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UGC Equity Regulations 2026: देशभर में विरोध की लहर, झारखंड के विश्वविद्यालयों में भी फूटा गुस्सा; जानें क्यों हो रहा है बवाल?

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रांची: उच्च शिक्षा में समानता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा लागू किए गए नए उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम 2026 अब देशभर में बहस और असंतोष की वजह बनते जा रहे हैं. 13 जनवरी से लागू इन नियमों को जहां एक वर्ग शैक्षणिक सुधार और सामाजिक न्याय की दिशा में अहम कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर जनरल कैटेगरी के छात्रों और शिक्षकों के बीच इसे लेकर गहरी नाराजगी और आशंकाएं उभरकर सामने आ रही हैं.

इन नियमों का असर झारखंड के विश्वविद्यालयों में भी साफ तौर पर देखा जा रहा है. रांची विश्वविद्यालय, डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, झारखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी समेत अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों और इंस्टिट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज के विद्यार्थियों ने नियमों के खिलाफ विरोध दर्ज कराया है.

छात्रों का कहना है कि समानता के नाम पर लाए गए ये नियम कहीं न कहीं विश्वविद्यालय परिसरों में असमानता और वैचारिक टकराव को बढ़ावा दे सकते हैं. विरोध कर रहे छात्रों की दलील है कि नए इक्विटी नियमों से विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले विभिन्न वर्गों के छात्रों के बीच आपसी विश्वास कमजोर हो सकता है. उनकी आशंका है कि इससे छात्र एक-दूसरे को सहयोगी की जगह प्रतिद्वंद्वी या दुश्मन के रूप में देखने लगेंगे, जिससे शैक्षणिक माहौल प्रभावित होगा.

छात्रों का यह भी कहना है कि योग्यता, अवसर और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के सिद्धांतों पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है. सिर्फ छात्र ही नहीं, बल्कि शिक्षकों के एक वर्ग ने भी इन नियमों को लेकर चिंता जताई है. शिक्षकों का कहना है कि एसटी, एससी या ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने या पढ़ाई से जुड़ी किसी कमी पर डांट-फटकार लगाने में भी उन्हें डर सताएगा कि कहीं इसे भेदभाव के रूप में न देखा जाए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई न हो जाए. इससे शिक्षक-छात्र संबंधों में असहजता बढ़ने और शिक्षण प्रक्रिया बाधित होने की आशंका जताई जा रही है.

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े वर्तमान और पूर्व छात्रों ने भी इन नियमों पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि समानता का उद्देश्य स्वागत योग्य है, लेकिन नियम ऐसे होने चाहिए जो सभी वर्गों को साथ लेकर चलें और किसी भी समूह में असंतोष न पैदा करें.

कई छात्रों ने सुझाव दिया है कि सरकार और यूजीसी को इन नियमों को लागू करने से पहले सभी हितधारकों छात्रों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय प्रशासन से व्यापक संवाद करना चाहिए था. विरोध कर रहे छात्रों और संगठनों ने केंद्र की मोदी सरकार से इस दिशा में पुनर्विचार की मांग की है.

उनका कहना है कि यदि समय रहते नियमों में संतुलन नहीं लाया गया, तो विश्वविद्यालय परिसरों में शैक्षणिक माहौल प्रभावित होने के साथ-साथ सामाजिक तनाव भी बढ़ सकता है. यूजीसी के नए इक्विटी नियम 2026 फिलहाल समानता से ज्यादा असहमति और सवालों के घेरे में नजर आ रहे हैं.

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