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Pariksha Pe Charcha: ‘परीक्षा को बोझ नहीं अवसर मानें’, पीएम मोदी के मंत्र सुनने के लिए झारखंड में उमड़े 4 लाख छात्र

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रांचीः झारखंड के सभी सरकारी विद्यालयों में आज शुक्रवार को “परीक्षा पे चर्चा” के 9वें संस्करण का सीधा प्रसारण उत्साह और अनुशासन के साथ देखा गया. इस विशेष कार्यक्रम में कक्षा 6 से 12 तक के कुल 3,96,717 छात्र-छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई. विद्यार्थियों के साथ-साथ राज्य भर से 25,999 शिक्षकों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेरक संबोधन को सुना.

इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को परीक्षा से जुड़े तनाव से मुक्त करना और उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना रहा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद करते हुए परीक्षा को जीवन की कसौटी नहीं, बल्कि सीखने और आगे बढ़ने का अवसर बताया. उन्होंने कहा कि परीक्षा केवल ज्ञान को परखने का माध्यम है न कि जीवन को परिभाषित करने का पैमाना. अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने परीक्षा तनाव, समय-प्रबंधन, लक्ष्य निर्धारण, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की.

उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे पढ़ाई को बोझ न समझें, बल्कि जिज्ञासा और आनंद के साथ सीखने की आदत विकसित करें. समय का सही उपयोग, नियमित अभ्यास और स्वयं पर भरोसा ही सफलता की कुंजी है. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि असफलता से डरने के बजाय उससे सीख लेने की मानसिकता अपनानी चाहिए. उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी रुचियों और क्षमताओं को पहचानने पर जोर देते हुए कहा कि हर छात्र में कुछ न कुछ विशेष होता है. माता-पिता और शिक्षकों की अपेक्षाओं के दबाव को सकारात्मक ऊर्जा में बदलने की सीख भी उन्होंने दी.

इस कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने प्रधानमंत्री के अनुभवों और सरल उदाहरणों को ध्यानपूर्वक सुना. कई विद्यालयों में छात्रों ने इसे प्रेरणादायक और मनोबल बढ़ाने वाला बताया. शिक्षकों का भी मानना रहा कि इस तरह के कार्यक्रम छात्रों को मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं और परीक्षा के प्रति उनका दृष्टिकोण सकारात्मक होता है.

परीक्षा पे चर्चा का यह 9वां संस्करण न केवल विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शक साबित हुआ. बल्कि शिक्षकों और अभिभावकों को भी यह संदेश दिया कि बच्चों को परिणाम से अधिक प्रयास के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए. कुल मिलाकर, यह कार्यक्रम विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, संतुलन और सकारात्मक सोच को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा.

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