Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
हल्द्वानी में कांग्रेस रैली स्थल के 'शुद्धिकरण' पर भड़की झारखंड कांग्रेस, 14 अगस्त को सभी जिलों में ... रांची रेलवे स्टेशन पर RPF का बड़ा एक्शन: 'ऑपरेशन WILEP' के तहत 2 दोमुंहा सांप और 3 नाग के साथ 2 तस्क... रांची: JPSC-JSSC आंदोलन के बीच अस्पताल में भर्ती देवेंद्र नाथ महतो से मिले रघुवर दास, कहा— 'छात्रों ... आईआईटी धनबाद के शोधकर्ताओं का कमाल: 80% फ्लाई ऐश और 20% प्लास्टिक से बनाया FPA, अंडरग्राउंड माइंस हो... रांची के मोरहाबादी मैदान में स्वतंत्रता दिवस की तैयारियां अंतिम दौर में, सीएम हेमंत सोरेन करेंगे ध्व... JPSC-JSSC आंदोलन पर पुलिस-प्रशासन की सख्ती पर भड़के छात्र: सीधे मुख्यमंत्री से करेंगे बात, मांगों पर... पलामू, गढ़वा और लातेहार में स्वतंत्रता दिवस पर हाई अलर्ट: थानों को SOP जारी, पलामू में वित्त मंत्री ... दुमका में राज्यपाल संतोष गंगवार फहराएंगे तिरंगा: पुलिस लाइन में रिहर्सल पूरी, देवघर के KKN स्टेडियम ... झारखंड में हर घर लहराएगा तिरंगा: बीजेपी ने शुरू की तिरंगा यात्रा, प्रदेश कार्यालय से मंडल स्तर तक पह... JPSC-JSSC विवाद पर घिरी हेमंत सरकार: चेयरमैन के इस्तीफे से JPSC ठप, 14वीं PT परीक्षा रद्द करने की अध...

Lok Sabha News: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव खारिज, सदन में ध्वनिमत से हुआ फैसला; जानें पूरा घटनाक्रम

30

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लोकसभा में विपक्ष की ओर से पेश किया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनि मत से खारिज हो गया. विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था. अविश्वास प्रस्ताव पर लोकसभा में दो दिनों तक बहस हुई. लोकसभा में बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा स्पीकर का बचाव किया और विपक्ष पर जमकर हमला बोला और अंत में प्रस्ताव ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया. इस प्रस्ताव के खारिज होने के बाद अब ओम बिरला लोकसभा के अध्यक्ष बने रहेंगे.

यह प्रस्ताव कांग्रेस के मोहम्मद जावेद ने कई विपक्षी सांसदों के समर्थन से पेश किया था. प्रस्ताव के समर्थन में विपक्षी सांसदों ने स्पीकर पर विपक्षी पार्टी के नेताओं के साथ पक्षपात करने का आरोप लगाया था. हालांकि एनडीएन ने नेताओं ने इसका जोरदार खंडन किया.

शाह ने स्पीकर की भूमिका का किया बचाव

अमित शाह ने बहस में भाग लेते हुए कहा किसदन का कामकाज आपसी भरोसे और नियमों के पालन पर आधारित है. उन्होंने कहा कि स्पीकर की जिम्मेदारी सदन के एक न्यूट्रल कस्टोडियन के तौर पर काम करना है.

उन्होंने कहा, इस सदन के स्थापित इतिहास के अनुसार, इसकी कार्यवाही आपसी भरोसे के आधार पर चलती है. स्पीकर एक न्यूट्रल कस्टोडियन के तौर पर काम करते हैं, जो रूलिंग पार्टी और अपोजिशन दोनों को रिप्रेजेंट करते हैं. इसी लोकसभा ने खास नियम बनाए हैं ताकि स्पीकर को सेशन कैसे चलाने चाहिए, यह गाइड किया जा सके. यह सदन कोई मार्केटप्लेस नहीं है; सदस्यों से उम्मीद की जाती है कि वे इसके नियमों और प्रोसीजर के अनुसार बोलें और हिस्सा लें.

विपक्ष ने स्पीकर पर भेदभाव का आरोप लगाया

हालांकि, विपक्षी सदस्यों ने तर्क दिया कि यह प्रस्ताव संसद में असहमति के लिए कम होती जगह पर चिंता जताने के लिए लाया गया था. आरजेडी सांसद अभय कुमार सिन्हा ने कहा कि विपक्षी सदस्यों को अक्सर लगता था कि उन्हें चेयर से पूरी सुरक्षा नहीं मिल रही है.

उन्होंने कहा, “मुझे अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि कुछ समय से चेयर सदन की आज़ादी को नहीं, बल्कि रूलिंग पार्टी के अत्याचार का प्रतीक बन गई है.”

सिन्हा ने आगे कहा, “इस सदन ने वह काला दिन भी देखा जब एक दिन में 140 से ज्यादा सांसद को सस्पेंड कर दिया गया था. असली डेमोक्रेसी वह है जिसमें सबसे गरीब और कमजोर व्यक्ति को भी लगे कि उनकी आवाज सुनी जा सकती है.” उन्होंने कहा कि जब भी विपक्षी सांसद सदन में बोलने की कोशिश करते थे, तो चेयर की तरफ से अक्सर “नहीं, नहीं, नहीं” ही दोहराया जाता था.

विपक्ष ने भाषण में रुकावट डालने का किया दावा

JMM सांसद विजय कुमार हंसदक ने कहा कि सदन में विपक्ष के भाषणों के दौरान रुकावटें आना आम बात हो गई है. उन्होंने कहा, जब विपक्ष के सांसद बोलते हैं, तो उन्हें रोका जाता है, और यह एक परंपरा बन गई है. एक और परंपरा यह है कि जब सांसद बोलते हैं, तो कैमरा दूसरी दिशा में चला जाता है.

एनसीपी (एसपी) के सांसद बजरंग मनोहर सोनवाने ने यह भी कहा कि विपक्ष को पता था कि प्रस्ताव शायद फेल हो जाएगा, लेकिन वे इस बहस का इस्तेमाल संसद के अंदर डेमोक्रेटिक अधिकारों के बारे में चिंताएं उठाने के लिए करना चाहते थे.

उन्होंने कहा, कोई भी स्पीकर पर कोई पर्सनल अटैक नहीं कर रहा है. हम सब जानते हैं कि वोटिंग में क्या होगा, लेकिन हम यह नो-कॉन्फिडेंस इसलिए लाए हैं ताकि हमारे पास जो डेमोक्रेटिक अधिकार हैं, उन्हें हाईलाइट कर सकें. एक उदाहरण का इस्तेमाल करते हुए, सोनवाने ने कहा कि चेयर का काम अक्सर एक जैसा नहीं दिखता था.

उन्होंने बहस के दौरान चेयर को संबोधित करते हुए कहा, जैसे एक टेबल फैन सिर्फ एक तरफ कूलिंग देता है, जब बिरला दाईं ओर देखते हैं, तो उनके चेहरे पर मुस्कान होती है और जब वे दूसरी तरफ देखते हैं, तो नहीं, नहीं, नहीं.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.