भोपाल : मध्य प्रदेश की जेलों में क्षमता से 35 फीसदी ज्यादा कैदी बंद हैं. मध्य प्रदेश की 133 जेलों में करीबन 42 हजार 119 बंदी कैद हैं. इनमें से 52.85 फीसदी कैदी ऐसे हैं, जिनको अभी तक सजा नहीं सुनाई जा सकी है और ये विचाराधीन कैदी के रूप में जेलों में कैद हैं.
मध्य प्रदेश की जेलों में एक अप्रेल 2020 से लेकर पिछले 7 महीनों में 715 कैदियों की मौत हुई है. इनमें 36 कैदियों ने खुद जान दी है. विधानसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने यह जानकारी दी है. सरकार ने बताया कि प्रदेश में 11 नई जेलें बनाई जा रही हैं.
प्रदेश की जेलों में अभी 37 हजार 994 बंदी
मध्यप्रदेश की जेलों में कुल आवास क्षमता 24 हजार 895 है, लेकिन प्रदेश भर की जेलों में अभी 37 हजार 994 बंदी हैं. यानी जेलों में करीबन 13 हजार कैदी क्षमता से अधिक रह रहे हैं. सबसे ज्यादा खराब स्थिति प्रदेश की केन्द्रीय जेलों की है. नर्मदापुरम के दोनों खंडों को मिलाकर कुल 11 केन्द्रीय जेल हैं. इन जेलों में 14 हजार 61 आवास क्षमता है. लेकिन इन जेलों में 22 हजार 239 कैदी बंद हैं. यानी क्षमता से 8 हजार 178 कैदी अधिक सजा काट रहे हैं. इन जेलों में 50 फीसदी से लेकर 150 फीसदी तक अधिक कैदी हैं.
प्रदेश के किस केंद्रीय जेल में क्या स्थिति
- क्षमता से सबसे अधिक कैदी रीवा केन्द्रीय जेल में हैं. यहां कैदियों की कुल आवास क्षमता 886 है, जबकि यहां 2282 कैदी बंद हैं. यानी क्षमता से 1396 अधिक.
- इंदौर केन्द्रीय जेल में 1280 की क्षमता है, जबकि इसमें 2191 कैदियों को रखा गया है. यानी 911 कैदी अधिक हैं.
- भोपाल केन्द्रीय जेल में 2641 कैदियों की आवास क्षमता है, लेकिन इनके मुकाबले 3454 कैदियों को रखा गया है, यानी 813 कैदी अधिक हैं.
- जबलपुर और ग्वालियर दोनों केन्द्रीय जेल में क्रमशः 275 और 447 अतिरिक्त कैदियों को रखा गया है.
- इंदौर जिला जेल में 520 की क्षमता, लेकिन 908 कैदी रखे गए हैं. इसी तरह मंदसौर जिला जेल में 380 की क्षमता के मुकाबले 698 कैदियों को रखा गया है.
- बेढ़न में 230 की क्षमता के मुकाबले 498 कैदियों को रखा गया है.
जेलों में 22 हजार 261 विचाराधीन कैदी बंद
मध्य प्रदेश की जेलों में 22 हजार 261 कैदी ऐसे हैं, जिनको अभी तक सजा नहीं सुनाई जा सकी और यह जमानत के अभाव में जेलों में बंद हैं. यह मध्य प्रदेश की जेलों में बंद कुल कैदी का 52.85 प्रतिशत है. इन विचाराधीन कैदियों में 21 हजार 410 पुरुष, जबकि 851 महिला कैदी शामिल हैं. विचाराधीन कैदियों में सबसे ज्यादा संख्या जिला जेलों में है. जिला जेलों में 10 हजार 2 विचाराधीन पुरुष जबकि 516 महिलाएं शामिल हैं. प्रदेश में 73 उपजेल हैं. इन उप जेलों में 5 हजार 356 कैदी अभी विचाराधीन हैं. इसके अलावा केन्द्रीय जेलो में विचाराधीन कैदियों की संख्या करीनब 6 हजार 300 है.
जेलों में लगाई जा रही इलेक्ट्रिक फेंसिंग
कैदियों को दीवार फांदकर फरार होने से रोकने के लिए जेलों की दीवारों पर इलेक्ट्रिक वायर फेंसिंग वायर लगाए जाने का कार्य प्रक्रियाधीन है. सभी जेलों को सीसीटीवी नेटवर्क से जोड़ा गया है. हालांकि पिछले 77 महीनों में जेलों से 54 कैदी फरार होने में सफल रहे हैं. इन महीनों के दौरान 715 कैदियों की जेल में ही मौत हो गई, जबकि 36 कैदियों ने जेल में ही जान दे दी. सरकार ने बताया कि जेलों में बंदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है. साल 2025 में जेलों में 2828 बंदियों को अलग-अलग तरह की ट्रेनिंग दिलाई गई. 96 बंदियों को आईटीआई में ट्रेनिंग दिलाई गई.
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