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Shivpuri News: ‘पैसे दो, तभी जाने दूंगा’, शिवपुरी में बेटे के इलाज के लिए लाचार पिता को गिरवी रखना पड़ा मोबाइल

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मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला एक मामला सामने आया है. यहां एक प्राइवेट डॉक्टर की बेरहमी ने न केवल मानवता को शर्मिंदा किया, बल्कि जिले के स्वास्थ्य सिस्टम पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक लाचार पिता को अपने घायल बेटे की जान बचाने और उसे सरकारी अस्पताल ले जाने के लिए अपना मोबाइल फोन डॉक्टर के पास गिरवी रखना पड़ा.

मामला खनियाधाना तहसील के छोटी बामौर गांव का है. यहां रहने वाला 25 साल का हेमराज आदिवासी शनिवार शाम अपनी कार से दो साथियों के साथ निकला था. कंजवाया पुल के पास कार अनियंत्रित होकर पलट गई. इसमें हेमराज गंभीर रूप से घायल हो गया. दुर्घटना के बाद साथी युवक उसे अछरौनी गांव के एक निजी क्लीनिक पर छोड़कर मौके से फरार हो गए.

1800 रुपये की मांग की

जब घायल हेमराज के पिता किशोरी आदिवासी को हादसे की सूचना मिली, तो वे भागते हुए निजी क्लीनिक पहुंचे. डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार और मलहम-पट्टी के बदले 1800 रुपये की मांग की. गरीब पिता के पास उस वक्त उतनी राशि नहीं थी. किशोरी ने डॉक्टर से बार-बार हाथ जोड़कर विनती की कि उनके बेटे की हालत बिगड़ रही है, उसे जिला अस्पताल ले जाने दिया जाए और वे बाद में पैसे चुका देंगे. मगर सामने से जवाब मिला- पहले पैसे दो, तभी यहां से छुट्टी मिलेगी.

मजबूरी में गिरवी रखना पड़ा मोबाइल

बेबस पिता अपने तड़पते हुए बेटे को देख रहा था और दूसरी तरफ डॉक्टर के पास पत्थर जैसा दिल था. हार मानकर पिता ने अपना मोबाइल फोन डॉक्टर के पास गिरवी रख दिया, तब जाकर उस डॉक्टर ने घायल युवक को जिला अस्पताल ले जाने की अनुमति दी. शनिवार देर रात युवक को शिवपुरी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है.

पुलिस कार्रवाई की तैयारी

पीड़ित दलित-आदिवासी परिवार ने इस अमानवीय व्यवहार के खिलाफ पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है. किशोरी आदिवासी ने मांग की है कि ऐसे डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. ताकि किसी और गरीब को ऐसी प्रताड़ना न झेलनी पड़े. पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के बाद उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है.

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