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Alert for Investors: ईरान पर हमले से सहमी दुनिया! शेयर बाजार में हाहाकार के आसार, सोना-चांदी और क्रिप्टो में आएगी भयंकर सुनामी?

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ईरान पर अमेरिका और इजरायल का ज्वाइंट ऑपरेशन कई मायनों में काफी अलग है. अगर कोई इस हमले या ऑपरेशन को वेनेजुएला सरीखा देख या सोच रहा है, तो ठीक नहीं होगा. इसका कारण भी है. ईरान पर इंटरनेशनल बैन होने के बाद भी रोज 3 मिलियन बैरल ऑयल प्रोडक्शन कर रहा था. जिसका 80 फीसदी चीन को सप्लाई हो रहा था. वहीं दूसरी ओर ईरान की लोकेशन है. ईरान के नजदीक गुजरने का स्ट्रेट होमुर्ज वो रास्ता है जहां से दुनिया का 20 फीसदी से ज्यादा ऑयल शिप होता है. ऐसे में अगर ये रास्ता बंद हो जाए तो दुनिया में ऑयल क्राइसिस काफी बढ़ जाएगा.

यही कारण है कि इस एक्शन के बाद आने वाले कारोबारी दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त इजाफा देखने को मिल सकता है.वहीं जिस तरह से ईरान पर इजराइल और अमेरिका ऑपरेशनल जारी है. वहीं दूसरी ओर ईरानी सेना भी पलटवार कर रही है. उसकी वजह से शेयर बाजार निवेशकों में काफी बेचैनी बढ़ गई है. जिसकी वजह अमेरिकी बाजारों से लेकर भारतीय बाजारों तक में 2 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिल सकती है. वहीं क्रिप्टोकरेंसी में भी भारी गिरावट देखने को मिल सकती है. जिसका एक झटका शनिवार को भी देखने को मिला. इसके विपरीत सोना और चांदी में बेहिसाब इजाफा देखने को मिल सकता है.

वहीं दूसरी ओर कुछ सवाल भी खड़े हो गए हैं. क्या ईरानी सरकार को हटाया जाएगा? क्या हुमुर्ज स्ट्रेट और ऑयल प्रोडक्शन को कोई नुकसान होगा? ये ऐसे सवाल हैं, जो भविष्य में कच्चे तेल, शेयर बाजार, सोना चांदी और क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों में काफी हद तक तय करेंगी? आइए आपको भी बताते हैं कि ईरान पर हमले के बाद दुनिया भर के तमाम असेट्स क्लास के बाजारों में किस तरह का रिएक्शन देखने को मिल सकता है.

कच्चे तेल की कीमतों में कितना हो सकता है इजाफा?

इंटरनेशनल बैन के बावजूद ईरान हर दिन लगभग 3.3 मिलियन बैरल तेल बनाता है. यह ध्यान देने वाली बात है कि 80 फीसदी से ज्यादा एक्सपोर्ट चीन को जाता है. एक और दिलचस्प बात लोकेशन है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट, जहां से दुनिया के 20 फीसदी तेल की आवाजाही होती है, ईरान और ओमान के बीच है. 2025 में स्ट्रेट से हर दिन लगभग 13 मिलियन बैरल कच्चा तेल गुजरता था. ऐसे में जानकारों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में 5 से 10 फीसदी का इजाफा देखने को मिल सकता है. मौजूदा समय में खाड़ी देशों का कच्चा तेल 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है. जोकि 80 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती है. डीसेंट्रलाइज़्ड एक्सचेंज पर कच्चे तेल की कीमतों में 8 फीसदी से ज्यादा का इजाफा देखने को मिल चुका है.

सोने और चांदी की कीमतों में तेजी आ सकती है

वहीं दूसरी ओर जियो पॉलिटिकल टेंशन की वजह से निवेशकों के बीच सेंटीमेंट काफी खराब हो गया है. जिसकी वजह से वो सेफ हैवन की ओर जा सकते है. केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर सोने और चांदी की कीमतों में शॉर्ट टर्म में 10 से 15 फीसदी का इहजजाफा देखने को मिल सकता है. भारत में सोने के दाम 1.85 लाख रुपए प्रति दस ग्राम तक जा सकते हैं. वहीं चांदी के दाम भारत में 3.20 लाख रुपए और इंटरनेशनल मार्केट में 100 डॉलर के पार जा सकते हैं. जानकारों की मानें तो सोने और चांदी को एक नया ट्रिगर मिला है. जिसका असर लंबे समय तक भी देखने को मिल सकता है. डीसेंट्रलाइज़्ड एक्सचेंज पर सोने की कीमतों में 4 फीसदी से ज्यादा का इजाफा देखने को मिल चुका है.

शेयर बाजार में कितना दिखेगा असर

वहीं दूसरी ओर शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है. विदेशी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी शेयर बाजार के अलावा ग्लोबल शेयर बाजारों में 1 से 2 फीसदी तक की गिरावट का अनुमान लगाया गया है. डीसेंट्रलाइज़्ड एक्सचेंज पर नैस्डैक में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिल चुकी है. जानकारों की मानें तो भारतीय शेयर बाजार में भी 1 से 2 फीसदी तक की गिरावट देखी जा सकती है. वैसे शुक्रवार को भी सेंसेक्स में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली थी. अनुमान है कि सेंसेक्स सोमवार को 80 हजार अंकों से नीचे जा सकता है.

क्रिप्टाकरेंसी मार्केट में भी गिरावट

अब बात जरा ​क्रिप्टोकरेंसी मार्केट की करते हैं. जहां पर शनिवार को काफी गिरावट देखने को मिली थी. कॉइन मार्केट कैप के आंकड़ों के अनुसार दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन के दाम में काफी गिरावट आई और दाम 63 हजार डॉलर के लेवल पर पहुंच गए. वैसे रविवार को बिटकॉइन की कीमत 2.50 फीसदी की तेजी के साथ कारोबार कर रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में 3 से 10 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिल सकती है. ईटीएफ के मोर्च पर ऑयल ईटीएफ में तेजी की संभावनाएं देखने को मिल रही हैं, जो रिटर्न देने के मामले में अमेरिकी शेयर बाजार को पीछे छोड़ सकती हैं.

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