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Punjab Data Privacy Row: पंजाब सरकार पर लोगों का पर्सनल डेटा जुटाने का आरोप, सुखपाल खैहरा ने PM मोदी से की दखल की मांग

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कांग्रेस विधायक सुखपाल खैहरा ने पंजाब में प्रशासनिक मशीनरी का के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए तुरन्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग की है। पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर प्रशासनिक तंत्र के कथित दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस संबंध में प्रधानमंत्री को एक पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की गई है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार मुख्य सचिव, पंजाब पर दबाव बनाकर मतदाताओं से व्यापक व्यक्तिगत जानकारी एकत्र करवाने की कोशिश कर रही है, जिससे प्रशासनिक निष्पक्षता, नागरिकों की निजता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर खतरा पैदा हो गया है।

पत्र में दावा किया गया है कि मुख्य सचिव की ओर से तथाकथित “कास्ट और ड्रग्स जनगणना” को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत सरकारी अधिकारियों को नागरिकों से करीब 127 व्यक्तिगत सवाल पूछने को कहा गया है। इन सवालों में आधार और पैन कार्ड विवरण, जाति, धार्मिक मान्यताएं, कौन-सा डेरा व्यक्ति जाता है, नशे और गैंगस्टरों के खिलाफ सरकारी कार्रवाई पर राय, तथा मुफ्त बिजली जैसी योजनाओं से संतुष्टि से जुड़े प्रश्न शामिल बताए जा रहे हैं। सुखपाल खैहरा ने कहा कि, इस तरह की जानकारी का कोई स्पष्ट प्रशासनिक या कल्याणकारी उद्देश्य नजर नहीं आता और यह प्रक्रिया अत्यधिक दखल देने वाली, भेदभावपूर्ण और राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रतीत होती है।

सुखपाल खैहरा ने जानकारी देते हुए बताया कि, इस सर्वे को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में राज्य के 3 गांवों में शुरू किया गया है, जिनमें एक-एक मालवा (लालरू), दोआबा (अमृतपुर, सुल्तानपुर लोधी) और माझा (कोटली शाह, अजनाला) से है। इस बात की प्रबल आशंका है कि इस पायलट को राज्यव्यापी सर्वेक्षण में बढ़ाया जा सकता है, जिससे सत्तारूढ़ पार्टी को 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले मतदाताओं का एक राजनीतिक डेटाबेस बनाने में मदद मिल सकती है।

आशंका जताई जा रही है कि पायलट के बाद इस सर्वे को पूरे पंजाब में लागू किया जा सकता है, जिससे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ दल को मतदाताओं का एक राजनीतिक डेटाबेस तैयार करने में मदद मिल सकती है। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सिविल सेवाओं और सार्वजनिक धन के गंभीर दुरुपयोग का मामला होगा। ऑल इंडिया सर्विस के वरिष्ठ अधिकारी होने के नाते मुख्य सचिव से अपेक्षा की जाती है कि वे पूर्ण राजनीतिक निष्पक्षता, संवैधानिक मर्यादाओं और सेवा नियमों के तहत कार्य करें। किसी भी प्रकार का राजनीतिक उद्देश्य साधने वाला डेटा संग्रह प्रशासन की साख को कमजोर करता है।

इस मामले में केंद्र सरकार से मांग की गई है कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के माध्यम से तत्काल जांच कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी सिविल सेवक से राजनीतिक हित साधने वाला कार्य न कराया जाए। बिना स्पष्ट कानूनी अनुमति, सार्वजनिक उद्देश्य और गोपनीयता सुरक्षा के नागरिकों का कोई व्यक्तिगत या संवेदनशील डेटा एकत्र न किया जाए। पंजाब में प्रशासनिक तंत्र की निष्पक्षता और स्वतंत्रता को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए। पत्र के अंत में प्रधानमंत्री से इस मुद्दे को गंभीरता से लेने और नागरिकों के अधिकारों तथा प्रशासनिक व्यवस्था की पवित्रता की रक्षा के लिए त्वरित कदम उठाने की अपील की गई है। अंत में सुखपाल खैहरा ने कहा कि, ”मुझे भरोसा है कि आप इस मामले को उतनी ही गंभीरता से लेंगे जितनी यह हकदार है और नागरिकों के अधिकारों और प्रशासनिक मशीनरी की पवित्रता दोनों की रक्षा के लिए तुरंत कदम उठाएंगे।

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