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CG Vidhan Sabha: छत्तीसगढ़ में डॉक्टरों का संलग्नीकरण समाप्त, स्वास्थ्य विभाग में नए पदों पर होगी भर्ती; लता उसेंडी ने सदन में उठाया स्वास्थ्य सेवाओं का मुद्दा

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रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के प्रश्नकाल के दौरान डॉक्टरों के संलग्नीकरण, रिक्त पदों पर भर्ती और कोंडागांव जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध सुविधाओं का मुद्दा जोर-शोर से उठा. विधायक लता उसेंडी ने जिले में संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और उप स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति तथा वहां उपलब्ध सुविधाओं को लेकर जनप्रतिनिधियों द्वारा दिए गए आवेदनों की जानकारी सरकार से मांगी.

छत्तीसगढ़ विधानसभा में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा गूंजा

छत्तीसगढ़ विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी और चिकित्सकों के संलग्नीकरण (अटैचमेंट) का मुद्दा विधायक प्रबोध मिंज ने जोरदार तरीके से उठाया. इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सदन में बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और जिला अस्पतालों से की गई चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति और संलग्नीकरण को रद्द किया जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही कुछ मामलों में प्रतिनियुक्ति जारी रखी जाएगी .

सरगुजा क्षेत्र में डॉक्टरों के रिक्त पदों की जानकारी

प्रबोध मिंज ने सरगुजा जिले के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों के रिक्त पदों की स्थिति पर सरकार से जवाब मांगा. विधायक मिंज ने पूछा कि जिले में कुल कितने पद खाली हैं और इन्हें कब तक भरा जाएगा. उन्होंने कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

डॉक्टरों के अटैचमेंट पर स्पष्ट नीति बनाने की मांग

विधायक प्रबोध मिंज ने यह भी कहा कि कई बार अस्पतालों में पदस्थ डॉक्टरों को अन्य स्थानों पर संलग्न कर दिया जाता है. इससे मूल स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की कमी और बढ़ जाती है, जिससे वहां की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं. उन्होंने सरकार से इस व्यवस्था पर स्पष्ट नीति बनाने की मांग की.

525 रिक्त पदों पर होगी भर्ती

इस सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में डॉक्टरों की भर्ती दो स्तरों पर की जाती है. एक भर्ती प्रक्रिया राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के माध्यम से होती है, जबकि दूसरी राज्य सरकार के माध्यम से संचालित की जाती है. उन्होंने बताया कि फिलहाल 525 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया जारी है और इसे जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है.मंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को पूरा होने में कुछ समय लगता है, इसलिए इसकी सटीक समयसीमा बताना मुश्किल है. हालांकि सरकार इस दिशा में तेजी से काम कर रही है और जल्द ही रिक्त पदों को भरने की दिशा में प्रगति दिखाई देगी।.

अस्पतालों में सलंग्नीकरण की व्यवस्था होगी समाप्त

इसी दौरान मंत्री ने सदन में एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की. उन्होंने कहा कि प्रदेश के शासकीय अस्पतालों में लंबे समय से चल रही संलग्नीकरण की व्यवस्था को समाप्त किया जाएगा.सीएचसी, पीएचसी और जिला अस्पतालों से जिन चिकित्सकों या कर्मचारियों को अन्य स्थानों पर अटैच किया गया है, उन सभी मामलों की समीक्षा कर उन्हें वापस उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजा जाएगा. स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल उन स्थानों पर ही प्रतिनियुक्ति जारी रखी जाएगी जहां वास्तव में इसकी अत्यधिक आवश्यकता होगी. बाकी सभी जगहों पर संलग्नीकरण समाप्त कर दिया जाएगा, ताकि स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों और कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके

आवेदनों की विभागीय स्तर पर होती है जांच

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सदन में जवाब देते हुए बताया कि समय-समय पर जनप्रतिनिधियों से स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े आवेदन प्राप्त होते हैं. इन आवेदनों की विभागीय स्तर पर जांच की जाती है और निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए जाने पर कार्यों को भारत सरकार या राज्य सरकार के स्तर से स्वीकृति प्रदान की जाती है.

विधायक ने पूछा स्वास्थ्य विभाग के कार्यक्रमों से जुड़ा सवाल

चर्चा के दौरान लता उसेंडी ने यह भी पूछा कि जिले में स्वास्थ्य विभाग के कार्यक्रमों का संचालन और निर्देशन किस अधिकारी के माध्यम से किया जाता है. इस पर मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों का संचालन एचएनएम के माध्यम से किया जाता है, जबकि राज्य स्तर के कार्यक्रम कलेक्टर के निर्देशन में जिला और निचले स्तर के अधिकारियों द्वारा संचालित किए जाते हैं.

विधायक ने आगे सवाल उठाया कि क्या इन कार्यक्रमों के आदेश केवल मौखिक रूप से दिए जाते हैं या लिखित रूप में भी जारी होते हैं. मंत्री ने स्पष्ट किया कि बड़े कार्यक्रमों के निर्देश सामान्यतः लिखित रूप में जारी किए जाते हैं, हालांकि कुछ छोटे कार्यक्रम मौखिक निर्देशों के आधार पर भी आयोजित हो जाते हैं.

कार्यक्रम के बाद भी नहीं हुआ भुगतान

इस पर लता उसेंडी ने आरोप लगाया कि कोंडागांव जिले में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए, लेकिन उनके भुगतान अब तक नहीं किए गए हैं. उन्होंने कहा कि कई बार कार्यक्रम मौखिक सूचना के आधार पर भी कराए जाते हैं, लेकिन बाद में उनका भुगतान नहीं किया जाता.उन्होंने सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि सदन में आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन अधिकारियों द्वारा कार्रवाई नहीं होती.

‘यदि वर्क ऑर्डर हुआ है तो भुगतान निश्चित’

मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस मामले में जांच कराने का आश्वासन देते हुए कहा कि यदि किसी कार्यक्रम के लिए वर्क ऑर्डर जारी हुआ है तो उसका भुगतान निश्चित रूप से किया जाएगा.उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में मौखिक आदेश के आधार पर हुए कार्यक्रमों की जानकारी सामने आती है, तो उनके भुगतान पर भी विचार किया जाएगा. मंत्री ने बताया कि संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने पर नए वित्तीय वर्ष में भुगतान की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी.वहीं अधिकारियों के गलत जानकारी देने के आरोप पर उन्होंने कहा कि इसकी विस्तृत जानकारी अलग से उपलब्ध कराई जाएगी.

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