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कानपुर पुलिस लाइन हादसा: सिपाहियों के मुआवजे पर NHRC सख्त, यूपी पुलिस से मांगी रिपोर्ट; जानें क्या है 6 साल पुराना पूरा मामला

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कानपुर रिजर्व पुलिस लाइन में एक बैरक गिरने में 6 साल पहले एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे. घटना 24 अगस्त 2020 को हुई थी. घायल पुलिसकर्मियों को इलाज के लिए रीजेंसी अस्पताल भेजा गया था. जहां पर काफी समय इलाज के बाद वह स्वस्थ हो पाए. कानपुर के तत्कालीन एसपी प्रीतिंदर सिंह ने मृतक कर्मी के परिवारजनों को मुआवजा देने का भी ऐलान किया था, लेकिन 6 साल बाद किसी को कुछ नहीं मिला.

तत्कालीन एसएसपी कानपुर प्रीतिंदर सिंह ने कहा था बैरक की छत गिरने से हमारे तीन लोग घायल हो गए, जिनमें से एक ने दम तोड़ दिया. हम उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं. इस दुर्घटना में हताहत कर्मी के परिवारजनों को मुआवजा दिया जाएगा. उनका अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ किया जाएगा.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दिखाई सख्ती

कानपुर बैरक हादसे में घायल सिपाहियों 6 साल बाद भी मुआवजा नहीं मिला. अब ऐसे में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सख्ती दिखाई है. आयोग ने मामले में मुख्य सचिव और गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर 6 सप्ताह में मुआवजे का पूरा ब्योरा देने के निर्देश दिए हैं.

कानपुर पुलिस लाइन में 2020 में हुए बैरक हादसे के पीड़ित पुलिसकर्मियों को अब तक मुआवजा न मिल पाने पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाया है. आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर घायलों को दिए जाने वाले मुआवजे की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है.

एनएचआरसी ने निर्देश दिया है कि यदि पीड़ित पुलिसकर्मियों को मुआवजा दिया जा चुका है, तो उसके दस्तावेजा प्रमाण 6 सप्ताह के भीतर प्रस्तुत किए जाएं. आयोग ने यह भी कहा है कि आदेशों की अनदेखी मानवाधिकार उल्लंघन की श्रेणी में आएगी.

कैसे हुआ था हादसा?

24 अगस्त 2020 को कानपुर पुलिस लाइन स्थित करीब 105 वर्ष पुरानी बैरक की छत अचानक गिर गई थी. इस हादसे में सिपाही अरविंद सिंह की मौके पर मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे. मामले में इंजीनियर पंकज कुमार ने 12 अक्टूबर 2020 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कर पीड़ितों को मुआवजा दिलाने की मांग की थी.

आयोग के निर्देश पर मृतक सिपाही के परिजनों को मुआवजा दिया गया, लेकिन घायल पुलिसकर्मियों को अब तक राहत नहीं मिल सकी है. 22 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान आयोग ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए इसे गंभीर लापरवाही करार दिया. आयोग ने राज्य सरकार को अंतिम अवसर देते हुए 6 सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है.

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