिन महामृत्युंजय मंत्र सहित अनेक वैदिक ऋचाओं का सस्वर जाप किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि यहाँ विधि-विधान से मंत्र जाप व अनुष्ठान कराने से गंभीर रोगों से पीड़ित भक्तों को स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है और भगवान आशुतोष की कृपा से उनके समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं।
🔔 सावन मास और महाशिवरात्रि पर उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब, अनुष्ठान कराने पहुँचते हैं भक्त
सावन मास, महाशिवरात्रि और विभिन्न सनातन धार्मिक पर्वों पर सिद्धनाथ महादेव मंदिर में देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं का विशाल सैलाब उमड़ता है।
स्थानिक नागरिकों के अनुसार यह मंदिर केवल एक पूजा-अर्चना का स्थल ही नहीं, बल्कि बड़वानी की अति-प्राचीन धार्मिक विरासत, अटूट लोक-आस्था और सनातन संस्कृति का अमर प्रतीक है। दूर-दूर से श्रद्धालु अपने स्वजनों के उत्तम स्वास्थ्य, पारिवारिक सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए यहाँ विशेष अनुष्ठान कराने आते हैं।
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