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‘सुप्रीम कोर्ट ने वही किया जो मैंने कहा था…’, UGC नियमों पर रोक के बाद निशिकांत दुबे का बड़ा दावा; सियासी हलचल तेज

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नए यूजीसी रेगुलेशंस पर रोक लगा दी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसे मामले को फिर से देखने की जरूरत है. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से नए रेगुलेशंस विरोध करने वालों को बड़ी राहत मिली है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों की इस पर प्रतिक्रिया आई हैं.

भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने इसे लेकर सोशल साइट एक्स पर पोस्ट कर विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि सुपीम कोर्ट ने वही किया, जो मैने कहा था.

उन्होंने लिखा कि UGC पर गाली देने वाले सभी ज्ञानी, पिछले 2 दिनों से संसद जा रहा हूं,किसी राजनीतिक दल के किसी सदस्य ने इसपर चर्चा तक करना मुनासिब नहीं समझा? उल्टा जिस सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में EWS को 10 प्रतिशत आरक्षण देकर गरीब की सुध ली, उसी को गाली दी जा रही है.

उन्होंने कहा कि मैं दुबारा आपसे करबद्ध निवेदन करता हूं कि पीएम मोदी पर भरोसा रखिए, संविधान की धारा 14 एवं 15 के तहत ही देश के कानून चलेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने वही किया जो मैंने कहा.

निशिकांत दुबे ने EWS आरक्षण की उठाई थी बात

इससे पहले निशिकांत दुबे ने सोशल साइट पर लिखा था कि 2005 में सवर्ण गीरीबों की स्थिति पर सीनों कमीशन कांग्रेस, राजद, झामुमो, डीएमके, बसपा, कम्युनिस्ट पार्टी ने बनवाया. 2010 पांच साल में रिपोर्ट आया. सवर्ण समाज के बच्चों के हाथ में झुनझुना मिला. पीएम मोदी ने ही EWS आरक्षण दिया.

Nishikant Dubye

उन्होंने कहा था किआज गरीब आइएएस, आइपीएस, डॉक्टर्स और प्रोफेसर्स हैं. उच्च शिक्षा में भी आरक्षण पाकर पढ़ाई कर रहे हैं, जो काम करे उसी का विरोध किया जा रहा है. इस UGC की भ्रांति भी लोगों के सामने आएगी. संविधान की धारा 14-15 पूर्णतया लागू होगा. काश इतनी आक्रामकता अल्पसंख्यक संस्थानों के मिले अधिकारों पर होता जो संविधान की धारा 25 से 29 तक पढ़ पाते.

प्रियंका चतुर्वेंदी ने फैसले का किया स्वागत

शिवसेना यूबीटी की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेंदी ने सोशल साइट एक्स पर पोस्ट में कहा कि मुझे खुशी है कि सर्वोच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप करते हुए UGC के उन दिशानिर्देशों पर रोक लगाई, जो अस्पष्ट, मनमाने थे और कैंपस में और अधिक भेदभाव पैदा करने का प्रयास थे.

उन्होंने कहा कि मुझे ट्रोल किया गया, गालियां दी गईं और मेरे सरनेम को लेकर अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया – वो भी ठीक है. जो बात प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध है, उसके खिलाफ मैं आवाज उठाता रहूंगी.

उन्होंने कहा कि यह अब स्पष्ट हो गया है कि भारत सरकार ने हस्तक्षेप करने और यूजीसी के दिशानिर्देशों को वापस लेने की अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह किनारा कर लिया. यह अब दिन के उजाले की तरह साफ है कि उन्हें जनता के विरोध का कोई सम्मान या परवाह नहीं है और जो लोग चुप रहे जब आवाज उठाना आपकी जिम्मेदारी थी, उसका फैसला समय करेगा.

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